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Kerala: अवैध रूप से लिवर ट्रांसप्लांट करने वाले अस्पताल-आठ डॉक्टरों के खिलाफ होगा मुकदमा, जानें पूरा मामला

Wed, 14 Jun 2023 01:49 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 14 Jun 2023 01:49 PM IST
सार

केरल के प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट एल्डोस मैथ्यू ने एक डॉक्टर की शिकायत पर फैसला सुनाया है। डॉक्टर ने याचिका में अस्पताल और डॉक्टरों पर आरोप लगाते हुए कहा था कि दुर्घटना पीड़ित के उचित इलाज के लिए मना कर दिया गया था। बिना प्रक्रिया के उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था।

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Case will filed against hospital and eight doctors for illegally transplanting liver by Kerala court
कोर्ट का आदेश - फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला

विस्तार

केरल की एक अदालत ने एक निजी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया है। कोर्ट ने आठ डॉक्टर्स के खिलाफ भी मुकदमा शुरू करने का फैसला किया है, जिन पर अवैध रूप से अंगों को निकालने का आरोप है। मामला साल 2009 का है, जहां एक दुर्घटना पीड़ित के अंगों को निकाला गया था।

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कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त आधार है
केरल के प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट एल्डोस मैथ्यू ने एक डॉक्टर की शिकायत पर फैसला सुनाया है। डॉक्टर ने याचिका में अस्पताल और डॉक्टरों पर आरोप लगाते हुए कहा था कि दुर्घटना पीड़ित के उचित इलाज के लिए मना कर दिया गया था। बिना प्रक्रिया के उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था। डॉक्टर्स ने पीड़ित के अंगों एक विदेशी नागरिक में लगा दिए थे। अदालत ने कहा कि सभी आरोपियों के खिलाफ मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 के तहत कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त आधार है। 29 मई को सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा था कि शिकायतकर्ता ने मामले में सभी आवश्यकताओं का अनुपालन किया है। इसलिए मामला दर्ज किया है।

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डॉक्टर चाहते तो पीड़ित की जान बचाई जा सकती थी
कोर्ट द्वारा जारी 29 मई के आदेश में स्पष्ट लिखा है कि सभी आरोपियों को समन जारी किया जाए। जहां पीड़ित की मौत हुई, उस अस्पताल को भी आरोपियों की सूची में शामिल किया जाएगा। दुर्घटना के बाद, पीड़ित को जिन दो अस्पतालों में लेकर गए थे, वहां उसकी जांच करने वाले न्यूरोसर्जन सहित मामले में शामिल अन्य डॉक्टरों को भी आरोपियों की सूचियों में शामिल किया गया है। सुनवाई के दौरान सामने आया कि अगर डॉक्टर चाहते तो पीड़ित की जान बचाई जा सकती थी। लेकिन दोनों अस्पतालों के न्यूरोसर्जन्स ने ब्लड निकालने के लिए कोई प्रयास नहीं किया।

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डेथ सर्टिफिकेट भी नियमानुसार नहीं था
कोर्ट द्वारा जारी आदेश में बताया गया कि हादसे के बाद युवक को पास के मार बेसलियस अस्पताल, कोठामंगलम में भर्ती किया गया था। इसके बाद उसे एर्नाकुलम के लाकेशोर अस्पताल में भर्ती किया गया था। लाकेशोर अस्पताल ने ब्लीडिंग ठीक करने से पहले एचआईवी टेस्ट किया था। ब्रेन डेड की घोषणा से पहले ट्रांसप्लांट टीम की टीम ने पीड़ित के लिवर का टेस्ट कराया था। डेथ सर्टिफिकेट भी नियम के अनुसार नहीं बनाया गया था। अनधिकृत डॉक्टर ने उस पर हस्ताक्षर किए। ब्रेन डेड से पहले किया जाने वाला एपनिया टेस्ट भी नहीं किया गया था। बिना आज्ञा के लिवर विदेशी नागरिक पर ट्रांसप्लांट किया गया, जो अवैध था। इतना सब कुछ अस्पताल प्रशासन की अनुमति के बिना नहीं हो सकता था।

 

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