कैबिनेट के फैसलेः आशा सेविकाओं का यात्रा भत्ता बढ़ा और बहराइच-खलीलाबाद के बीच रेल लाइन को मंजूरी
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केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को कई फैसले लिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने आयुष्मान भारत योजना को प्रोत्साहन देने के लिये आशा सेविकाओं का निगरानी यात्रा भत्ता बढ़ा दिया है। आशा सेविकाओं को अब 5000 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये प्रति माह निगरानी यात्रा भत्ता दिया जाएगा। इस प्रस्ताव अनुमोदन मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने किया है।
कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि अक्टूबर 2018 से आशा सेविकाओं को निगरानी यात्रा भत्ते के तौर पर 250 रुपये प्रति यात्रा की जगह पर 300 रुपये प्रति यात्रा दिये जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रत्येक आशा सेविकाएं हर महीने करीब 20 निगरानी यात्राएं करती हैं। इसके लिए उन्हें अभी तक 5000 रुपये तक प्रति माह निगरानी यात्रा भत्ता मिल रहा था जो अब 6000 रुपये तक हो जाएगा।
कैबिनेट ने यह मंजूरी 2018-19 से 2019-20 तक के लिये दी है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में आशा सेविका सुविधा प्रदाता है। इसलिए इस कदम इन सेविकाओं का मनोबल बढ़ेगा और वे अपना काम और बेहतर तरीके से कर पाएंगी। बता दें कि इस फैसले से 46.95 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार केंद्र सरकार पर आएगा।
यूपी में बहराइच-खलीलाबाद के बीच नई रेल लाइन को मंजूरी
केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में बहराइज और खलीलाबाद के बीच नई रेल लाइन को मंजूरी दे दी है। 240.26 किलोमीटर की ब्राड गेज लाइन 2024-25 तक बनकर तैयार हो जाएगी। यह रेल लाइन भींगा, श्रावस्ती, बलरामपुर, उतरौला, डुमरियागंज, मेहदावल और बंसी से होकर गुजरेगी। रेलवे ने इस लाइन को तैयार करने केलिए अनुमानित लागत 4939.78 करोड़ रुपये आके है। यह रेल लाइन बहराइच-खलीलाबाद के बीच वैकल्पिक रेल मार्ग के साथ ही सीमावर्ती जिलों को भी एक दूसरे से जोड़ेगी। बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, सिद्घार्थ नगर और संत कबरनगर जिला केविकास में सहयोग करेगा। रेलवे लाइन के निर्माण कार्य के दौरान रोजगार भी लोगों को मिलेगा। सरकार का दावा है कि करीब 58 लाख मानव दिन के बराबर रोजगार सृजित होगा।
बेनामी संपत्ति कानून में निपटारा प्राधिकार और अधिकरण मंजूर
केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध अधिनियम के तहत निपटारा प्राधिकार के गठन और अपीलीय अधिकरण की स्थापना को मंजूरी प्रदान कर दी। इसके तहत तीन अतिरिक्त खंडपीठों के साथ निपटारा प्राधिकार का गठन किया जाएगा। साथ ही अपीलीय अधिकरण की स्थापना की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने बेनामी संपत्ति कानून (पीबीपीटी) 1988 के तहत निपटारा प्राधिकार के गठन और अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना मंजूरी प्रदान की। निपटारा प्राधिकार की खंडपीठों और अपीलीय अधिकरणों को अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण उपलब्ध कराए जाएंगे।
आयकर विभाग तथा केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) में समान स्तर तथा रैंक वाले मौजूदा पदों का उपयोग करके इसमें रिक्तियों को पूरा किया जाएगा। कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि प्राधिकार और अपीलीय अधिकरण दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में होंगे। जबकि निपटारा प्राधिकार की खंडपीठ कोलकाता, मुम्बई और चेन्नई में हो सकती है। प्रस्तावित निपटारा प्राधिकार के अध्यक्ष के साथ सलाह-मशविरा करने के बाद ही इस बारे में आवश्यक अधिसूचना जारी की जाएगी।
कानपुर समेत विभिन्न स्थानों पर खुलेंगे कौशल केंद्र
कैबिनेट ने बुधवार को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से देश के विभिन्न स्थानों में भारतीय कौशल संस्थान स्थापित करने के लिए मंजूरी दे दी है। सरकार के मुताबिक, उपलब्ध आधारभूत संरचना और मांग के आधार पर ऐसे संस्थान खोले जाने की संभावनाओं का पता लगाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और रविशंकर प्रसाद ने बताया कि कौशल विकास संस्थान के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले कौशल प्रशिक्षण, अनुसंधानपरक शिक्षा तथा उद्योग जगत से व्यावहारिक तरीके से सीधे जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
कानपुर समेत विभिन्न स्थानों पर ऐसे संस्थान खोलकर भारतीय अर्थव्यवस्था के मुख्य क्षेत्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के सक्षम बनाया जाएगा। प्रसाद ने कहा कि निजी क्षेत्र के फायदों और भूमि के रूप में सरकारी पूंजी के माध्यम से इस योजना के तहत विशेषज्ञता, ज्ञान और प्रतिस्पर्धी क्षमता वाले नये संस्थान स्थापित किए जा सकेंगे। गौरतलब है कि सरकार का जोर कौशल विकास के जरिए रोजगार को बढ़ावा देने पर है, जिसके लिए नीति आयोग द्वारा संस्थान खोलने की सिफारिश पहले भी की गई थी।