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CAPF: सेना में सशस्त्र झंडा दिवस कोष से मिले 257 करोड़, आर्थिक मदद दोगुनी, सीएपीएफ में नहीं हुआ ऐसे कोष का

Tue, 21 Oct 2025 07:28 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 21 Oct 2025 07:28 PM IST
सार

एसोसिएशन की गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय से अर्ध सैनिक झंडा दिवस कोष के गठन को लेकर 5 बार मुलाकातें हुईं, लेकिन मंत्री द्वारा संसद में दिए गए 7 दिसंबर 2022 को राज्य सभा में दिए गए लिखित जवाब से लाखों पैरामिलिट्री परिवारों को ठेस पहुंची, जिसमें उन्होंने कहा कि हर फोर्स का अलग अलग झंडा है। 

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CAPF Indian Armed Forces Paramilitary Force Jhanda Diwas Kosh Defence Ministry news and updates
CAPF - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिछले सप्ताह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेनाओं के गैर पेंशन धारकों, पूर्व सैनिकों, उनके आश्रितों, विधवाओं के बच्चों की शिक्षा से लेकर शादी में दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि में दोगुनी वृद्धि कर उन्हें दिवाली का तोहफा दिया है। इस निर्णय से सरकार पर लगभग 257 करोड़ का खर्च आएगा। यह खर्च 'सशस्त्र झंडा दिवस कोष' से वहन होगा। ये संशोधित दरें 1 नवंबर 2025 से लागू होंगी। दूसरी तरफ पैरामिलिट्री फोर्सेस, यानी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 'झंडा दिवस कोष' की स्थापना ही नहीं हो सकी है। इसके लिए अलाइंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा कई वर्ष से प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार में विभिन्न स्तरों पर एसोसिएशन द्वारा यह मांग पहुंचाई गई है, लेकिन अभी तक कोई घोषणा नहीं हुई। 
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मंगलवार को एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने अपने एक प्रेस बयान में कहा, वे रक्षामंत्री द्वारा लिए गए फैसले का स्वागत करते हैं। अब सवाल सरहदों के वास्तविक पहरेदारों, बीएसएफ का है, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के 118 बंकर्स ध्वस्त किए थे। सवाल, उन सीआरपीएफ व अन्य सुरक्षा बलों के सैंकड़ों जांबाजों का भी है, जिन्होंने कई दशकों 20 वर्षों से चले आ रहे (लाल आतंक) नक्सलवाद का सामना करते के दौरान अपने प्राणों की आहुति देते हुए सर्वोच्च कर्तव्यों का निर्वहन किया।
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एसोसिएशन की गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय से अर्ध सैनिक झंडा दिवस कोष के गठन को लेकर 5 बार मुलाकातें हुईं, लेकिन मंत्री द्वारा संसद में दिए गए 7 दिसंबर 2022 को राज्य सभा में दिए गए लिखित जवाब से लाखों पैरामिलिट्री परिवारों को ठेस पहुंची, जिसमें उन्होंने कहा कि हर फोर्स का अलग अलग झंडा है। वे अपने तौर पर स्थापना दिवस मनाते हैं। बतौर रणबीर सिंह, जहां तक झंडा दिवस कोष स्थापित करने का सवाल था, गृह राज्य मंत्री ने इस महत्वपूर्ण प्रश्न का जवाब नहीं दिया। 

अब सवाल उठता है कि आए दिन शहीद हुए जवानों के आश्रित परिवार कहां जाएं। विधवाएं, जिनके चांद नक्सलवाद आतंकवाद की भेंट चढ़ गए, उनके बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पढ़ाई, शादी व पुनर्वास का जिम्मा कौन संस्था उठाएगी। एसोसिएशन के अध्यक्ष पूर्व एडीजी एचआर सिंह के नेतृत्व में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके भल्ला से अर्धसैनिक झंडा दिवस कोष व अन्य सुविधाओं को लेकर 2 फरवरी 2021 को नॉर्थ ब्लॉक कार्यालय में मुलाकात हुई थी। 

उन्होंने माना कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लिए इस प्रकार के कोष का गठन होना चाहिए। सभी फोर्सेस डीजी से राय भी मांगी गई, लेकिन गृह राज्यमंत्री के संसद में दिए गए बयान से सब खत्म हो गया। नए आदेश के तहत 'सेना झंडा दिवस कोष' के माध्यम से सेना ने अपने गैर पेंशन भोगियों, पूर्व सैनिकों उनकी विधवाओं को मिलने वाले गरीबी अनुदान को 4000 से बढ़ाकर 8000 रुपये कर दिया है। यह सुविधा उन वृद्ध सैनिकों के लिए भी लागू होगी, जो पेंशन के पात्र नहीं थे। 

रणबीर सिंह ने कहा, अब उन बीएसएफ जवानों का क्या होगा जो 1996-97 में विभागीय गलती के कारण बीएसएफ रूल 19 के तहत 10 साल सेवा के बाद घर भेज दिए गए। उन्हें यह भरोसा दिया गया कि आप स्वेच्छा से घर जाइए, आप को न्यूनतम पेंशन मिलेगी। साल 2001 तक इन जवानों को 1250 रुपये पेंशन मिली, जो बाद में बंद कर दी गई। इन पीड़ित जवानों की संख्या 697 के आसपास थी। इनमें से कुछ तो पेंशन मिलने की आस लगाए इस दुनिया से भी चले गए। अब उन पर परिवारों की मदद कौन करेगा। 
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सीआरपीएफ व अन्य सुरक्षा बलों के जवान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई घोषणा, 'नक्सलवाद को 31 मार्च 2026 तक समाप्त कर देंगे', को पूरा करने में लगे हैं। इसके लिए वे दिन-रात ऑपरेशन कर रहे हैं। उनका मकसद, 2026 तक भारत को नक्सल मुक्त बनाना है। एसोसिएशन ने अब एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष यह मांग रखी है कि पूर्व अर्धसैनिकों, उनकी विधवाओं, गैर पेंशन भोगियों, ऑपरेशन के दौरान दिव्यांग हुए जवानों, पूर्व अर्धसैनिकों की बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, शादियों, पेंशन पुनर्वास में आर्थिक सहायता के लिए अविलंब सेना झंडा दिवस कोष की तर्ज पर अर्ध सैनिक झंडा दिवस "कोष" स्थापित किया जाए। इसके गठन के लिए किसी बजटीय प्रावधान की जरूरत नहीं है। आम भारतीय उपरोक्त कोष में स्वेच्छा से दान करेंगे।
 
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