CDS Bipin Rawat: हादसे की उच्च स्तरीय जांच से कितनी सामने आ पाएगी सच्चाई, मौसम और तकनीकी खराबी के इर्द-गिर्द घूम रही संदेह की सुई
सीडीएस के हेलीकॉप्टर ने सुबह 11.48 बजे उड़ान भरी थी। 12 बजकर 8 मिनट पर उसका एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम से संपर्क टूटा था। 12.15 बजे इसे वेलिंगटन में उतरना था। इससे पहले हादसा हो गया। 12.08 बजे तक एयर ट्रैफिक कंट्रोल के पास किसी तकनीकी खराबी या आपात लैडिंग की सूचना नहीं थी।
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विस्तार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के हेलीकॉप्टर हादसे की उच्चस्तरीय ट्राई सर्विस जांच कराने की घोषणा की है। इससे पहले वायु सेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने खुद दुर्घटना स्थल का मुआयना किया। वायुसेना मुख्यालय के सूत्र बताते हैं कि हेलीकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स मिल गया है। हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से कुछ मिनट पहले तक की जानकारी सामने आ रही है, लेकिन नतीजे पर पहुंच पाना बहुत आसान नहीं है। रक्षा मंत्री की घोषणा के अनुसार इस मामले की जांच वायुसेना की प्रशिक्षण कमान के कमांडर इन चीफ एयर मार्शल मानवेन्द्र सिंह करेंगे, लेकिन यह जले हुए हेलीकॉप्टर की राख से दुर्घटना के सबूत ढूंढने जैसा है।
सीडीएस के हेलीकाप्टर ने सुबह 11.48 बजे उड़ान भरी थी। 12 बजकर 8 मिनट पर उसका एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम से संपर्क टूटा था। 12.15 बजे इसे वेलिंगटन में उतरना था। इससे पहले हादसा हो गया। 12.08 बजे तक एयर ट्रैफिक कंट्रोल के पास किसी तकनीकी खराबी या आपात लैंडिंग की सूचना नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल?
जनरल रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और पहली श्रेणी के जनरल थे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आर्मी स्टाफ कॉलेज में व्याख्यान देने के लिए गए जनरल रावत ने 60 किमी की दूरी तय करने के लिए सेल्लूर से वेलिंगटन के लिए उड़ान भरी थी। वेलिंगटन से केवल छह मिनट की दूरी बची थी। यह एक दोहरे इंजन का काफी सुरक्षित हेलीकॉप्टर है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि 20 मिनट बाद हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया? क्या ऐसा किसी तकनीकी खराबी के कारण हुआ?
वायुसेना में हेलीकाप्टर दुर्घटना की जांच कर चुके एक पूर्व एयर कमोडोर अधिकारी का कहना है कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। सूत्र का कहना है कि वीआईपी उड़ान हो या किसी भी तरह की हवाई यात्रा हो, हेलीकॉप्टर की पूरी तकनीकी जांच की जाती है। इसमें सभी स्तर की सावधानी बरती जाती है। इसलिए संभावना इसी की है कि हेलीकॉप्टर खराब मौसम में फंस जाने का शिकार हुआ होगा।
हालांकि, पूर्व विंग कमांडर का कहना है कि एमआई-17-वी-5 हेलीकॉप्टर की क्षमता बहुत अधिक है। यह खराब मौसम में बादलों को आसानी से पार कर सकता है। यह जमीन पर 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है। इतना ही नहीं यह जरूरत पड़ने पर आसमान में वर्टिकल उड़ान भर सकता है। इसलिए अभी बहुत से सवालों के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
पूर्व वाइस एयर मार्शल एनबी सिंह का कहना है कि कोई तकनीकी खराबी होने का पता चलते ही पायलट इमरजेंसी लैंडिंग के लिए तीन बार कॉल करता है। यह कॉल एयर ट्रैफिक कंट्रोल तक आती ही है। यहां इस मामले में अभी तक इस तरह की कॉल आने के बारे में जानकारी नहीं है। दूसरे यह फिक्स विंग नहीं है। इसमें रेडार सिस्टम भी मौसम की खराबी को भांपने वाला नहीं होता।
कैसे हुई होगी दुर्घटना? कैसे लगी आग?
वाइस एयर मार्शल एनबी सिंह का कहना है कि जहां तक मुझे लग रहा है कि कम विजिबिलिटी की स्थिति या मौसम में खराबी के दौरान पायलट कम ऊंचाई से हेलीकॉप्टर को उड़ाते हैं। यहां पायलट प्रशिक्षित और उच्चस्तर के थे। संभव है कि वह कम ऊंचाई से हेलीकॉप्टर उड़ान भर रहा था और पेड़ आदि से टकराने के कारण दुर्घटना हुई होगी। एयर वाइस मार्शल का कहना है कि इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। जहां तक आग लगने का सवाल है तो सामान्य तौर पर पेड़ या किसी से टकराने पर हेलीकॉप्टर में आग लग जाती है। कभी-कभी तकनीकी खराबी आने के बाद भी हेलीकॉप्टर में आग लग जाती है।
जांच तो होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आए
वायुसेना के ही एक अन्य पूर्व अधिकारी का कहना है कि जब भी कोई दुर्घटना होती है, उसकी जांच बिठाई जाती है। इसलिए जांच तो होनी चाहिए। हालांकि, जिस तरह का यह भयानक हादसा है, इसमें हेलीकॉप्टर के मलबे और उसकी राख से कारण पता चल पाने की संभावना काफी कम रहती है। सूत्र का कहना है कि बिपिन रावत जनरल थे। एक जनरल की इस तरह से हादसे में मौत अपने आप में बड़ा सवाल है। इसके बारे में पूरा देश भी जानना चाहता है। इसलिए उच्चस्तरीय जांच के नतीजों का सबको इंतजार है।