CAPF: केंद्र ने सीएपीएफ (जी.ए) बिल 2026 में अर्धसैनिक बलों को बताया संघ के सशस्त्र बल, OPS केस में सिविल फोर्स
अमित शाह सीएपीएफ बिल पेश करेंगे, जिसमें बलों को ‘संघ के सशस्त्र बल’ बताया गया है। सरकार पहले इन्हें सिविल बताकर ओपीएस से दूर रखती रही, जबकि कोर्ट इन्हें सशस्त्र मान चुका है।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) बिल, 2026' राज्यसभा में पेश करेंगे। इस बिल के सेक्शन 2 (ए) में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) को 'संघ के सशस्त्र बल' बताया गया है। खास बात है कि 2023 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने एक अहम फैसले में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को 'भारत संघ के सशस्त्र बल' मानते हुए इन्हें ओपीएस के दायरे में लाने की बात कही थी। सरकार ने 'सीएपीएफ' को सिविलियन फोर्स बताकर 'पुरानी पेंशन' देने से मना कर दिया। इतना ही नहीं, सरकार उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चली गई। फिलहाल यह मामला, सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
सहूलियत के हिसाब से 'सीएपीएफ' की व्याख्या
बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद बताते हैं कि सरकार अपनी सहूलियत के हिसाब से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की व्याख्या कर रही है। जब इन बलों को पुरानी पेंशन देने का मामला सामने आया तो सरकार ने इन्हें 'संघ के सशस्त्र बल' मानने से इनकार कर दिया। दरअसल सरकार, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को ओपीएस देना ही नहीं चाहती थी। इसी कारण सरकार ने इन बलों को सिविल फोर्स बता दिया। अब 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) बिल, 2026' में लिखा है कि सीएपीएफ 'संघ के सशस्त्र बल' हैं। अगर ये बात सही है तो फिर इन बलों को पुरानी पेंशन मिलनी चाहिए।
'एनपीएस' को स्ट्राइक डाउन करने की बात
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को 'भारत संघ के सशस्त्र बल' माना था। दूसरी तरफ सरकार, इन्हें सिविलियन फोर्स बताती है। अदालत ने इन बलों में लागू 'एनपीएस' को समाप्त करने की बात कही। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, चाहे कोई आज इन बलों में भर्ती हुआ हो, पहले कभी भर्ती हुआ हो या आने वाले समय में भर्ती होगा, सभी जवान और अधिकारी, पुरानी पेंशन स्कीम के दायरे में आएंगे।
इन बलों को सिविलियन फोर्स बता रही सरकार
केंद्र सरकार, सीएपीएफ को सिविलियन फोर्स बताती है। सीएपीएफ पर भारतीय सेना के कानून लागू होते हैं, फोर्स के नियंत्रण का आधार भी सशस्त्र बल हैं। इन बलों के लिए जो सर्विस रूल्स तैयार किए गए हैं, उनका आधार भी फौज है। इन सारी बातों के होते हुए भी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को 'पुरानी पेंशन' से वंचित किया गया है। एक जनवरी 2004 के बाद केंद्र सरकार की नौकरियों में भर्ती हुए सभी कर्मियों को पुरानी पेंशन के दायरे से बाहर कर उन्हें 'एनपीएस' में शामिल कर दिया गया था। इसी तर्ज पर सरकार ने सीएपीएफ जवानों को सिविल कर्मचारी मानकर उन्हें ओपीएस से बाहर निकालकर एनपीएस में शामिल कर दिया।
क्या कहता है बीएसएफ एक्ट 1968
सरकार का मानना है कि देश में सेना, नेवी और वायु सेना ही 'सशस्त्र बल' हैं। बीएसएफ एक्ट 1968 में कहा गया है कि इस बल का गठन 'भारत संघ के सशस्त्र बल' के रूप में हुआ है। इसी तरह सीएपीएफ के बाकी बलों का गठन भी भारत संघ के सशस्त्र बलों के रूप में हुआ है। कोर्ट ने माना है कि 'सीएपीएफ' भी भारत के सशस्त्र बलों में शामिल हैं। इस लिहाज से उन पर 'एनपीएस' लागू नहीं होता। केंद्रीय गृह मंत्रालय, द्वारा 6 अगस्त 2004 को जारी पत्र में बताया गया है कि गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत केंद्रीय बल, 'संघ के सशस्त्र बल' हैं।
सिविल महकमे के कर्मी नहीं लेते ऐसी शपथ
सीएपीएफ जवानों को अलाउंस भी सशस्त्र बलों की तर्ज पर मिलते हैं। इन बलों में कोर्ट मार्शल का भी प्रावधान है। सीआरपीएफ के पूर्व अधिकारी सर्वेश त्रिपाठी ने कहा कि इस मामले में सरकार दोहरा मापदंड अपना रही है। अगर सीएपीएफ जवानों को सरकार, सिविलियन मानती है तो उनमें आर्मी की तर्ज पर बाकी प्रावधान क्यों हैं। फोर्स के नियंत्रण का आधार भी सशस्त्र बल है। जो सर्विस रूल्स हैं, वे भी सैन्य बलों की तर्ज पर बने हैं। अब इन्हें सिविलियन फोर्स बता रहे हैं। ऐसे में ये बल अपनी सर्विस का निष्पादन कैसे करेंगे। इन बलों को शपथ दिलाई गई थी कि इन्हें जल, थल और वायु में जहां भी भेजा जाएगा, ये वहीं पर काम करेंगे। सिविल महकमे के कर्मी तो ऐसी शपथ नहीं लेते हैं।