खुफिया रिपोर्ट पर केंद्र ने एनआईए को सौंपी भीमा-कोरेगांव की जांच, 2018 में हुई थी हिंसा
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नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के खिलाफ चल रहे देशव्यापी आंदोलन के लिए वामपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों द्वारा धन मुहैया कराने की खुफिया रिपोर्ट के बाद गृह मंत्रालय सक्रिय हो गया है। इस रिपोर्ट के बाद ही भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को देने का फैसला लिया गया। एलगर परिषद की बैठक के अगले दिन एक जनवरी, 2018 को भीमा-कोरेगांव हिंसा हुई थी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जांच एनआईए को सौंपने की पुष्टि की है। शुक्रवार देर रात महाराष्ट्र के गृहमंत्री ने बिना राज्य सरकार की सहमति के जांच एनआईए को सौंपने का विरोध किया था। दूसरी ओर, जांच एनआईए को देने के फैसले से राज्य और केंद्र के बीच तनातनी का अंदेशा बढ़ गया है।
अधिकारियों ने बताया कि इस फैसले से केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के बीच न सिर्फ राजनीतिक स्तर पर बल्कि तकनीकी और व्यवहारिक स्तर पर भी विवाद होगा। राज्य सरकार से केस को ट्रांसफर करने की औपचारिक प्रक्रिया और अदालत के जरिए दस्तावेज लेने में एनआईए को खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है। राज्य सरकार केंद्र के इस फैसले के खिलाफ अदालत भी जा सकती है।
एनआईए खुद ले सकती है जांच
शुक्रवार को यह केस एनआईए को सौंपने से एक दिन पहले ही महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने जांच के लिए एसआईटी गठित करने का फैसला किया था। बता दें कि भीमा-कोरेगांव हिंसा की जांच के लिए भाजपा की देवेंद्र फडणवीस सरकार द्वारा गठित दो सदस्यीय गठित को 8 फरवरी तक रिपोर्ट देनी है।
वहीं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जांच एनआईए को सौंपने के केंद्र के निर्णय का स्वागत किया है। इस फैसले को उचित करार देते हुए उन्होंने कहा, पुलिस ने अर्बन नक्सलवाद के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी पुलिस कार्रवाई को सही माना। गौरतलब ळै कि भीमा-कोरेगांव हिंसा के दौरान फडणवीस के पास गृह मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार था।
सरकार नहीं चाहती सच सामने आए: पवार
सच्चाई सामने आने के डर से केंद्र ने यह निर्णय लिया है। सरकार नहीं चाहती कि सच बाहर आए। सरकार के खिलाफ बोलना नक्सलवाद नहीं है। पुलिस से मिलकर भाजपा सरकार ने हिंसा की साजिश रची। हमें संदेह है कि सरकार इस मामले को अपने हिसाब से पेश करेगी।
- शरद पवार, एनसीपी प्रमुख
पीएम मोदी के खिलाफ षड़यंत्र: भाजपा
भीमा-कोरेगांव मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक साजिश थी। एनआईए इस मामले की जांच कर रही है और जो भी जिम्मेदार होगा उसे सजा मिलेगी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को इस मुद्दे पर बोलने का अधिकार नहीं है।
- शाहनवाज हुसैन, प्रवक्ता भाजपा
भाजपा के एजेंडे का विरोध करने वाले को शहरी नक्सली कहा जाता है : राहुल
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि जो भी भाजपा के नफरत फैलाने वाले एजेंडे का विरोध करता है उसे यहां शहरी नक्सली घोषित कर दिया जाता है। कांग्रेस नेता का यह बयान भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच एनआईए द्वारा अपने हाथ लिये जाने के बाद आया है।
एनआईए पर हमला बोलते हुए राहुल ने ट्वीट किया, मोदी और शाह के खिलाफ बोलने वालों को शहरी नक्सल बता दिया जाता है। भीमा कोरेगांव घटना एक प्रतिरोध का प्रतीक है और सरकारी जांच एजेंसी इसमें अड़ंगा लगाकर भी इसे मिटा नहीं सकती।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा 2018 के इस मामले में अब तक हुई जांच की समीक्षा किए जाने के ठीक एक दिन बाद शुक्रवार को एनआईए ने यह जांच अपने हाथ में ले ली थी।
इस कदम से उद्धव ठाकरे सरकार ने नाराजगी जताई है। महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा, राज्य सरकार की अनुमति बिना इस तरह जांच एनआईए को सौंपना संविधान के खिलाफ और निंदनीय है।