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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: क्या बीमारी को नहीं मानने और इलाज से इनकार के आधार पर मिल सकता है तलाक?  

Fri, 04 Mar 2022 10:05 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 04 Mar 2022 10:05 PM IST
सार

केरल हाई कोर्ट ने 1869 के तलाक अधिनियम के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक देने के पारिवारिक अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली पत्नी की याचिका पर आदेश पारित किया है।

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Can refusal of spouse to acknowledge ailment and undergo treatment be cruelty, SC to examine
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

क्या पति या पत्नी द्वारा बीमारी को नहीं मानना और इलाज से इनकार करने को क्रूरता कहा जा सकता है? और क्या यह तलाक का आधार बन सकता है? सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया। न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने नोटिस जारी करते हुए केरल हाई कोर्ट के 3 सितंबर 2021 के एक आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें एक जोड़े को तलाक की मंजूरी दे दी गई थी। पीठ ने नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह में जवाब मांगा है तब तक आदेश पर रोक रहेगी।

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पति का कहना है कि पत्नी अपनी बीमारी से कर रही इनकार 
केरल हाई कोर्ट ने 1869 के तलाक अधिनियम के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक देने के पारिवारिक अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली पत्नी की याचिका पर आदेश पारित किया है। पति ने आरोप लगाया है कि उसकी पत्नी 'पैरानॉयड सिजोफ्रेनिया' से पीड़ित है, लेकिन पत्नी इसे स्वीकार करने से इनकार करती है और इलाज कराने के लिए तैयार नहीं है। पत्नी ने यह कहते हुए विरोध किया है कि वह बिल्कुल ठीक है और दो बच्चों की देखभाल करती है और उसके पड़ोसियों के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं। हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली पत्नी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता विपिन नायर ने कहा कि कानून यही है कि पति या पत्नी की बीमारी तलाक देने का कारण नहीं हो सकती, भले ही इसका परिणाम असामान्य व्यवहार क्यों न हो जो सामान्य वैवाहिक जीवन में अपेक्षित नहीं है।
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उन्होंने कहा कि इस मामले में पत्नी स्पष्ट रूप से इस तरह की किसी भी मानसिक विकार से पीड़ित होने से इनकार करती है, यह पति द्वारा की गई क्रूरता और मानसिक प्रताड़ना है। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता (पत्नी) किसी भी मानसिक विकार से पीड़ित नहीं है, इस आधार पर तलाक की मंजूरी ऐसी परिस्थितियों में दिया गया निर्णय मनमाना और अनुचित है।
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याचिका में कहा गया है कि पत्नी एक योग्य नर्स है और उसकी शैक्षिक पृष्ठभूमि और काम करने का अनुभव यह समझाएगा कि वह कभी किसी प्रकार के मानसिक विकार से पीड़ित नहीं है। यहां तक कि उसमें ऐसा कोई लक्षण भी नहीं दिखा है, यह उसके पति द्वारा लगाया गया सिर्फ एक आरोप है।  

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