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CAPF: हर मोर्चे पर मुस्तैद केंद्रीय अर्धसैनिक बल, फिर भी सेना की तर्ज पर नहीं आयोजित होता 'झंडा दिवस'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 08 Aug 2022 11:37 PM IST
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सार
CAPF: सेना के झंडा दिवस पर शहीद जवानों के परिवारों की मदद के लिए धनराशि जमा की जाती है। लोगों को गहरे लाल और नीले रंग के झंडे का स्टिकर दिया जाता है। इससे जो भी राशि जमा होती है, उसे झंडा दिवस कोष में जमा कर दिया जाता है...
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CAPF: Vaterns demands Flag Day for CAPF forces on the lines of indian army
CAPF - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

केंद्रीय अर्धसैनिक बल यानी 'सीएपीएफ' के जवान हर मोर्चे पर मुस्तैद रहते हैं। वह चाहे कश्मीर का आतंकवाद हो या फिर नक्सल प्रभावित राज्यों में चल रहा है 'गुरिल्ला वॉरफेयर', इन बलों ने खुद को साबित कर दिखाया। बॉर्डर ड्यूटी पर भी ये बल खरे उतर रहे हैं। सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और असम राइफल के जवानों ने राष्ट्रीय आपदा के समय भी बेहतरीन कार्य किया है। सीआईएसएफ ने एयरपोर्ट, मेट्रो और एवं दूसरे संस्थानों की चाक चौबंद सुरक्षा की है। इन सबके बावजूद सीएपीएफ जवानों के लिए 'झंडा दिवस' कार्यक्रम आयोजित नहीं होता। यह कार्यक्रम हर साल सेना के लिए आयोजित किया जाता है। इसमें केंद्र एवं राज्य सरकारें के कर्मचारी एक तय राशि का योगदान करते हैं। इतना ही नहीं, अगर इन बलों में कोई जवान अपनी शहादत देता है तो उसे शहीद का दर्जा भी नहीं दिया जाता।



कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने पीएम मोदी से आग्रह किया है कि वे इस बार लाल किला की प्राचीर से अर्धसैनिक बलों के लिए 'झंडा दिवस' मनाए जाने की घोषणा करें।

19 मार्च को आयोजित हो 'सीआरपीएफ' झंडा दिवस

महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि भारतीय सेना पर हमें गर्व है। केंद्र सरकार को अर्धसैनिक बलों के उन 34 हजार से अधिक जवानों के परिवारों के बारे में भी सोचना चाहिए, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दी है। सेना की तर्ज पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लिए भी 'झंडा दिवस' कार्यक्रम आयोजित हो। देश के पहले गृह मंत्री सरदार पटेल ने 1950 में 19 मार्च के दिन सीआरपीएफ को झंडा प्रदान किया था। इस दिन को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 'झंडा दिवस' के तौर पर मना सकते हैं। इस पहल के जरिए बलों के शहीद परिवारों की मदद की जा सकेगी। भारतीय सेना, शहीद परिवारों की मदद करने के लिए हर वर्ष सात दिसंबर को 'सशस्त्र बल झंडा दिवस' आयोजित करती है। इस दिन सरकारी और गैर सरकारी विभागों के कर्मचारी अपनी इच्छानुसार दान करते हैं। भारतीय सेनाएं, जो देश की सरहदों की रक्षा करती हैं, झंडा दिवस पर उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हुए मदद का हाथ बढ़ाया जाता है। इस दिन उन शहीदों को भी याद करते हैं, जिन्होंने तिरंगे के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए हैं।

'झंडा दिवस' निधि से मिलती है ऐसी मदद

सेना के झंडा दिवस पर शहीद जवानों के परिवारों की मदद के लिए धनराशि जमा की जाती है। लोगों को गहरे लाल और नीले रंग के झंडे का स्टिकर दिया जाता है। इससे जो भी राशि जमा होती है, उसे झंडा दिवस कोष में जमा कर दिया जाता है। यह राशि युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों के कल्याण और घायल सैनिकों के इलाज में खर्च होती है। इस निधि के माध्यम से पेन्युरी अनुदान (65 वर्ष और उसके ऊपर) 'हवलदार रैंक के गैर पेंशनरों' को चार हजार रुपये प्रतिमाह (आजीवन), दो बच्चों तक शिक्षा अनुदान भी मिलता है। इसमें लड़का/लड़की को स्नातक तक एक हजार रुपये व परास्नातक तक विधवाओं के लिए भी इतनी राशि की व्यवस्था की जाती है, जो एक अप्रैल 2017 से प्रभावी है।

दिव्यांग बाल अनुदान, के तहत जेसीओ रैंक तक के पेंशनर/गैर पेंशनर के बच्चे को तीन हजार रुपये प्रति माह दिया जाता है। पुत्री के विवाह के लिए (दो पुत्रियों तक) 50 हजार रुपये मिलते हैं। हवलदार रैंक वाले पेंशनर व गैर पेंशनर को भी यह राशि मिलती है। विधवा पुनर्विवाह अनुदान के तौर पर भी इतनी ही राशि दी जाती है। उक्त रैंक में ही बतौर चिकित्सा उपचार अनुदान 30 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। अनाथ अनुदान के तहत तीन हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। यह योजना गत अप्रैल से प्रभावी हुई है। विधवाओं के व्यावसायिक प्रशिक्षण अनुदान के लिए एकबारगी 20 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं।

बैठक हुई मगर नतीजा नहीं निकल सका

एसोसिएशन के मुताबिक, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कल्याण, पुनर्वास एवं बेहतर शिक्षा स्वास्थ्य के लिए अर्ध-सेना झंडा दिवस कोष की स्थापना करने की मांग के संबंध में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला के साथ दो फरवरी 2021 बैठक हुई थी। उस बैठक में गृह सचिव द्वारा इस बाबत 21 या 31 अक्तूबर की तिथि निश्चित करने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद यह फाइल आगे नहीं बढ़ सकी। आए दिन अर्धसैनिक बलों के जवान शहीद हो रहे हैं। सरकार उन्हें शहीद का दर्जा भी नहीं दे रही। क्या इन जवानों की शहादत किसी से कम है। केंद्रीय सुरक्षा बल, जिन्हें पैरामिलिट्री के नाम से पुकारते हैं, वे देश की लम्बी सरहदों के वास्तविक चौकीदार हैं। इतना होने पर भी अर्धसैनिक बलों के लिए कोई झंडा दिवस आयोजित नहीं किया जाता।

ये बल सड़क से लेकर संसद तक की पहरेदारी करते हैं। बाढ़, भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटना, देश में शांतिपूर्वक एवं निष्पक्ष चुनाव कराना, कश्मीर के आतंकवाद और दूसरे राज्यों में फैले नक्सलवाद का मुक़ाबला, महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों की सुरक्षा व लोगों को वीवीआईपी सुरक्षा मुहैया कराना, जैसे दायित्वों का इन बलों ने सफल निर्वहन किया है। केंद्र सरकार, जवानों की शहादत के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है।

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