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West Bengal: हाईकोर्ट से ममता सरकार को झटका; बेरोजगार ग्रेड सी-डी स्कूल कर्मचारियों को आर्थिक मदद देने से रोका

Fri, 20 Jun 2025 12:35 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 20 Jun 2025 12:35 PM IST
सार

न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने प्रत्येक प्रभावित ग्रुप-सी कर्मचारी को 25,000 रुपये और प्रत्येक ग्रुप-डी कर्मचारी को 20,000 रुपये का भुगतान करने के राज्य के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतरिम आदेश पारित किया। अदालत ने 9 जून को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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Cal HC restrains WB govt from giving monetary support to 'jobless' Gr C and D school employees
कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार को 26 सितंबर तक गैर-शिक्षण कर्मचारियों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की योजना को लागू करने से रोक दिया है। कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद अपनी नौकरी खो दी थी, जिसमें चयन प्रक्रिया को गलत ठहराया गया था। हाईकोर्ट ने 9 जून को उन याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिनमें राज्य द्वारा ग्रुप सी के प्रत्येक कर्मचारी को 25,000 रुपये और ग्रुप डी के प्रत्येक कर्मचारी को 20,000 रुपये का भुगतान करने का विरोध किया गया था।

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हाईकोर्ट ने क्या कहा?
अंतरिम आदेश में न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने राज्य सरकार को 26 सितंबर तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, गैर-शिक्षण कर्मचारियों को आर्थिक राहत प्रदान करने की योजना को आगे बढ़ाने से रोक दिया है। उन्होंने राज्य सरकार को चार सप्ताह में याचिकाकर्ताओं की दलीलों के विरोध में अपना हलफनामा दाखिल करने और उसके बाद एक पखवाड़े के भीतर याचिकाकर्ताओं की ओर से जवाब देने का निर्देश दिया।
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क्या है मामला?
पश्चिम बंगाल सरकार ने समूह सी और डी श्रेणियों में गैर-शिक्षण कर्मचारियों के संकटग्रस्त परिवारों को मानवीय आधार पर सीमित आजीविका, सहायता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक योजना शुरू की थी। इन कर्मचारियों को पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग की ओर से आयोजित 2016 की चयन प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती किया गया था।
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सुप्रीम के आदेश पर गई थी नौकरी
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूलों के लगभग 26,000 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले पर अपनी नौकरी खो दी थी। कोर्ट ने 2016 की चयन प्रक्रिया को भ्रष्ट पाया गया।


सियासत भी तेज
तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को कोर्ट के फैसला के प्रति अपना सम्मान दोहराया, लेकिन विपक्षी दलों की ओर से 2016 की भर्ती प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद अपनी नौकरी खोने वाले हजारों गैर-शिक्षण कर्मचारियों को कथित रूप से मानवीय राहत देने से इनकार करने के लिए कड़ी आलोचना की और इस कदम को अमानवीय बताया।

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