फिर विवादों में EVM, क्या वाकई हो सकती है हैक? जानिए मशीन के अंदर की पूरी ABCD
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ईवीएम से चुनाव कराने को लेकर एक बार फिर बवाल खड़ा हो गया है। इस बार भारतीय मूल के लंदन में बैठे एक साइबर एक्सपर्ट ने ईवीएम हैक करने का दावा किया है। उसने यह भी दावा किया कि 2014 के चुनाव में भी ईवीएम को हैक कराया गया था। हालांकि चुनाव आयोग ने ऐसी किसी भी बात को मानने से इंकार कर दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है क्या वाकई ईवीएम में कोई गड़बड़ी हो सकती है? इसी के चलते आज हम आपको बताएंगे कि ईवीएम के अंदर क्या है और यह कैसे काम करती है।
चुनाव आयोग का कहना है कि ईवीएम को कोई भी हैक नहीं कर सकता है। आयोग के मुताबिक प्रत्येक ईवीएम का सीरियल नंबर होता है। सीरियल नंबर के जरिए ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर यह पता लगाया जा सकता है कि कौन सी मशीन कहां पर है। इसलिए आयोग के मुताबिक ईवीएम में गड़बड़ी की कोई संभावना ही नहीं है।
चुनाव आयोग का कहना है कि जैसे ही कोई मशीन खोलने का प्रयास करता है तभी ईवीएम निष्क्रिय हो जाती है। ईवीएम दो हिस्सों में बनी होती है। जिसका एक हिस्सा बैलेटिंग यूनिट का होता है जो कि मतदाताओं के लिए होता है।
ईवीएम में 64 प्रत्याशी तक दर्शाए जा सकते हैं
वहीं दूसरा हिस्सा कंट्रोल यूनिट का जो कि पोलिंग अफसरों के लिए होता है। यह दोनों ही हिस्से एक पांच मीटर लंबे तार से जुड़े होते हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक बैलेट यूनिट ऐसी जगह रखी होती है जहां कोई भी वोटर वोट डालते समय देख नहीं सकता है।
ईवीएम में 64 प्रत्याशी तक दर्शाए जा सकते हैं। इससे ज्यादा होने पर चुनाव आयोग कागज के बैलेट का इस्तेमाल करता है। मतदाताओं वाले हिस्से पर प्रत्याशियों के नाम और उनका सीरियल नंबर भी लिखा होता है। जिस इलाके में जो भाषा प्रचलित होती है उनके नाम एक दो या तीन भाषाओं में लिखे जाते हैं। नाम के साथ ही चुनाव चिन्ह भी होता है।
चुनाव चिन्ह इसलिए होते हैं जो पढ़ लिख नहीं सकते हैं। एक ही नाम के एक से ज्यादा उमीदवार होने पर नाम के आगे उम्मीदवार के घर या पेशे के बारे में भी लिखा जाता है ताकी मतदाता को समझने में किसी तरह की कोई परेशानी न हो। ईवीएम में अंतिम बटन नोटा होता है।
विशेष सुरक्षा के घेरे में होती है निगरानी
चुनाव आयोग के मुताबिक वोटिंग के पहले और बाद में हर मशीन को कड़ी निगरानी में रखा जाता है। वोट डालने के बाद मशीन को सील बंद करके रखा जाता है। मशीन को एक खास कागज से सील करके रखा जाता है। यह कागज खास रूप से बनवाए जाते हैं। इन कागजों पर एक खास तरह का नंबर भी होता है।
मशीन के परिणाम वाले हिस्सों में एक छेद होता है। जिसे धागे की मदद से बंद किया जाता है। इसके बाद पीतल की सील लगा कर बंद कर दिया जाता है। इस सबके बाद हर पोलिंग मशीन को विशेष सुरक्षा के घेरे में मतगणना केंद्र तक लाया जाता है।
बता दें कि भारत में पहली बार 2004 के आम चुनाव में मतदाताओं ने ईवीएम के जरिए वोट डाले थे। हर ईवीएम के अंदर एक 6 वोल्ट की अल्कलाइन बैटरी होती है। ईवीएम के अंदर 10 सालों तक के परिणामों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
इस तरीके से होती है EVM के वोटों की गिनती
जब पूरी तरह से जांच हो जाती है तो उसके आधे घंटे बाद ईवीएम वोटों की गिनती शुरू की जाती है। रिटरनिंग ऑफिसर का काम होता है हर राउंड के बाद कम सेकम दो मिनट तक रोकना। रोकने का मकसद होता है अपने एजेंटों से वोटं की रि-काइंट करवाना। पर ऐसा कभी-कभी होता है।
पूरी प्रक्रिया खत्म होने के बाद और अच्छे से जांच करने के बाद रिटरनिंग ऑफिसर को तब परिणाम जारी करने की अनुमति मिल जाती है। रिटर्निंग ऑफिसर सीधे जनता को परिणाम नहीं सुनाता बल्कि चुनाव आयोग और उचित प्राधिकारी को नतीजे बताता है। आपको बता दें कि काउंटिंग सुबह 8 बजे शुरू होकर तब तक चलती है जब कर प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
क्या आप जानते हैं-
जब आप काउंटिंग हॉल के अंदर जाते हैं तो आपके फोन बाहर रखवा लिए जाते हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्रों में तीन बार चेकिंग की जाती है। पुलिस लगातार वहां मौजूद रहती है।
कभी कभी स्थति बिगड़ जाती है इसलिए नियंत्रण में रखने के लिए मेन गेट पर वरिष्ठ मजिस्ट्रेट को तैनात किया जाता है। काउंटिंग बूथ के आस-पास सौ मीटर का दायरा बनाया जाता है। काफी जांच पड़ताल और सुरक्षा के साथ EVM काउंटिंग बूथ पर लगाते हैं।
जानिए क्या है VVPAT मशीन?
वोट डालने के बाद मतदाता को पर्ची के जरिए यह जानकारी दी जाती है कि उन्होंने किसे वोट किया। इस पर्ची को रिकॉर्ड के तौर पर रखा जाता है। हालांकि ये पर्ची मतदाता को नहीं मिलती, यह मतदान केंद्र पर ही जमा हो जाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से कहा था कि वर्ष 2014 के चुनाव में चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के साथ ही कागज की पर्ची देने की व्यवस्था शुरू की जाए। स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए यह आवश्यक है और इससे मतदाताओं का विश्वास बहाल होगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिए थे कि ईवीएम के साथ वीवीपीएटी व्यवस्था लागू करने के लिए निर्वाचन आयोग को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
क्यों पड़ी इस मशीन की जरूरत?
2017 में हुए यूपी चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद विपक्ष ने ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। जिसके बाद चुनाव आयोग ने वीवीपीएटी का इस्तेमाल करने की बात कही थी। वहीं लगातार लग रहे आरोप के बाद चुनाव आयोग सख्त हो गया। आयोग ने ईवीएम हैकिंग का चैलेंज भी किया था, जिसमें विपक्षी दलों ने किनारा कर लिया।