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Matua Community: CAA के तहत भारतीय नागरिकता अभी नहीं, दस्तावेजों की कमी के कारण फिलहाल आवेदन न करने की सलाह
Tue, 19 Mar 2024 07:46 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 19 Mar 2024 07:46 PM IST
सार
मतुआ समुदाय के शीर्ष संगठन ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता का आवेदन न करने की सलाह दी है। बता दें कि गृह मंत्रालय ने सीएए के तहत नागरिकता कानून के नियम अधिसूचित कर दिए हैं। अब पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यक भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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नागरिकता संशोधन कानून के तहत भारतीय नागरिकता के लिए मतुआ समुदाय को करना होगा इंतजार
- फोटो : amar ujala graphics
विस्तार
केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत तीन पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का एलान किया है। हालांकि, मतुआ समुदाय के लोगों को नई सरकार के गठन तक नागरिकता का आवेदन न करने की सलाह दी गई है। बता दें कि चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक 6 जून, 2024 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी है। इसका मतलब अगले लगभग ढाई महीने तक मतुआ समुदाय के लोग सीएए के तहत नागरिकता का आवेदन नहीं कर सकते। सलाह सरकार की तरफ से नहीं, मतुआ समुदाय के शीर्ष संगठन की तरफ से दी गई है।
भारतीय नागरिकता का आवेदन न करने की सलाह क्यों?
मतुआ समुदाय मूल रूप से बांग्लादेश से जुड़ा है। प्रमुख मतुआ संगठन का मानना है कि समुदाय के लोगों के पास बांग्लादेश में पिछला आवासीय पता, भारत में प्रवेश की तारीख और नागरिकता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं है। ऐसे में फिलहाल सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन नहीं करना चाहिए। अखिल भारतीय मतुआ महासंघ ने अपनी सलाह में कहा है कि सदस्यों को केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद ही भारतीय नागरिकता का आवेदन करना चाहिए।
मतुआ मूल रूप से पूर्वी पाकिस्तान में रहते थे। हिंदुओं का यह कमजोर वर्ग विभाजन के दौरान बांग्लादेश निर्माण के बाद धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आ गया। अखिल भारतीय मतुआ महासंघ के महासचिव महितोष बैद्य ने कहा, समुदाय के सभी सदस्यों को अगली सरकार के गठन तक नागरिकता के लिए आवेदन न करने' के लिए संदेश भेजा गया है। उन्होंने बताया, नियम अधिसूचित होने के बाद, मतुआ समुदाय के कई सदस्यों ने ऑनलाइन आवेदन भरने का प्रयास किया। हालांकि, कॉलम 5 भरते समय, उनसे पते के प्रमाण या बांग्लादेश में उनके निवास से संबंधित दस्तावेजों का विवरण मांगा गया। कोई प्रमाण न होने की सूरत में उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ा। बता दें कि केंद्र सरकार ने ने सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए एक पोर्टल लॉन्च किया है।
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भारतीय नागरिकता का आवेदन न करने की सलाह क्यों?
मतुआ समुदाय मूल रूप से बांग्लादेश से जुड़ा है। प्रमुख मतुआ संगठन का मानना है कि समुदाय के लोगों के पास बांग्लादेश में पिछला आवासीय पता, भारत में प्रवेश की तारीख और नागरिकता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं है। ऐसे में फिलहाल सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन नहीं करना चाहिए। अखिल भारतीय मतुआ महासंघ ने अपनी सलाह में कहा है कि सदस्यों को केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद ही भारतीय नागरिकता का आवेदन करना चाहिए।
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मतुआ मूल रूप से पूर्वी पाकिस्तान में रहते थे। हिंदुओं का यह कमजोर वर्ग विभाजन के दौरान बांग्लादेश निर्माण के बाद धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आ गया। अखिल भारतीय मतुआ महासंघ के महासचिव महितोष बैद्य ने कहा, समुदाय के सभी सदस्यों को अगली सरकार के गठन तक नागरिकता के लिए आवेदन न करने' के लिए संदेश भेजा गया है। उन्होंने बताया, नियम अधिसूचित होने के बाद, मतुआ समुदाय के कई सदस्यों ने ऑनलाइन आवेदन भरने का प्रयास किया। हालांकि, कॉलम 5 भरते समय, उनसे पते के प्रमाण या बांग्लादेश में उनके निवास से संबंधित दस्तावेजों का विवरण मांगा गया। कोई प्रमाण न होने की सूरत में उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ा। बता दें कि केंद्र सरकार ने ने सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए एक पोर्टल लॉन्च किया है।
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