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'यह बेहद गंभीर मामला, हल्के में न लें': बच्चों के अश्लील वीडियो पर सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी; क्या है मामला?
Thu, 15 Oct 2026 08:54 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 15 Oct 2026 08:54 PM IST
सार
सोशल मीडिया पर फैल रहे बच्चों के अश्लील वीडियो (सीएसईएएम) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़े निर्देश देते हुए मामले को पूरी गंभीरता से लेने को कहा है। यह मामला 2024 के उस फैसले को लागू कराने से जुड़ा है, जिसमें सोशल मीडिया कंपनियों के लिए स्थानीय पुलिस को ऐसी सामग्री की रिपोर्ट करना अनिवार्य किया गया था। मानवाधिकार आयोग ने भी इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इस कंटेंट के प्रचार और कमाई पर एतराज जताया है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
सोशल मीडिया पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री यानी बच्चों के अश्लील वीडियो के फैलने पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने केंद्र सरकार से साफ कहा है कि यह एक बेहद गंभीर मामला है और इसे उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इशारा किया है कि इस समस्या से निपटने के लिए जल्द ही सख्त कदम और दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
सरकार ने डार्क वेब और रिपोर्टिंग पर दाखिल किया जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या सरकार ने अपना जवाब दाखिल किया है? इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि केंद्र सरकार ने इस समस्या से निपटने के सुझावों के साथ अपना जवाब दाखिल कर दिया है। जब याचिकाकर्ता के वकील ने डार्क वेब के जरिए इस घटिया कंटेंट के फैलने का मुद्दा उठाया, तो सॉलिसिटर जनरल ने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को तय की गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस' (जेआरसीए) की एक अर्जी से जुड़ा है। संस्था का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के 23 सितंबर 2024 के फैसले का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। शीर्ष अदालत ने 2024 के अपने फैसले में साफ कहा था कि सोशल मीडिया कंपनियां सिर्फ आईटी एक्ट का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं। अगर उनकी साइट पर बच्चों के शोषण से जुड़ा कंटेंट दिखता है, तो उन्हें नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एब्यूज्ड चिल्ड्रेन (एनसीएमईसी) के साथ-साथ स्थानीय पुलिस या स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट को तुरंत रिपोर्ट करना होगा।
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मानवाधिकार आयोग की चिंता क्या?
इस ढिलाई पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सवाल उठाया कि आखिर सोशल मीडिया कंपनियां बाल यौन शोषण की शिकायत पुलिस से करने में क्यों आनाकानी कर रही हैं? आयोग ने इस बात का भी संज्ञान लिया है कि इंस्टाग्राम पर दिए जाने वाले विज्ञापनों के जरिए ऐसे घिनौने कंटेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है और यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेजकर इसे बेचा जा रहा है।
यह भी पढ़ें: तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा को झटका: मुख्य सचिव के खिलाफ 'भ्रामक पोस्ट' करने पर कोर्ट सख्त; विवाद क्यों?
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सरकार ने डार्क वेब और रिपोर्टिंग पर दाखिल किया जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या सरकार ने अपना जवाब दाखिल किया है? इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि केंद्र सरकार ने इस समस्या से निपटने के सुझावों के साथ अपना जवाब दाखिल कर दिया है। जब याचिकाकर्ता के वकील ने डार्क वेब के जरिए इस घटिया कंटेंट के फैलने का मुद्दा उठाया, तो सॉलिसिटर जनरल ने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को तय की गई है।
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क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस' (जेआरसीए) की एक अर्जी से जुड़ा है। संस्था का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के 23 सितंबर 2024 के फैसले का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। शीर्ष अदालत ने 2024 के अपने फैसले में साफ कहा था कि सोशल मीडिया कंपनियां सिर्फ आईटी एक्ट का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं। अगर उनकी साइट पर बच्चों के शोषण से जुड़ा कंटेंट दिखता है, तो उन्हें नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एब्यूज्ड चिल्ड्रेन (एनसीएमईसी) के साथ-साथ स्थानीय पुलिस या स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट को तुरंत रिपोर्ट करना होगा।
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मानवाधिकार आयोग की चिंता क्या?
इस ढिलाई पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सवाल उठाया कि आखिर सोशल मीडिया कंपनियां बाल यौन शोषण की शिकायत पुलिस से करने में क्यों आनाकानी कर रही हैं? आयोग ने इस बात का भी संज्ञान लिया है कि इंस्टाग्राम पर दिए जाने वाले विज्ञापनों के जरिए ऐसे घिनौने कंटेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है और यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेजकर इसे बेचा जा रहा है।
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