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सीबीआई: कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत 'सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस' का अधिकारी गिरफ्तार, क्या आरोप?
Thu, 15 Oct 2026 06:06 PM IST
पवन पांडेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 15 Oct 2026 06:06 PM IST
सार
सीबीआई ने डीएचएफएल घोटाले की जांच में पक्ष लेने के बदले एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में एसएफआईओ के उपनिदेशक हरीश कुमार तंवर, वकील भरत शर्मा और आर्यन शर्मा को गिरफ्तार किया है। सीबीआई के जाल में फंसने पर वकील ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 20 लाख रुपये लिए। आरोपियों के ठिकानों से आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है।
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गिरफ्तार (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक करोड़ रुपये की घूस मांगने के आरोप में 'सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस' (एसएफआईओ) के एक अधिकारी और वकील सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि अधिकारी ने डीएचएफएल घोटाले से जुड़ी एसएफआईओ की जांच में शिकायतकर्ता का पक्ष लेने के बदले उससे एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने की मांग की थी। गिरफ्तार आरोपियों में हरीश कुमार तंवर, आईओ, एसएफआईओ चेन्नई, वकील भरत शर्मा और आर्यन शर्मा (भरत शर्मा के रिश्तेदार) शामिल हैं।
सीबीआई के अनुसार, एसएफआईओ हरीश कुमार 2017 बैच के आईआरएस (आईटी) अधिकारी हैं और वर्तमान में चेन्नई में एसएफआईओ में उप-निदेशक के पद पर तैनात हैं। इन पर आरोप है कि उन्होंने डीएचएफएल घोटाले से जुड़ी 'सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस' की जांच में शिकायतकर्ता का पक्ष लेने का प्रयास किया था। इसके लिए उन्होंने एक करोड़ रुपये की अवैध मांग की।
शिकायत की पुष्टि होने और एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद, सीबीआई ने एक जाल बिछाया। इस दौरान, एसएफआईओ अधिकारी की ओर से, एक वकील ने शिकायतकर्ता से एक करोड़ रुपये की मांगी गई रिश्वत के हिस्से के रूप में 20 लाख रुपये लिए। इसके बाद सीबीआई ने एसएफआईओ के उप-निदेशक स्तर के अधिकारी, दिल्ली के एक वकील और एक अन्य निजी व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। सरकारी अधिकारी और वकील के ठिकानों पर तलाशी के दौरान, मामले से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज/सामग्री बरामद की गई है। मामले की जांच अभी जारी है।
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सीबीआई के अनुसार, एसएफआईओ हरीश कुमार 2017 बैच के आईआरएस (आईटी) अधिकारी हैं और वर्तमान में चेन्नई में एसएफआईओ में उप-निदेशक के पद पर तैनात हैं। इन पर आरोप है कि उन्होंने डीएचएफएल घोटाले से जुड़ी 'सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस' की जांच में शिकायतकर्ता का पक्ष लेने का प्रयास किया था। इसके लिए उन्होंने एक करोड़ रुपये की अवैध मांग की।
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शिकायत की पुष्टि होने और एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद, सीबीआई ने एक जाल बिछाया। इस दौरान, एसएफआईओ अधिकारी की ओर से, एक वकील ने शिकायतकर्ता से एक करोड़ रुपये की मांगी गई रिश्वत के हिस्से के रूप में 20 लाख रुपये लिए। इसके बाद सीबीआई ने एसएफआईओ के उप-निदेशक स्तर के अधिकारी, दिल्ली के एक वकील और एक अन्य निजी व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। सरकारी अधिकारी और वकील के ठिकानों पर तलाशी के दौरान, मामले से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज/सामग्री बरामद की गई है। मामले की जांच अभी जारी है।
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