कांग्रेस का ज्ञानेश कुमार पर हमला: जयराम रमेश बोले- पीएम मोदी और शाह के इशारे पर दिया धोखा; और क्या कहा?
विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर निर्वाचन आयोग पर विपक्ष का हमला तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग और केंद्र से एक सप्ताह में जवाब मांगा है। इसके बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि अदालत के पास आयोग में जनता का भरोसा बहाल करने का अवसर है।
विस्तार
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पास निर्वाचन आयोग में जनता का भरोसा बहाल करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि अदालत ने निर्वाचन आयोग के उस तरीके को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आयोग ने दो निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी के बिना फैसले लिए।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग और केंद्र से एक सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने समेत कई मांगें की गई हैं।
कांग्रेस ने जताई सुप्रीम कोर्ट से क्या उम्मीद?
जयराम रमेश ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर हालिया खुलासों, सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा और पूर्व न्यायाधीशों की आलोचना तथा उचित प्रक्रिया के बिना बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के आरोपों के बीच अदालत के पास संस्था में लोगों का भरोसा बहाल करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा है और कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है।
The Supreme Court today heard a petition seeking, among other things, the suspension of CEC Gyanesh Kumar. Based on the recent damning revelations regarding (1) the ad-hoc, illegal and slip-shod manner in which the SIR was taking place, (2) criticism from both sitting and retired Judges of the Supreme Court, (3) the vast and indiscriminate (and many obviously incorrect) deletions without adequate due process, the Supreme Court has a remarkable opportunity to restore public confidence in an institution vital to the integrity of our republic. As of now, the Supreme Court has chosen to seek a reply. It has chosen not to pass any interim order though. The Supreme Court has, in the past, trusted the ECI and the CECs to give a fair account of their running of the body. The Supreme Court would do well to note that that trust was based on decades of propriety and competent conduct starting with the late great Sukumar Sen, the first CEC who set the bar for how elections are to be conducted. None of that goodwill can be claimed by Gyanesh Kumar. This malicious Form 6 modification, which was originally implied to have the Supreme Court’s approval, is one such example of his underhanded and simply indefensible conduct. In reality, the CEC has not only lied but also violated the law and betrayed the Constitution in letter and spirit at the behest of the PM and the HM.
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) October 5, 2026
रमेश ने कहा कि अतीत में सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्तों पर भरोसा किया है। उनके मुताबिक यह भरोसा दशकों की उचित कार्यप्रणाली और सक्षम कामकाज पर आधारित था। उन्होंने पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन का भी जिक्र किया।
फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर कांग्रेस ने लगाए क्या आरोप?
जयराम रमेश ने फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर भी मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधा। उन्होंने इसे "दुर्भावनापूर्ण" बदलाव बताते हुए दावा किया कि इसे पहले सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के संकेत के तौर पर पेश किया गया था।
रमेश ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने कानून का उल्लंघन किया और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री के कहने पर संविधान से विश्वासघात किया। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में बदलाव मुख्य चुनाव आयुक्त ने जानबूझकर किया, ताकि जेन जी के मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग के फैसले या तो सर्वसम्मति से होने चाहिए या बहुमत के आधार पर। अदालत ने कहा कि वह मानकर चल रही है कि आयोग के सभी फैसले इसी तरीके से लिए गए हैं।
पटना निवासी राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह तय करने की मांग की गई है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन शक्तियों का व्यक्तिगत रूप से इस्तेमाल किया, जो कानूनी तौर पर पूरे निर्वाचन आयोग के पास हैं। याचिका में ऐसी कार्रवाई को अनधिकृत घोषित करने और उचित कानूनी कदम उठाने की मांग की गई है।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि मामले की अंतिम सुनवाई तक मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके कार्यों के इस्तेमाल से रोका जाए और इस दौरान आयोग का काम दोनों अन्य निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सर्वसम्मति से चलाया जाए।
रंगे हाथ पकड़ा गया चुनाव आयोग: कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि फॉर्म नंबर 6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी नहीं मिली है, जैसा कि चुनाव आयोग ने अपने सूत्रों के जरिए मीडिया और हम सभी को बताया था। इसलिए वे झूठ बोलते हुए रंगे हाथों पकड़े गए हैं।
#WATCH | Delhi | Congress MP Pawan Khera says, "The Supreme Court also said that the changes that were made in Form Number 6 do not have the approval of the Supreme Court, as was conveyed to the media and to all of us by the Election Commission through its sources. So, they have been caught red-handed lying. Across the entire country, you will see a lot of restlessness among the youth, and for very valid reasons. The youth feel completely betrayed. The youth feel hopeless, and it is the responsibility of any responsible government, any decent government, to ensure that the youth do not feel hopeless"
— ANI (@ANI) October 5, 2026
उन्होंने कहा, ''पूरे देश में आप युवाओं के बीच काफी बेचैनी देखेंगे और इसके बहुत जायज कारण हैं। युवाओं को लगता है कि उनके साथ पूरी तरह विश्वासघात हुआ है। युवा निराश और हताश महसूस कर रहे हैं। किसी भी जिम्मेदार और सभ्य सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि देश के युवा निराश न हों।"
दो निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों का मामला
इंडियन एक्सप्रेस की 25 सितंबर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि ये फैसले उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए।
इन आपत्तियों के बाद निर्वाचन आयोग ने कहा था कि किसी भी संस्था में विचारों और टिप्पणियों में अंतर deliberations का सामान्य हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा था कि उसके सभी आदेशों को पूरा कानूनी समर्थन हासिल है और वे स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुसार जारी किए गए हैं।
राउत ने ज्ञानेश कुमार को बताया 'देश का दुश्मन'
शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने भी सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच ज्ञानेश कुमार "भूमिगत" हो गए हैं। राउत ने कहा कि निर्वाचन आयोग को उन विपक्षी सांसदों से मिलना चाहिए, जिनके साथ उन राज्यों में कथित तौर पर अन्याय हुआ है जहां चुनाव आयोग ने भाजपा की मदद की।
उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी सांसद मंगलवार को नई दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक मार्च करेंगे। यह मार्च एसआईआर में कथित अनियमितताओं के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर होगा। राउत ने कहा, "ज्ञानेश कुमार देश के दुश्मन हैं। ज्ञानेश कुमार को हमारे सामने आना चाहिए। वह भूमिगत हैं।" उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी ज्ञानेश कुमार का बचाव नहीं करने को कहा।
राउत ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार में विपक्षी सांसदों के साथ अन्याय हुआ है और इन राज्यों में निर्वाचन आयोग ने भाजपा की मदद की।
मुंबई में भी हुआ था प्रदर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का विरोध रविवार को मुंबई में भी देखने को मिला। शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई में विरोध मार्च का नेतृत्व किया था। इसमें कांग्रेस और एनसीपी शरदचंद्र पवार के कई नेता भी शामिल हुए थे। विपक्षी दल एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।