'श्रमिक स्पेशल ट्रेन' को लेकर तगड़ी उलझन में फंसे केंद्र और राज्य, अब किस ओर जाएगी गाड़ी
लॉकडाउन में फंसे श्रमिकों को उनके मूल राज्य में भेजने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चल पड़ी हैं। अलग से स्पेशन ट्रेनों की बुकिंग भी शुरू हो गई है। इन सबके बीच श्रमिक स्पेशल 'ट्रेन' को लेकर केंद्र और राज्यों का मूड एकाएक कुछ बदल सा गया है। ये दोनों तगड़ी उलझन में फंस गए हैं। अब राज्यों की सोच यह बन रही है कि मजदूर न जाएं।
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लॉकडाउन 4.0 में बहुत सी जगहों पर कारोबारी गतिविधियां शुरू हो रही हैं। केंद्र ने आर्थिक पैकेज की घोषणा भी कर दी है। दूसरा, राज्यों के पास बाहर से आ रहे मजदूरों को ठहराने के लिए क्वारंटीन सेंटर कम पड़ने लगे हैं। 14 दिन का खर्च भी चुभने लगा है। ऐसे में अप्रत्यक्ष तौर पर अधिकांश राज्य चाहते हैं कि अभी जो मजदूर जहां पर हैं, वहीं काम शुरू कर दें।
यही वजह है कि रेल मंत्रालय राज्यों से बार-बार ट्रेनों की संख्या पूछ रहा है, मगर दो तीन प्रदेशों को छोड़कर बाकी राज्यों का उत्साह ठंडा पड़ता जा रहा है। पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रमुख अर्थशास्त्री एसपी शर्मा का कहना है कि शहरों में अब काम शुरू हो रहा है। केंद्र और राज्य, दोनों चाहेंगे कि उद्योग धंधे रफ्तार पकड़ें।
शनिवार को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, रेलवे तेजी से अपना काम कर रहा है। लोगों को उनके घर और परिजनों से मिलवाने के लिए रेलवे तत्पर है। अब तक 1,000 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की स्वीकृति मिल चुकी है। गुरुवार को 145 ट्रेनों से कामगारों को उनके घर पहुंचाया गया है। कुल श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में से 75 फीसदी उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए चलाई गई हैं।
गोयल ने लगाया आरोप, राज्य नहीं ले रहे ट्रेन सुविधा
रेल मंत्री गोयल ने यह आरोप भी लगाया कि कई राज्य ट्रेन की सुविधा ले ही नहीं रहे हैं। महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल को छह मई से रोज चिट्ठियां भेजकर पूछ रहे हैं कि हमें बताओ कि कहां पर ट्रेन भेजनी हैं। ऐसी 17 रिक्वेस्ट तो केवल पश्चिम बंगाल सरकार को दी गई हैं।
आंध्रप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मणिपुर, मिजोरम, तमिलनाडु, ओडिशा, राजस्थान, उत्तराखंड, तेलंगाना और त्रिपुरा के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन का परिचालन हुआ है।
लॉकडाउन 4.0 ने बदल दी स्थिति
अर्थशास्त्री एसपी शर्मा बताते हैं कि पहले लॉकडाउन की बात अलग थी। तब हर कोई अपने मूल राज्य में जाने का प्रयास कर रहा था। लॉकडाउन 4.0 में स्थिति बदल गई है। अब बहुत से कामगार सोचने लगे हैं कि उद्योग शुरू हो गए हैं तो कुछ माह यहीं रहकर कमा लिया जाए।
अब गांव में जाएंगे तो वहां भी कामधंधा नहीं मिलेगा। वहां पर पहले से ही बहुत लोग पहुंच चुके हैं। मनरेगा भी ओवरफ्लो होने लगी है। कुछ राज्यों में शर्तों के साथ पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी शुरू हो रहा है। ऐसे में केंद्र, राज्य और श्रमिकों के हित में यही है कि वे काम पर लगें।
उद्योग धंधे शुरू होने से मजदूरों का भी बदला विचार
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का भी यही कहना है कि प्रदेश में नौ लाख से ज्यादा लोगों ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। हम रोजाना 20 हजार से ज्यादा लोगों को भेज रहे हैं, लेकिन अब इनमें से बहुत से लोग नहीं जाना चाहते। उन्हें पता लग गया है कि अब कामधंधा चलने लगा है।
दूसरी ओर, नोएडा में काम करने वाले श्रमिक सुरेंद्र ओझा जो बिहार के भोजपुर जिले के शाहजौली गांव के निवासी हैं, बताते हैं कि अब वे गांव नहीं जाएंगे। काम शुरू हो रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि बहुत से लोग इसलिए भी जाने से डर रहे हैं कि उन्हें वहां पर 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया जाएगा।
क्या प्रवासी मजदूरों को एक साल में घर पहुंचाएंगे: सिंह
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने शनिवार को एक ट्वीट करके केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। इसमें उन्होंने केंद्र सरकार की रणनीति और मंशा पर सवाल उठाया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि गृह मंत्रालय कह रहा है रेलवे 100 श्रमिक ट्रेन चला रही है, मतलब 1 लाख 20 हजार मजदूर प्रतिदिन घर पहुंचाए जा रहे हैं, घर जाने वाले प्रवासी मजदूरों का अनुमान 4 करोड़ है इसका मतलब साफ है पीयूष गोयल जी और भाजपा सरकार 333 दिन में प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाएंगे।
रेल मंत्री का यह बयान राज्यों की इच्छा बताने के लिए काफी है
रेल मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि यह दुर्भाग्य है कि हमारे तमाम प्रयासों के बावजूद कई राज्य ट्रेन की सुविधा ले ही नहीं रहे हैं। रेलवे ने जो सुविधा उपलब्ध कराई है, उसमें 1200 ट्रेनें पूरी तरह से श्रमिक स्पेशल ट्रेन के तौर पर आरक्षित हैं।
अब हम करीब तीन सौ ट्रेन रोजाना चला सकते हैं, लेकिन राज्यों की ओर से जो मांग आ रही है, वह निराशाजनक है। गोयल ने कहा, उत्तर प्रदेश में 400 से अधिक ट्रेन चली गईं, बिहार में 200 से ज्यादा गाड़ियां पहुंची हैं। पश्चिम बंगाल में केवल सात ट्रेन, राजस्थान में 18 और झारखंड में 44 ट्रेन क्यों गई हैं, इसका जवाब राज्य सरकारों को देना होगा।