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सीबीआई पर सियासी महाभारत : शह-मात के खेल में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका हुई अहम

Tue, 05 Feb 2019 05:05 AM IST
गौरव द्विवेदी हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Tue, 05 Feb 2019 05:05 AM IST
सार

  • अदालती राहत से केंद्रीय राजनीति में अचानक बढ़ेगा ममता का सियासी कद 
  • विपरीत रुख से भ्रष्टाचार के समर्थन में विपक्षी एकजुटता के भाजपा के आरोपों को मिलेगा बल 

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CBI versus Mamta Government in West Bengal, ball is now back in Supreme Court
CBi Vs Mamata Banerjee

विस्तार

पश्चिम बंगाल में सीबीआई बनाम ममता सरकार मामले में अब बॉल सुप्रीम कोर्ट के पाले में है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के रुख से यह तय होगा कि चरम पर पहुंच चुकेइस सियासी विवाद का ऊंट किस करवट बैठेगा। अगर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को राहत नहीं दी तो पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का विपक्ष की राजनीति में सियासी कद अचानक बढ़ जाएगा। विपक्ष के मोदी विरोधी चेहरे के खांचे में भी वह फिट बैठेंगी। 

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हालांकि अगर अदालत का रुख इसका उल्टा रहा तो भाजपा सबसे अधिक सियासी फायदे में रहेगी। इस स्थिति में भाजपा के इस आरोप को बल मिलेगा कि पीएम मोदी के विरोध में विपक्ष की गोलबंदी महज भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार की सख्त कार्रवाई का नतीजा है। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि इस लड़ाई में हार जीत से ममता या टीएमसी के सियासी कैरियर पर विशेष फर्क नहीं पड़ेगा। 
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लोकसभा चुनाव के कारण ममता राज्य के 28 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं को खुद के धुर मोदी विरोधी होने का सियासी संदेश देना चाहती हैं। ऐसे में अगर वह हार भी गई तो इस वर्ग को सफलतापूर्वक अपना संदेश देंगी। दूसरी स्थिति में लड़ाई में मिली जीत से ममता का सियासी कद अचानक बढ़ेगा और वह विपक्ष में मुख्य मोदी विरोधी चेहरा होंगी। इस स्थिति में असली परेशानी पीएम पद की महत्वाकांक्षा पाले दिग्गज क्षत्रपों के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को होगी। 
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा की रणनीति पर दांव पर लगी है। अगर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई का साथ दिया तो भाजपा के इस प्रचार को बल मिलेगा कि विपक्षी एकजुटता दरअसल भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार की सख्त कार्रवाई का नतीजा है। इसके अलावा पार्टी के पास कांग्रेस समेत विपक्ष पर सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता खत्म करने का आरोप लगाने का बड़ा मौका हाथ लगेगा। हालांकि इसकी उलट स्थिति में पार्टी के लिए अपना बचाव करना मुश्किल होगा। 


मुकुल राय- हेमंत विश्वशर्मा बन सकते हैं मु्द्दा 

इस पूरी सियासी लड़ाई में टीएमसी और कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए मुकुल  रॉय और हेमंत विश्वशर्मा बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। ये दोनों शारदा चिट फंड मामले की सीबीआई जांच शुरू होने केबाद भाजपा में आए। इनमें विश्वशर्मा असम सरकार में मंत्री हैं तो मुकुल पश्चिम बंगाल में पार्टी को चेहरा। कभी इस घोटाले के आरोपी रहे दोनों नेता फिलहाल सीबीआई के गवाह हैं। जाहिर तौर पर विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाएगा। 

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