अलविदा जनरल: रावत के निधन से सैन्य अभियानों पर कितना सीधा असर पड़ेगा, थिएटर कमांड की योजना का अब क्या?
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विस्तार
बुधवार को तमिलनाडु के कुन्नूर में वायुसेना का हेलीकॉप्टर हादसे में देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत के साथ 11 अन्य सैन्य अधिकारियों का निधन हो गया। पूरा देश इससे सदमे में है। उनके निधन पर देश-विदेश से कई प्रतिक्रियाएं आई हैं। हादसे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को संसद में सभी को श्रद्धांजलि दी और बताया कि हादसे में बचे अकेले शख्स ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह को वेलिंगटन के मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है। वे लाइफ सपोर्ट पर हैं और उन्हें बचाने की कोशिशें जारी हैं।कौन बनेगा अगला सीडीएस
दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि जनरल रावत के अंतिम संस्कार के बाद सरकार सीडीएस पद के लिए वरिष्ठ सैन्य अफसरों के नाम पर चर्चा करेगी। तीनों सेनाओं (थलसेना, वायुसेना, नौसेना) के प्रमुखों में सबसे वरिष्ठ होने के कारण आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे का नाम इसमें सबसे ऊपर बताया जा रहा है। हालांकि सेना की संरचनाओं में प्रमुख अधिकारी के अस्वस्थ होने पर दूसरा-इन-कमांड प्रमुख अधिकारी की जिम्मेदारी निभाते हैं लेकिन सूत्रों का कहना है कि सीडीएस के लिए उत्तराधिकार की कोई स्पष्ट रेखा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी यानी सीसीएस की अगली बैठक में सीडीएस पर फैसला होगा। इसके लिए सरकार के पास पांच नामों का एक पैनल भेजा जाएगा।
सैन्य अभियानों पर कितना पड़ेगा असर
जनरल बिपिन रावत के अचानक इस तरह जाने से अब यह सवाल उठने लगे हैं कि चीन के साथ सीमा विवाद और पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों को लेकर सेना जिस तरह का तनाव झेल रही है, तो क्या ऐसे में सैन्य परिचालन या सैन्य अभियानों पर अब इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है? अधिकांश विशेषज्ञ इसका जवाब ना में देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल रावत के देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) थे लेकिन उनके पास सैन्य परिचालन की भूमिका या जिम्मेदारी नहीं थी, इसलिए सैन्य अभियानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
सर्विस के सुधारक थे रावत
वहीं मेजर जनरल ए के सिवाच (रिटायर्ड) की राय भी यही है कि रावत के निधन से सैन्य परिचालनों पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वे सीधे तौर पर तीनों सेनाओं को कोई आदेश नहीं दे सकते थे। लेकिन भले ही उनकी सैन्य परिचालन में कोई भूमिका नहीं थी लेकिन वे इसकी निगरानी कर रहे थे।
सिवाच कहते हैं कि जनरल रावत को एक सर्विस के सुधारक के रूप में देखा गया था और वे इस पर काम कर रहे थे और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बिठाने का काम कर रहा था। वे एक विजन के साथ काम कर रहे थे, किसी और के पास ऐसा विजन होगा या नहीं यह कहना मुश्किल है।
उनके मुताबिक, इतना जरूर है कि थिएटर कमांड के गठन में उनकी बड़ी भूमिका थी और इसकी जिम्मेदारी उनके पास थी। हमें ऐसा लग रहा था कि वे तीनों चीफ सर्विस के साथ तालमेल बिठाकर अपने कार्यकाल के अंत तक थिएटर कमांड बनाने की योजना पूरी कर लेते। लेकिन अब जो भी नए सीडीएस आएंगे वे रावत के इस काम को सबसे पहले आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। कह सकते हैं कि नए सीडीेस पर रावत के अधूरे काम को पूरा करने का दबाव होगा।
सिवाच भी मानते हैं कि रावत को थिएटर कमांड बनाने की लंबे समय से अटकी योजना को पूरा करने का काम सौंपा गया था जिससे तीनों सेवाओं के बीच अधिक तालमेल आता। अब देखना होगा कि इस पर कब तक काम हो पाता है।
उनका एजेंडा तीनों सेवाओं को एकीकृत करना था और एयर डिफेंस कमांड और साइबर कमांड बनाने की योजना पर काम कर रहे थे। उनके निधन से यह काम सबसे ज्यादा अधिक प्रभावित हो सकता है, सिवाच के मुताबिक रावत सेना के आधुनिकीकरण पर भी काम कर रहे थे।
कहा जाता है कि थिएटर कमांड बन जाने से भारतीय सेना बहुत शक्तिशाली हो जाएगी। जनरल बिपिन रावत ने देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनते ही कहा था कि भविष्य में देश में थिएटर कमांड्स बनाए जाएंगे जिससे कि युद्ध की स्थिति पैदा होने पर दुश्मन के दांत खट्टे करने के लिए रणनीति बनाई जा सके। युद्ध के समय तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बिठाने के लिए ही थिएटर कमांड के गठन पर काम चल रहा है। जनरल रावत सेना, वायुसेना और नौसेना को एकसाथ लाकर इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड बनाने की योजना पर काम कर रहे थे। इस समय देश में हैं 17 कमांड, इन्हें मिलाकर ही करीब पांच थिएटर कमांड्स को बनाने की तैयारी थी।
मेजर जनरल एस वी पी सिंह (सेवानिवृत्त) बताते हैं थिएटर कमांड्स युद्ध के समय बेहतर योजना और एक दृष्टिकोण के साथ सैन्य अभियान में मदद करेंगे। थलसेना के पास तीन थिएटर कमांड, नौसेना के पास एक कमांड और भारतीय वायुसेना को एयर डिफेंस कमांड की जिम्मेदारी दिए जाने की बात हो रही थी। अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों ने थिएटर कमांड बनाया हुआ है।
हालांकि मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक थिएटर कमांड के बुनियादी ढांचे और संरचना को लेकर सेना के कुछ आंतरिक मतभेद इसी साल जुलाई में सामने आए थे। वहीं इससे पहले जून महीने में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सुरक्षा पर कैबिनेट समिति में थिएटर कमांड के गठन की मंजूरी के लिए बने मसौदा नोट पर चर्चा के दौरान भी कुछ मदभेद पैदा होने की रिपोर्ट आई थी।
कहा जाता है कि इसी वजह से रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले सैन्य विभाग ने तीनों सैन्य सेवाओं को थिएटर कमांड्स के गठन के लिए लिए स्टडी करने और अगले साल अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा था। बीते एक नवंबर जनरल बिपिन रावत की अध्यक्षता में तीनों सेनाओं के प्रमुखों और अन्य अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया था।