{"_id":"59ebac644f1c1bdb538b8871","slug":"cbi-under-rti-seeks-early-hearing-on-plea","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीबीआई को आरटीआई दायरे में लाने की याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की गुहार","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सीबीआई को आरटीआई दायरे में लाने की याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की गुहार
ब्यूरो/अमर उजाला,नई दिल्ली
Updated Sun, 22 Oct 2017 01:52 AM IST
विज्ञापन
CBI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करीब छह वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित सीबीआई को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के दायरे से बाहर रखने के केंद्र सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की गुहार की गई है। वर्ष 2011 में केंद्र सरकार ने सीबीआई को आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया था।
वकील अजय अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले पर जल्द सुनवाई की गुहार की है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, उन्होंने बोफोर्स मामले से संबंधित दस्तावेज मांगे थे। इसके बाद वर्ष 2011 में केंद्र सरकार ने सीबीआई को आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया था। उसी वर्ष याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई को आरटीआई के दायरे में लाने की गुहार की।
इसी दौरान कलकत्ता सहित अन्य हाईकोर्ट में भी इसी तरह की याचिकाएं दायर की गई थीं। इस पर सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की कि विभिन्न हाईकोर्ट में लंबित इस तरह की याचिकाओं पर शीर्ष अदालत सुनवाई करें। इसके बाद सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता अजय अग्रवाल का कहना है कि संसद द्वारा बनाए गए आरटीआई कानून में सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को इससे बाहर रखा गया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि सीबीआई एक जांच एजेंसी है, न कि सुरक्षा या खुफिया एजेंसी। ऐसे में उसे आरटीआई के दायरे से बाहर रखने का निर्णय गलत है। केंद्र सरकार ने एक कार्यकारी आदेश के जरिये सीबीआई को आरटीआई से बाहर रखने का निर्णय लिया था।
विज्ञापन
वकील अजय अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले पर जल्द सुनवाई की गुहार की है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, उन्होंने बोफोर्स मामले से संबंधित दस्तावेज मांगे थे। इसके बाद वर्ष 2011 में केंद्र सरकार ने सीबीआई को आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया था। उसी वर्ष याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई को आरटीआई के दायरे में लाने की गुहार की।
विज्ञापन
इसी दौरान कलकत्ता सहित अन्य हाईकोर्ट में भी इसी तरह की याचिकाएं दायर की गई थीं। इस पर सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की कि विभिन्न हाईकोर्ट में लंबित इस तरह की याचिकाओं पर शीर्ष अदालत सुनवाई करें। इसके बाद सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता अजय अग्रवाल का कहना है कि संसद द्वारा बनाए गए आरटीआई कानून में सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को इससे बाहर रखा गया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि सीबीआई एक जांच एजेंसी है, न कि सुरक्षा या खुफिया एजेंसी। ऐसे में उसे आरटीआई के दायरे से बाहर रखने का निर्णय गलत है। केंद्र सरकार ने एक कार्यकारी आदेश के जरिये सीबीआई को आरटीआई से बाहर रखने का निर्णय लिया था।