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एक कमरे में नहीं खोल सकेंगे लैब, यूपी सहित 17 राज्यों में पैथोलॉजी पर कसा शिकंजा

Wed, 30 May 2018 02:30 AM IST
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 30 May 2018 02:30 AM IST
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Can not open Pathology lab in a single room, Central Health Ministry Guidelines
देश में पैथोलॉजी को लेकर बढ़ते गोरखधंधे को रोकने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश सहित 17 राज्यों में पैथोलॉजी को लेकर बनाए नए कानूनों को तत्काल लागू कर दिया है। जबकि अन्य राज्य सरकारों से भी इस पर अमल करने की अपील की है। इन नए कानूनों के तहत अब कोई पैथोलॉजी खोलने के लिए मानकों को पूरा करना पड़ेगा।      
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हर लैब को रजिस्ट्रेशन नंबर देगा केंद्र, मरीजों का ब्यौरा होगा ऑनलाइन   

आश्चर्य है कि अभी तक देश में पैथोलॉजी को लेकर कोई ठोस कानून नहीं था। लेकिन हाल ही में मंत्रालय की एक टीम ने इसे तैयार कर क्लीनिकल एस्टेबिलस्मेंट एक्ट वाले राज्यों में लागू कर दिया है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ समय से विभिन्न राज्यों में पैथोलॉजी को लेकर चौंकान्ने वाली घटनाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ समय पहले दिल्ली में भी इस तरह के एक रैकेट का पुलिस ने खुलासा किया था। यही वजह है कि अब इन नियमों को सख्ती से लागू कराने का वक्त है।    
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बनाई गाइडलाइन      

अधिकारी ने बताया कि क्लीनिकल एस्टेबिलस्मेंट एक्ट के तहत इन नियमों को रखा है, जिसमें सभी पैथोलॉजी को रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इसके अलावा लैब में एक बोर्ड भी डिस्पले करना होगा, जिसमें एमबीबीएस डॉक्टर और लैब में काम करने वालों की योग्यता लिखी होगी।     
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हर जांच को किया फिक्स, सबका लाइसेंस अलग

अभी तक एक ही पैथोलॉजी लैब में हर तरह की जांच होती थी। ब्लड प्रोफाइल से लेकर टिश्यू तक सभी तरह की जांच करके मरीजों से काफी फीस भी ली जाती थी। लेकिन सरका ने अब लाइसेंस लेते वक्त ही इसे फिक्स कर दिया है। तीन वर्गों में इसे बांटते हुए बेसिक, मीडियम और एडवांस स्टेज में सभी प्रकार की जांचों को रखा है। जांच केंद्र को हर तरह की जांच करने की इजाजत नहीं होगी। रजिस्ट्रेशन कैटेगरी के हिसाब से गाइडलाइन भी तय की गई है।       

 

उल्लंघन करने पर लाइसेंस होगा निरस्त

Can not open Pathology lab in a single room, Central Health Ministry Guidelines
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव ने बताया कि इन नियमों का उल्लंघन करने पर दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान रखा है। इसमें उल्लंघन करने पर लैब का लाइसेंस निरस्त और दोषी को कम से कम 3 वर्ष का कारावास तक शामिल होगा। सबसे जरूरी है कि हर पैथोलॉजी में माइक्रोबॉयोलॉजी के डिग्रीधारक होना अनिवार्य है। अभी तक यह नियम नहीं था। साथ ही जांच रिपोर्ट पर एमबीबीएस डॉक्टर की मंजूरी होनी चाहिए।     
  
डीएनए का नाम पर खेल, लगेगी लगाम

सूत्रों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली सहित देश भर के मेट्रो शहरों में डीएनए की जांच कर 10 से 15 साल बाद तक भविष्य की बीमारियां बताने वाली लैब पर भी रोक लग सकेगी। अभी तक विदेशों के नाम पर इन लैब को खोल मरीजों से हजारों रुपये की लूटमार की जाती है। लेकिन सरकार अब इसके लिए भी सभी मानक तय कर रही है।       

इन राज्यों में हो चुका है नियम लागू

उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, राजस्थान, बिहार, झारखंड, मिजोरम, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, अंडमान निकोबार, चंडीगढ़, दमन दीव, पांडिचेरी, उत्तराखंड, सिक्किम और असम के अलावा कुछ केंद्र शासित राज्यों में भी ये नियम लागू हो चुके हैं। दिल्ली में फिलहाल इन्हें लागू नहीं किया है। बताया जा रहा है कि जल्द ही पूरेदेश में यह गाइडलाइन लागू होगी।       
 
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