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Bengal: अभिषेक बनर्जी बोले- SIR पर सवालों का जवाब नहीं मिला, सीईसी का रवैया आक्रामक रहा; चुनाव आयोग ने दी सफाई
Thu, 01 Jan 2026 03:45 AM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली / कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली / कोलकाता
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 01 Jan 2026 03:45 AM IST
सार
पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर राज्य सरकार की तरफ से चुनाव आयोग पर निशाना साधा गया है। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात के बाद कहा कि एसआईआर पर सवालों का जवाब नहीं मिला और मुलाकात के दौरान सीईसी का रवैया आक्रामक रहा। वहीं चुनाव आयोग ने तमाम आरोपों पर सफाई दी है।
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टीएमसी ने चुनाव आयोग पर लगाए आरोप
- फोटो : PTI
विस्तार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग के साथ हुई बैठक के बाद कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का रवैया बैठक के दौरान आक्रामक था और उन्होंने पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठाए गए सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
एसआईआर पर जवाब नहीं मिला- अभिषेक बनर्जी
अभिषेक बनर्जी ने बताया कि करीब दो घंटे चली बैठक में टीएमसी के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से जुड़े कई मुद्दे उठाए, जिनमें 1.36 करोड़ मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाने का सवाल भी शामिल था। लेकिन, उनके मुताबिक, चुनाव आयोग की ओर से ठोस जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि एसआईआर से जुड़े सवालों को बार-बार नागरिकता के मुद्दे से जोड़ दिया गया और नाम काटे जाने पर केवल प्रक्रियागत जवाब दिए गए।
ये भी पढ़ें - Khaleda Zia: 'वह मजबूत इच्छाशक्ति और दृढ़ विश्वास वाली नेता थीं', खालिदा जिया के निधन पर पीएम मोदी का शोक पत्र
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'सूची में गड़बड़ी हुई तो स्वीकार नहीं'
अभिषेक बनर्जी ने साफ कहा कि अगर अंतिम मतदाता सूची में गड़बड़ियां पाई जाती हैं, तो उनकी पार्टी उसे स्वीकार नहीं करेगी और कानूनी लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में वोट चोरी ईवीएम से नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट के जरिए हो रही है।
'पश्चिम बंगाल को बदनाम करने की साजिश'
टीएमसी नेता ने आरोप लगाया कि घुसपैठ का मुद्दा उठाकर पश्चिम बंगाल को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि वह बताए कि ड्राफ्ट सूची से हटाए गए 58 लाख नामों में कितने बांग्लादेशी या रोहिंग्या हैं।
मतदाता सूची के माध्यम से की जा रही वोट चोरी- अभिषेक बनर्जी
अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में ईवीएम से नहीं, बल्कि मतदाता सूची के जरिये वोट चोरी की जा रही है। बनर्जी ने बुधवार को चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात के बाद कहा कि आयोग उनकी शंकाओं को दूर करने में विफल रहा और बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) का व्यवहार आक्रामक था। अभिषेक बनर्जी ने विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि 1.36 करोड़ मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाना संदिग्ध है।
बीएलओ मानदेय और केंद्र पर आरोप
टीएमसी सूत्रों ने कहा कि अगर चुनाव आयोग को बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) की चिंता है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल के कथित तौर पर रोके गए 2 लाख करोड़ रुपये जारी कराने की मांग करनी चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार बीएलओ को मानदेय देगी।
बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए घर पर सुनवाई की मांग
टीएमसी ने मांग की कि वरिष्ठ नागरिकों, बीमार लोगों और दिव्यांगों को सुनवाई के लिए घर पर ही सुविधा दी जाए। इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि 85 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों या बीमार/दिव्यांग मतदाताओं को, अनुरोध करने पर, व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया नहीं जाएगा।
ये भी पढ़ें - Defence: 'ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ मजबूत संकल्प का सबूत, दुनिया को भेजा संदेश', रक्षा मंत्रालय का बयान
सीईओ कार्यालय का जवाब
इस बीच, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने चुनाव अधिकारियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों को 'पूर्व नियोजित और निराधार' बताया। कार्यालय ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को डराने-धमकाने से रोका नहीं जा सकता और चुनावी कामकाज पूरी निष्पक्षता के साथ जारी रहेगा।
धमकाए नहीं, बीएलओ का मानदेय बढ़ाएं- ईसीआई
निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार को सख्त निर्देश देते हुए बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के लिए स्वीकृत बढ़ा हुआ मानदेय तत्काल जारी करने को कहा है। तृणमूल कांग्रेस के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद आयोग ने यह स्पष्ट संदेश जारी किया। चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए टीएमसी नेतृत्व को चेतावनी दी कि उनके जमीनी कार्यकर्ता चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को डराने-धमकाने से बाज आएं। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीएलओ, प्रेक्षक या किसी भी अन्य चुनावी कर्मचारी के साथ अभद्रता या कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। मतदान प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने के लिए आयोग ने बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावों में हाई-राइज बिल्डिंगों, गेटेड सोसायटियों और झुग्गी-झोपड़ियों के भीतर ही पोलिंग स्टेशन स्थापित करने का निर्णय लिया है। दूसरी ओर टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने मतदाता सूची संशोधन की प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे वोट की चोरी करार दिया। हालांकि, आयोग ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
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एसआईआर पर जवाब नहीं मिला- अभिषेक बनर्जी
अभिषेक बनर्जी ने बताया कि करीब दो घंटे चली बैठक में टीएमसी के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से जुड़े कई मुद्दे उठाए, जिनमें 1.36 करोड़ मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाने का सवाल भी शामिल था। लेकिन, उनके मुताबिक, चुनाव आयोग की ओर से ठोस जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि एसआईआर से जुड़े सवालों को बार-बार नागरिकता के मुद्दे से जोड़ दिया गया और नाम काटे जाने पर केवल प्रक्रियागत जवाब दिए गए।
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'सूची में गड़बड़ी हुई तो स्वीकार नहीं'
अभिषेक बनर्जी ने साफ कहा कि अगर अंतिम मतदाता सूची में गड़बड़ियां पाई जाती हैं, तो उनकी पार्टी उसे स्वीकार नहीं करेगी और कानूनी लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में वोट चोरी ईवीएम से नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट के जरिए हो रही है।
'पश्चिम बंगाल को बदनाम करने की साजिश'
टीएमसी नेता ने आरोप लगाया कि घुसपैठ का मुद्दा उठाकर पश्चिम बंगाल को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि वह बताए कि ड्राफ्ट सूची से हटाए गए 58 लाख नामों में कितने बांग्लादेशी या रोहिंग्या हैं।
मतदाता सूची के माध्यम से की जा रही वोट चोरी- अभिषेक बनर्जी
अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में ईवीएम से नहीं, बल्कि मतदाता सूची के जरिये वोट चोरी की जा रही है। बनर्जी ने बुधवार को चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात के बाद कहा कि आयोग उनकी शंकाओं को दूर करने में विफल रहा और बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) का व्यवहार आक्रामक था। अभिषेक बनर्जी ने विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि 1.36 करोड़ मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाना संदिग्ध है।
बीएलओ मानदेय और केंद्र पर आरोप
टीएमसी सूत्रों ने कहा कि अगर चुनाव आयोग को बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) की चिंता है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल के कथित तौर पर रोके गए 2 लाख करोड़ रुपये जारी कराने की मांग करनी चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार बीएलओ को मानदेय देगी।
बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए घर पर सुनवाई की मांग
टीएमसी ने मांग की कि वरिष्ठ नागरिकों, बीमार लोगों और दिव्यांगों को सुनवाई के लिए घर पर ही सुविधा दी जाए। इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि 85 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों या बीमार/दिव्यांग मतदाताओं को, अनुरोध करने पर, व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया नहीं जाएगा।
ये भी पढ़ें - Defence: 'ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ मजबूत संकल्प का सबूत, दुनिया को भेजा संदेश', रक्षा मंत्रालय का बयान
सीईओ कार्यालय का जवाब
इस बीच, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने चुनाव अधिकारियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों को 'पूर्व नियोजित और निराधार' बताया। कार्यालय ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को डराने-धमकाने से रोका नहीं जा सकता और चुनावी कामकाज पूरी निष्पक्षता के साथ जारी रहेगा।
धमकाए नहीं, बीएलओ का मानदेय बढ़ाएं- ईसीआई
निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार को सख्त निर्देश देते हुए बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के लिए स्वीकृत बढ़ा हुआ मानदेय तत्काल जारी करने को कहा है। तृणमूल कांग्रेस के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद आयोग ने यह स्पष्ट संदेश जारी किया। चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए टीएमसी नेतृत्व को चेतावनी दी कि उनके जमीनी कार्यकर्ता चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को डराने-धमकाने से बाज आएं। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीएलओ, प्रेक्षक या किसी भी अन्य चुनावी कर्मचारी के साथ अभद्रता या कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। मतदान प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने के लिए आयोग ने बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावों में हाई-राइज बिल्डिंगों, गेटेड सोसायटियों और झुग्गी-झोपड़ियों के भीतर ही पोलिंग स्टेशन स्थापित करने का निर्णय लिया है। दूसरी ओर टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने मतदाता सूची संशोधन की प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे वोट की चोरी करार दिया। हालांकि, आयोग ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
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