{"_id":"6a0972402e62c37da906a3ce","slug":"census-2027-house-listing-starts-with-field-work-in-these-states-2026-05-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Census 2027: दिल्ली समेत पांच राज्यों में मकान सूचीकरण शुरू, चार राज्यों में स्व-गणना की भी शुरुआत","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Census 2027: दिल्ली समेत पांच राज्यों में मकान सूचीकरण शुरू, चार राज्यों में स्व-गणना की भी शुरुआत
Sun, 17 May 2026 01:16 PM IST
नितिन गौतम
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 17 May 2026 01:16 PM IST
विज्ञापन
जनगणना अभियान के दौरान लोगों को जानकारी देते हुए प्रगणक।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देशव्यापी जनगणना 2027 के अंतर्गत चरण-I में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) के फील्ड कार्य पांच राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों 'राजस्थान, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली' के दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) क्षेत्र में प्रारंभ हो गया है। गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पुडुचेरी में स्व-गणना शुरू हुई है। 1.44 करोड़ से अधिक परिवारों ने स्व-गणना पूरी की है।
गृह मंत्रालय ने दी जानकारी
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, इस बीच, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना और उत्तराखंड में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर मकान सूचीकरण कार्य जारी है। रविवार से गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पुडुचेरी में स्व-गणना (एसई) सुविधा शुरू हो गई है, जो 31 मई 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में संबंधित मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना का फील्ड कार्य 1 जून से 30 जून 2026 तक संचालित किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में भी स्व-गणना सुविधा जारी है जो 21 मई 2026 तक चलेगी। इसके बाद 22 मई से 20 जून 2026 तक मकान सूचीकरण का फील्ड कार्य किया जाएगा। इससे पहले, 16 अप्रैल से 15 मई 2026 तक अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में तथा दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के एनडीएमसी और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र में मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। जनगणना कार्यों में पहली बार शुरू की गई स्व-गणना सुविधा को जनता से उत्साहजनक रिस्पांस मिल रहा है। 25 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in के माध्यम से अब तक 1.44 करोड़ से अधिक परिवार स्व-गणना पूरी कर चुके हैं। यह पहल जनगणना कार्यों के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और निवासियों को जनगणना प्रक्रिया में सुविधाजनक एवं सुरक्षित रूप से भाग लेने का अवसर प्रदान करती है।
विज्ञापन
डिजिटल माध्यमों से हो रही जनगणना
जिन निवासियों ने स्व-गणना पूरी कर ली है, उनसे अनुरोध है कि वे अपने द्वारा प्राप्त स्व-गणना आईडी (एसई आईडी) को सुरक्षित रखें और प्रगणक के घर आने पर उसे साझा करें, ताकि एचएलओ प्रक्रिया पूरी की जा सके। जिन परिवारों ने स्व-गणना नहीं की है, उन्हें प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर सम्मिलित किया जाएगा। जनगणना 2027 पहली बार डिजिटल माध्यमों के उपयोग के साथ आयोजित की जा रही है, जबकि व्यापक और सटीक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक घर-घर जाकर गणना की प्रक्रिया भी जारी रहेगी। फील्ड विज़िट के दौरान प्रगणक एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से डिजिटल रूप से डेटा एकत्र कर रहे हैं।
इस चरण में आवासीय स्थिति, परिवार संबंधी विवरण, उपलब्ध सुविधाएँ तथा परिवारों के पास उपलब्ध संपत्तियों से संबंधित जानकारी 33 अधिसूचित प्रश्नों वाली प्रश्नावली के माध्यम से एकत्र की जा रही है। यह डेटा साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण तथा कल्याण एवं विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगा। जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत एकत्रित सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों एवं विकास योजनाओं के लिए किया जाता है। अधिसूचित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के निवासियों से अनुरोध है कि वे मकानसूचीकरण कार्यों के दौरान प्रगणकों को पूरा सहयोग दें और इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें।
विज्ञापन
गृह मंत्रालय ने दी जानकारी
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, इस बीच, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना और उत्तराखंड में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर मकान सूचीकरण कार्य जारी है। रविवार से गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पुडुचेरी में स्व-गणना (एसई) सुविधा शुरू हो गई है, जो 31 मई 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में संबंधित मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना का फील्ड कार्य 1 जून से 30 जून 2026 तक संचालित किया जाएगा।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश में भी स्व-गणना सुविधा जारी है जो 21 मई 2026 तक चलेगी। इसके बाद 22 मई से 20 जून 2026 तक मकान सूचीकरण का फील्ड कार्य किया जाएगा। इससे पहले, 16 अप्रैल से 15 मई 2026 तक अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में तथा दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के एनडीएमसी और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र में मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। जनगणना कार्यों में पहली बार शुरू की गई स्व-गणना सुविधा को जनता से उत्साहजनक रिस्पांस मिल रहा है। 25 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in के माध्यम से अब तक 1.44 करोड़ से अधिक परिवार स्व-गणना पूरी कर चुके हैं। यह पहल जनगणना कार्यों के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और निवासियों को जनगणना प्रक्रिया में सुविधाजनक एवं सुरक्षित रूप से भाग लेने का अवसर प्रदान करती है।
विज्ञापन
डिजिटल माध्यमों से हो रही जनगणना
जिन निवासियों ने स्व-गणना पूरी कर ली है, उनसे अनुरोध है कि वे अपने द्वारा प्राप्त स्व-गणना आईडी (एसई आईडी) को सुरक्षित रखें और प्रगणक के घर आने पर उसे साझा करें, ताकि एचएलओ प्रक्रिया पूरी की जा सके। जिन परिवारों ने स्व-गणना नहीं की है, उन्हें प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर सम्मिलित किया जाएगा। जनगणना 2027 पहली बार डिजिटल माध्यमों के उपयोग के साथ आयोजित की जा रही है, जबकि व्यापक और सटीक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक घर-घर जाकर गणना की प्रक्रिया भी जारी रहेगी। फील्ड विज़िट के दौरान प्रगणक एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से डिजिटल रूप से डेटा एकत्र कर रहे हैं।
इस चरण में आवासीय स्थिति, परिवार संबंधी विवरण, उपलब्ध सुविधाएँ तथा परिवारों के पास उपलब्ध संपत्तियों से संबंधित जानकारी 33 अधिसूचित प्रश्नों वाली प्रश्नावली के माध्यम से एकत्र की जा रही है। यह डेटा साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण तथा कल्याण एवं विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगा। जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत एकत्रित सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों एवं विकास योजनाओं के लिए किया जाता है। अधिसूचित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के निवासियों से अनुरोध है कि वे मकानसूचीकरण कार्यों के दौरान प्रगणकों को पूरा सहयोग दें और इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें।