फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   CAPF indefinite protest for the demands of 11 lakh personnel of paramilitary forces advance notice sent to PMO

CAPF: अर्धसैनिक बलों के 11 लाख जवानों की मांगों के लिए कौन करेगा अनिश्चितकालीन प्रदर्शन? PMO भेजी अग्रिम सूचना

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 01 Jun 2023 05:51 PM IST
सार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से जवानों और कैडर अधिकारियों का मोह भंग क्यों हो रहा है। वे बीच राह में ही नौकरी छोड़ रहे हैं। अगर पिछले पांच वर्ष की बात करें तो सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और असम राइफल्स में 50155 कर्मियों ने जॉब को अलविदा कह दिया है। इतना ही नहीं, इन बलों में आत्महत्या के केस भी बढ़ रहे हैं।

विज्ञापन
CAPF indefinite protest for the demands of 11 lakh personnel of paramilitary forces advance notice sent to PMO
CAPF - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 11 लाख जवानों की मांगों के लिए अब अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन की नौबत आ गई है। 'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन' ने कहा है, सीएपीएफ जवानों की मांगों को लेकर अनेकों बार केंद्र सरकार तक बात पहुंचाई गई है। विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों और दूसरे अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया है, लेकिन इन बलों की मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हुई। एसोसिएशन ने अब निर्णय लिया है कि 31 अक्तूबर तक इन बलों की मांगों पर कोई आदेश जारी हुआ तो 14 फरवरी 2024 को जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इस बाबत प्रधानमंत्री कार्यालय को एक पत्र के माध्यम से अग्रिम सूचना दे दी गई है। 

विज्ञापन


धरना प्रदर्शन में शामिल होंगे जवानों के परिजन 
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा कि यह निर्णय 22 मई को ग्वालियर में सम्पन्न हुए एक्स पैरामिलिट्री जवानों के सेमिनार में लिया गया है। इसमें 22 राज्यों की वेलफेयर एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। कॉन्फेडरेशन के चेयरमैन एवं सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने यह प्रस्ताव पेश किया था कि केंद्र सरकार, 31 अक्टूबर तक अर्धसैनिक बलों के जवानों की पुरानी पेंशन बहाली, ओआरओपी, अर्धसैनिक झंडा दिवस कोष का गठन, राज्यों में अर्धसैनिक कल्याण बोर्डों की स्थापना, सीपीसी कैंटीन पर जीएसटी में छूट और एक्स मैन व शहीद का दर्जा, आदि मांगें पूरा नहीं करती है तो 14 फरवरी को जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जाएगा। खास बात है कि इस धरना प्रदर्शन में जवानों के परिजन भी शामिल होंगे। एचआर सिंह ने कहा, पिछले आठ वर्षों से एसोसिएशन द्वारा सीएपीएफ जवानों की मांग के लिए संघर्ष किया जा रहा है। तीन सितम्बर 2021 को राष्ट्रपति से मुलाकात कर उन्हें 1 लाख 10 हजार से अधिक हस्ताक्षर युक्त पेटिशन सौंपी गई, मगर नतीजा शून्य रहा। 
विज्ञापन


पुरानी पेंशन के मामले को जानबूझकर लटकाया
महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, केंद्र सरकार को अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड के गठन व अर्धसैनिक झंडा दिवस कोष स्थापित करने में दिक्कत कहां आ रही है। इसमें तो किसी बड़े बजट की जरूरत नहीं है। पैरामिलिट्री फ्लैग डे फंड का गठन करने में तो कोई समस्या नहीं है। पूर्व आईजी बीएसएफ गजेन्द्र चौधरी ने कहा, दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 11 जनवरी 2023 को सुनाए गए पैरामिलिट्री पुरानी पेंशन बहाली के ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ 6 मार्च को केंद्र सरकार द्वारा आठ सप्ताह का समय मांगा गया। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार की मंशा ठीक नहीं है। पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। 2004 में जब पैरामिलिट्री जवानों के बुढ़ापे की लाठी छीनी गई तो किसी भी बल का डीजी विरोध में नहीं आया। पुरानी पेंशन बहाली, आने वाले चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा। हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटका का उदाहरण हमारे सामने है। इन राज्यों में पेंशन बहाली का मुद्दा, सशक्त एवं निर्णायक भूमिका में उभरा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पैरामिलिट्री परिवारों की संख्या एक करोड़ से अधिक
एसोसिएशन के मुताबिक, सरकारें भूल रही है कि चुनावों को निष्पक्ष ढंग से कराने में केंद्रीय सुरक्षा बलों की अहम भूमिका है। जहां तक अर्धसैनिक बलों के जवानों व उनके परिवारों का सवाल है तो इनकी संख्या 20 लाख है। अगर इनके पड़ोसियों, सगे संबंधियों और नजदीकी रिश्तेदारों की संख्या देखें तो वह एक करोड़ से ज्यादा है। कई बार महज एक प्रतिशत वोटों के इधर उधर होने से ही सत्ता खिसक जाती है। हिमाचल प्रदेश का ताजा उदाहरण हमारे सामने है। इस साल राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश व तेलंगाना में होने वाले विधानसभा चुनावों व आने वाले 2024 के आम चुनावों में अर्धसैनिक बलों के परिवार एक निर्णायक भूमिका निभाएंगे। रणबीर सिंह ने कहा, केंद्रीय सुरक्षा बलों को सीएपीएफ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं, लेकिन पूर्व अर्धसैनिकों को इस सुविधा से वंचित रखा गया है। एक वर्ष में 100 दिन की छुट्टी, गृह मंत्रालय का यह फार्मूला फेल हो गया है। इस बाबत जब यह सूचना मांगी गई कि अभी तक कितने जवानों को 100 दिनों की छुट्टी मिली है तो वह ब्यौरा देने से मना कर दिया गया। आरटीआई के तहत फोर्सेस डीजी द्वारा राज्यवार रिटायर्ड कर्मियों, शहीद परिवारों, मेडल अवार्डी की सूची मांगी गई वो भी देने से मना कर दी गई। 

पांच साल में 50155 जवानों ने नौकरी को अलविदा कहा
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से जवानों और कैडर अधिकारियों का मोह भंग क्यों हो रहा है। वे बीच राह में ही नौकरी छोड़ रहे हैं। अगर पिछले पांच वर्ष की बात करें तो सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और असम राइफल्स में 50155 कर्मियों ने जॉब को अलविदा कह दिया है। इतना ही नहीं, इन बलों में आत्महत्या के केस भी बढ़ रहे हैं। गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने इस बात को बहुत गंभीरता से लिया है। समिति ने अपनी 242 वीं रिपोर्ट में साफतौर पर कहा है कि जवानों और अधिकारियों द्वारा जॉब छोड़ना, इसका सीधा असर फोर्स के मनोबल पर पड़ता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय को चाहिए कि जो लोग जॉब छोड़कर जा रहे हैं, उनका साक्षात्कार ले, सर्वे रिपोर्ट तैयार करे। इसके जरिए उन कारणों का पता चल सकेगा कि जिसके चलते जवान और अधिकारी, नौकरी छोड़ रहे हैं। इसके बाद सीएपीएफ में वे सभी जरुरी बदलाव किए जाएं, जिससे जॉब छोड़ने वालों की संख्या कम होने लगे। 

पांच साल में 654 जवानों ने की आत्महत्या
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ, असम राइफल्स और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड में जवानों व अधिकारियों द्वारा आत्महत्या करने के मामले कम नहीं हो पा रहे हैं। गत पांच वर्ष में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 654 जवानों ने आत्महत्या कर ली है। आत्महत्या करने वालों में CRPF के 230, बीएसएफ के 174, सीआईएसएफ के 89, एसएसबी के 64, आईटीबीपी के 51, असम राइफल के 43 और एनएसजी के 3 जवान शामिल हैं। संसदीय समिति ने कहा है कि आत्महत्या के केस, बल की वर्किंग कंडीशन पर असर डालते हैं। सेवा नियमों में सुधार की गुंजाइश है। जवानों को प्रोत्साहन दें। रोटेशन पॉलिसी के तहत पोस्टिंग दी जाए। लंबे समय तक कठोर तैनाती न दें। ट्रांसफर पॉलिसी ऐसी बनाई जाए कि जवानों को अपनी पसंद का ड्यूटी स्थल मिल जाए। अगर ऐसे उपाय किए जाते हैं तो नौकरी छोड़कर जाने वालों की संख्या कम हो सकती है।


एसोसिएशन ने गिनाए कई कारण
'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन' के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है, इन जवानों को घर की परेशानी नहीं है। सरकार इस मामले में झूठ बोल रही है। इन्हें ड्यूटी पर क्या परेशानी है, इस बारे में सरकार कोई बात नहीं करती। आतंक, नक्सल, चुनावी ड्यूटी, आपदा, वीआईपी सिक्योरिटी और अन्य मोर्चों पर इन बलों के जवान तैनात हैं। इसके बावजूद उन्हें सिविल फोर्स बता दिया जाता है। जवानों को पुरानी पेंशन से वंचित रखा जा रहा है। सिपाही से लेकर कैडर अफसरों तक की प्रमोशन में लंबा वक्त लग रहा है। नतीजा, जवान टेंशन में रहने लगते हैं। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को भारतीय सेना के बराबर शहीद का दर्जा मिले। इन बलों के लिए पुनर्वास और पुनःस्थापन बोर्ड गठित किया जाए। बीएसएफ के पूर्व एडीजी संजीव कृष्ण सूद कहते हैं, कई जगहों पर वर्कलोड ज्यादा है। जवान ठीक से सो नहीं पाते हैं। वे अपनी समस्या किसी के सामने रखते हैं, तो वहां ठीक तरह से सुनवाई नहीं हो पाती। ये बातें जवानों को तनाव की ओर ले जाती हैं। कुछ स्थानों पर बैरक एवं दूसरी सुविधाओं की कमी नजर आती है। कई दफा सीनियर की डांट फटकार भी जवान को आत्महत्या तक ले जाती है। समय पर प्रमोशन या रैंक न मिलना भी जवानों को तनाव देता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed