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केएमसी वार्ड परिसीमन को चुनौती: हाईकोर्ट ने मांगे सरकार और याचिकाकर्ता के हलफनामे; कब होगी सुनवाई?
Thu, 29 Oct 2026 10:58 PM IST
निर्मल कांत
आईएएनएस, कोलकाता।
आईएएनएस, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 29 Oct 2026 10:58 PM IST
सार
कोलकाता नगर निगम के वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 करने के प्रस्ताव को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। अदालत ने फिलहाल दखल देने से इनकार किया है, लेकिन याचिका खारिज भी नहीं की। अब छह हफ्ते बाद होने वाली सुनवाई में क्या कोई नया मोड़ आएगा? पढ़िए रिपोर्ट
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कलकत्ता हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक मामले में दखल देने से इनकार कर दिया। यह मामला कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के वार्डों के परिसीमन को चुनौती देने से जुड़ा है। साल के अंत तक केएमसी के चुनाव होने हैं।
परिसीमन के मसौदा प्रस्ताव के अनुसार, केएमसी में वार्डों की संख्या बढ़ाई जानी है। इसे मौजूदा 144 से बढ़ाकर 209 किया जाना है।
याचिका में क्या आरोप लगाए गए?
इस महीने की शुरुआत में कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इसमें परिसीमन प्रस्तावों के आधार को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि परिसीमन की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार नहीं की गई।
गुरुवार को न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की पीठ में इस मामले पर सुनवाई हुई। सुनवाई के अंत में उनकी पीठ ने फिलहाल इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया।
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ये भी पढ़ें: बार संघों के विरोध से अटकी रिटायर्ड जजों की नियुक्ति: लंबित मुकदमों पर कैसे लगेगी लगाम? सीजेआई ने बताया
क्या याचिका पूरी तरह खारिज हुई?
हालांकि, न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने याचिका को पूरी तरह खारिज नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार और याचिकाकर्ता, दोनों को इस मामले में अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया।
कब होगी अगली सुनवाई?
गुरुवार को अदालत के आदेश के अनुसार, राज्य सरकार को अगले चार सप्ताह के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ता को राज्य सरकार का हलफनामा दाखिल होने के दो सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करना होगा। इस मामले पर छह सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी। इसके बाद अदालत को दोनों पक्षों के हलफनामे मिल जाएंगे।
क्या वार्डों के पुनर्गठन का फैसला बदलेगा?
पश्चिम बंगाल में सात शहरी निकायों के चुनाव इस साल दिसंबर में होने की संभावना है। इनमें कोलकाता नगर निगम (केएमसी) भी शामिल है। इन चुनावों से पहले वार्डों के पुनर्गठन को लेकर अड़चनें सामने आई थीं। कई लोगों को लगा था कि गुरुवार की सुनवाई के बाद यह गतिरोध खत्म हो जाएगा। लेकिन अदालत ने फिलहाल मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में वार्डों के पुनर्गठन का फैसला फिलहाल लागू रहेगा।
परिसीमन पर याचिकाकर्ता ने क्या सवाल उठाए?
परिसीमन को चुनौती देने वाली याचिका में दावा किया गया था कि वार्डों की सीमाएं दोबारा तय करते समय उचित बदलाव नहीं किए गए। इसमें यह भी कहा गया था कि परिसीमन की प्रक्रिया में वार्डों की आबादी, भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक एकरूपता जैसे पहलुओं पर ठीक से विचार नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने परिसीमन के पीछे के तर्क पर भी सवाल उठाया था।
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परिसीमन के मसौदा प्रस्ताव के अनुसार, केएमसी में वार्डों की संख्या बढ़ाई जानी है। इसे मौजूदा 144 से बढ़ाकर 209 किया जाना है।
याचिका में क्या आरोप लगाए गए?
इस महीने की शुरुआत में कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इसमें परिसीमन प्रस्तावों के आधार को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि परिसीमन की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार नहीं की गई।
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गुरुवार को न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की पीठ में इस मामले पर सुनवाई हुई। सुनवाई के अंत में उनकी पीठ ने फिलहाल इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया।
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क्या याचिका पूरी तरह खारिज हुई?
हालांकि, न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने याचिका को पूरी तरह खारिज नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार और याचिकाकर्ता, दोनों को इस मामले में अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया।
कब होगी अगली सुनवाई?
गुरुवार को अदालत के आदेश के अनुसार, राज्य सरकार को अगले चार सप्ताह के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ता को राज्य सरकार का हलफनामा दाखिल होने के दो सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करना होगा। इस मामले पर छह सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी। इसके बाद अदालत को दोनों पक्षों के हलफनामे मिल जाएंगे।
क्या वार्डों के पुनर्गठन का फैसला बदलेगा?
पश्चिम बंगाल में सात शहरी निकायों के चुनाव इस साल दिसंबर में होने की संभावना है। इनमें कोलकाता नगर निगम (केएमसी) भी शामिल है। इन चुनावों से पहले वार्डों के पुनर्गठन को लेकर अड़चनें सामने आई थीं। कई लोगों को लगा था कि गुरुवार की सुनवाई के बाद यह गतिरोध खत्म हो जाएगा। लेकिन अदालत ने फिलहाल मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में वार्डों के पुनर्गठन का फैसला फिलहाल लागू रहेगा।
परिसीमन पर याचिकाकर्ता ने क्या सवाल उठाए?
परिसीमन को चुनौती देने वाली याचिका में दावा किया गया था कि वार्डों की सीमाएं दोबारा तय करते समय उचित बदलाव नहीं किए गए। इसमें यह भी कहा गया था कि परिसीमन की प्रक्रिया में वार्डों की आबादी, भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक एकरूपता जैसे पहलुओं पर ठीक से विचार नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने परिसीमन के पीछे के तर्क पर भी सवाल उठाया था।