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सीमा विवाद: सीडीएस बिपिन रावत ने कहा- भारतीय सेना को विवादित सीमाओं पर सालभर तैनात रहने की जरूरत
Mon, 01 Nov 2021 02:23 AM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, दिल्ली
पीटीआई, दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 01 Nov 2021 02:23 AM IST
सार
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि जब भी कोई देश अपने सशस्त्र बलों की उपेक्षा करता है, तो बाहरी ताकतें उसका तेजी से शोषण करती हैं।
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सीडीएस जनरल बिपिन रावत
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत ने रविवार को कहा कि चीन और पाकिस्तान की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए भारतीय सशस्त्र बलों को सतर्क रहना होगा। साथ ही विवादित सीमाओं और तटीय क्षेत्रों में साल भर तैनात रहने की जरूरत है।
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बिपिन रावत ने ऑल इंडिया रेडियो में सरदार पटेल स्मृति व्याख्यान देते हुए यह बात कही। उन्होंने अपने व्याख्यान में सरदार पटेल के साथ देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का भी जिक्र किया।
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दूरदर्शी थे सरदार पटेल
सीडीएस रावत ने कहा कि सरदार पटेल एक उत्कृष्ट दूरदर्शी थे जिन्होंने भारत और चीन के बीच एक बफर देश (एक ऐसा छोटा देश जो दो दुश्मन देशों के बीच स्थित होता है और क्षेत्रीय संघर्ष को रोकता है) के रूप में एक स्वतंत्र तिब्बत की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसे तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ उनके पत्राचार में देखा जा सकता है।
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1962 में चीन ने देश को हिला कर रख दिया
रावत ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि जब भी कोई देश अपने सशस्त्र बलों की उपेक्षा करता है, तो बाहरी ताकतें उसका तेजी से शोषण करती हैं। रावत ने कहा कि 1950 के दशक में, भारत ने इतिहास के इस महत्वपूर्ण सबक को नजरअंदाज कर दिया और सुरक्षा तंत्र डगमगाने लगा और 1962 में चीन ने देश को हिला कर रख दिया।
आगे उन्होंने कहा कि 1962 के बाद, हमने चीनियों के खिलाफ कई झड़पें की हैं 1967 में सिक्किम के नाथू ला में, 1986 में वांगडुंग में, 2017 में डोकलाम में और हाल ही में लद्दाख में कई बार झड़पें देखने को मिली हैं। इसलिए परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय सशस्त्र बल को राष्ट्रीय क्षेत्र की रक्षा के लिए सतर्क रहना होगा।
उन्होंने कहा, चीन और हमारे नेताओं को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और शांति बनाए रखने के लिए समझौतों और संबंधों में सुधार के लिए कई अन्य विश्वास-निर्माण उपायों को आगे बढ़ाने में मदद मिली है।
पिछले साल मई में चीन के साथ सीमा गतिरोध
भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच मौजूदा सीमा गतिरोध पिछले साल मई में पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील क्षेत्रों में एक हिंसक झड़प के बाद शुरू हुआ और दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे हजारों सैनिकों के साथ-साथ भारी हथियारों को लेकर अपनी तैनाती बढ़ा दी। वर्तमान में दोनों देशों के लद्दाख क्षेत्र में लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक हैं।