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Kanishka Flight Bomb Blast: खालिस्तानी आतंकियों ने रची थी बम धमाके की साजिश: कनाडा के कबूलनामे से ISI बेचैन

Thu, 25 Jun 2026 08:46 PM IST
प्रशांत तिवारी आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 25 Jun 2026 08:46 PM IST
सार

भारत और कनाडा के रिश्तों में आई नई गर्मजोशी के बाद कनाडा में खालिस्तान समर्थक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है। नए एंटी-हेट कानून, CSIS की रिपोर्ट और सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती से खालिस्तानी नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है। भारतीय एजेंसियों का मानना है कि इससे ISI की योजनाओं को झटका लगा है, लेकिन हताश संगठन पंजाब या आसपास के इलाकों में बड़ी वारदात की कोशिश कर सकते हैं।
 

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Canada Khalistan crackdown ISI backed networks agencies warn of Punjab misadventure after Modi Carney Meeting
कनाडा का झंडा - फोटो : Google Gemini

विस्तार

कनाडा में खालिस्तान समर्थक संगठनों और उनसे जुड़े नेटवर्क के लिए हालात पहले जैसे नहीं रहे। भारतीय सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री के बीच हुई हालिया बातचीत के बाद कनाडा ने ऐसे तत्वों के खिलाफ कई अहम कदम उठाए हैं। इससे न सिर्फ खालिस्तानी संगठनों की गतिविधियों पर असर पड़ा है, बल्कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की योजनाओं को भी झटका लगा है।

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नई दिल्ली में हुई थी दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात
नई दिल्ली में दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात के दौरान खालिस्तान समर्थक गतिविधियों का मुद्दा भी उठाया गया था। इसके बाद कनाडाई प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कई ऐसी कार्रवाइयाँ देखने को मिली हैं, जिन्हें भारत सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है। सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक कनाडा का नया एंटी-हेट कानून है। कनाडा सरकार ने नफरत फैलाने और धार्मिक समुदायों को निशाना बनाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए नया कानून पारित किया है, जो 18 जुलाई से लागू होगा। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि इस कानून का असर उन खालिस्तान समर्थक समूहों पर भी पड़ेगा जो लंबे समय से मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों के बाहर प्रदर्शन करते रहे हैं।
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मंदिरों के बाहर लगाई जाती थी आतंकवादियों की तस्वीरें
कनाडा में रहने वाले हिंदू समुदाय के लोगों ने कई बार शिकायत की थी कि मंदिरों के बाहर विरोध-प्रदर्शन किए जाते हैं, आतंकवादियों की तस्वीरें लगाई जाती हैं और भारत विरोधी तथा प्रधानमंत्री मोदी विरोधी नारे लिखे जाते हैं। नए कानून के लागू होने के बाद ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने में प्रशासन को ज्यादा अधिकार मिलेंगे।
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कनाडा ने खुद के लिए भी माना खतरा
इस बीच कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) की एक रिपोर्ट भी चर्चा में है। रिपोर्ट में 23 जून 1985 को एयर इंडिया की कनिष्क फ्लाइट 182 में हुए बम धमाके के लिए खालिस्तानी चरमपंथियों को जिम्मेदार बताया गया है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में पहली बार कनाडा की खुफिया एजेंसी ने इतने स्पष्ट शब्दों में इस हमले के पीछे खालिस्तानी चरमपंथियों की भूमिका स्वीकार की है। भारतीय सुरक्षा तंत्र का मानना है कि कनाडा को अब यह समझ में आने लगा है कि ऐसे तत्व सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि कनाडा की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए भी खतरा हैं। पहले कनाडा की सरकारें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देकर इन गतिविधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने से बचती रही थीं, लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं।

पाकिस्तान की ISI परेशान
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के एक अधिकारी के अनुसार, भारत और कनाडा के बीच बढ़ते सहयोग से पाकिस्तान की ISI असहज है। ISI लंबे समय से खालिस्तान समर्थक संगठनों का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए करती रही है। अधिकारी का कहना है कि बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) जैसे संगठनों पर भी इन दिनों भारी दबाव है, जिन्हें पंजाब में गतिविधियां संचालित करने का जिम्मा दिया गया था। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां इसे बड़ी सफलता मान रही हैं, लेकिन साथ ही सतर्क भी हैं। उनका कहना है कि जब किसी संगठन पर दबाव बढ़ता है तो वह अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए अधिक आक्रामक कदम उठा सकता है। फिलहाल छोटे और कम तीव्रता वाले हमले देखने को मिल रहे हैं, जिन्हें आंदोलन को जीवित रखने की रणनीति माना जा रहा है।


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रिपोर्ट में हमले की आशंका
एजेंसियों को आशंका है कि ISI के दबाव में BKI और उससे जुड़े तत्व पंजाब या पड़ोसी राज्यों में किसी बड़ी वारदात की कोशिश कर सकते हैं। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियों ने राज्यों को सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने की सलाह दी है। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि कनाडा में बदले माहौल से खालिस्तान समर्थक नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। इसलिए आने वाले समय में सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखेंगी।

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