जीएसटी के लिए 2,256 करोड़ रुपये की 'सक्षम' परियोजना मंजूर
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सरकार ने केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) की सक्षम परियोजना को मंजूरी दे दी है। इसके जरिए देशभर में अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के लिए एक नया नेटवर्क तैयार किया जाना है जिससे वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू करने में भी सहायता मिलेगी। यही नहीं, इससे भारतीय सीमा शुल्क विभाग के आईटी तंत्र को भी मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई मंत्रिमंडल के आर्थिक मामलों की कमेटी की बैठक में इस आशय का फैसला लिया गया। बैठक के बाद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि करीब 2,256 करोड़ रुपये की लागत से लागू होने वाली इस परियोजना से देशभर में वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली को लागू करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा कस्टम विभाग के सिंगल विंडो इंटरफेस फोर फेसिलिटेटिंग ट्रेड (स्विफ्ट) का दायरा बढ़ाने में भी इस परियोजना से मदद मिलेगी। इसके अलावा डिजिटल इंडिया के तहत उठाए गए कदमों और ईज आफ डूइंग बिजनेस के प्रयासों को भी बढ़ावा मिलेगा।
केंद्र सरकार से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जुड़ेंगे
उल्लेखनीय है कि सरकार ने आगामी एक अप्रैल से देश भर में जीएसटी प्रणाली को लागू करने का संकल्प व्यक्त किया है। सक्षम परियोजना से देशभर के राज्य सरकारों के अप्रत्यक्ष कर तंत्र को एक केंद्रीय पोर्टल से जोड़ा जाएगा ताकि पूरे देश में इस कर प्रणाली को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।
इस समय केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के तहत करीब 36 लाख करदाता जुड़े हुए हैं। माना जा रहा है कि जीएसटी प्रणाली लागू होने के बाद केंद्रीय स्तर पर बनने वाली प्रणाली से 65 लाख करदाता जुड़ जाएंगे। यही नहीं, जीएसटी प्रणाली में राज्यों के वाणिज्यिक कर विभाग भी अन्य राज्यों के साथ साथ केंद्र सरकार से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जुड़ेंगे। इसके लिए मजबूत तंत्र की आवश्यकता पड़ेगी। इसे ध्यान में रख कर ही सक्षम परियोजना को डिजाइन किया गया है।
उल्लेखनीय है कि सीबीईसी का वर्तमान आईटी तंत्र वर्ष 2008 में बनाया गया था। तब से अब तक अप्रत्यक्ष कर के असेसी और करदाताओं की संख्या में कई गुने की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके बाद सीबीईसी ने कस्टम विभाग के लिए स्विफ्ट प्रणाली को लागू किया ताकि कस्टम क्लियरेंस का कार्य तेजी से हो सके।
तास-यूरियाख तेल क्षेत्र में हरी झंडी
सरकार ने ऑयल इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑयल कारपोरेशन और भारत पेट्रो रिसोर्स लिमिटेड के कंसोर्टियम को रूस के वेंकरनेफ्ट तेल क्षेत्र में 23.9 फीसदी एवं तास-यूरियाख तेल क्षेत्र में 29.9 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट के आर्थिक मामलों की कमेटी की बैठक में यह फैसला हुआ। यह हिस्सेदारी रूस की सरकारी कंपनी रोजनेफ्ट ऑयल कंपनी से खरीदी जाएगी।
इस अधिग्रहण से भारतीय तेल कंपनियों को कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ेगी। कंसोर्टियम को वेंकरनेफ्ट तेल क्षेत्र में हिस्सेदारी लेने के लिए 202 करोड़ डॉलर और तास-यूरियाख तेल क्षेत्र में 124 करोड़ डॉलर का भुगतान करना होगा।