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2030 तक पांच लाख करोड़ डॉलर हो जाएगी भारतीय अर्थव्यवस्था

Thu, 20 Dec 2018 02:01 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Thu, 20 Dec 2018 02:01 AM IST
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By 2030 the Indian economy will become $ 5 trillion
वित्तमंत्री अरुण जेटली

वर्ष 2030 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के उद्देश्य से नीति आयोग ने एक रणनीति दस्तावेज बनाया है। इसके सहारे आठ फीसदी से अधिक की विकास दर का लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा। इसे बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यहां जारी किया। स्ट्रेटेजी फॉर न्यू इंडिया @ 75 नाम से जारी इस रणनीति दस्तावेज में कहा गया है कि इसका अत्यधिक ध्यान उस वातावरण में सुधार करना है, जिसमें निजी निवेशक एवं अन्य हित धारक अपनी पूरी शक्ति से काम कर सकें। ऐसा होने पर ही भारत वर्ष 2022 तक के लिए जो नए भारत का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, वह प्राप्त हो सकेगा। इसके साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था वर्ष 2030 तक पांच लाख करोड़ डॉलर की हो सकेगी।

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नारों से नहीं, ठोस नीति से बनेगी बात

इस अवसर पर जेटली ने विपक्ष पर प्रहार करते हुए कहा कि सिर्फ नारों से गरीबी कम नहीं होती बल्कि इसके लिए एक ठोस नीति की जरूरत होती है। इसी के सहारे गरीबी भी दूर होगी और लोगों की आकांक्षा भी पूरी हो सकेगी। उनका कहना है कि नारों का जीवन क्षणिक है और लोगों को शीघ्र अहसास हो जाता है कि इसे पूरा नहीं किया जा सकता। इस पर एक स्पष्ट बहस भी है कि क्या ठोस नीति से लोगों का अधिक लाभ होता है या नारों से।
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उनका कहना है कि लोकतंत्र में हमेशा से ही यह बहस का विषय रहा है। महत्वाकांक्षी लोग, जिनके पास उच्च स्तर की आकांक्षा है और बहुत कम स्तर का धैर्य है, अब नारे को वास्तविकता में बदलने में असमर्थता के बारे में दो या तीन दिन में बता देंगे। हालांकि उन्होंने कहा कि ठोस नीति हमेशा ही अर्थव्यवस्था को पटरी पर बनाये रखेगी। इससे लोगों को गरीबी के दलदल से बाहर करने में मदद मिलेगी और उन्हें जीवन की बेहतर गुणवत्ता प्रदान करेगी।
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उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बीते मंगलवार को कहा था कि उनकी पार्टी और अन्य विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मजबूर करेंगे कि वह किसानों का ऋण माफ करें। उन्होंने कहा था कि यदि मोदी सरकार अभी ऐसा करने में विफल रहती है तो कांग्रेस 2019 के आम चुनाव के बाद ऐसा करेगी।

कृषि समस्याओं का निदान नहीं है कर्ज माफी

By 2030 the Indian economy will become $ 5 trillion

कर्ज माफी के मुद्दे पर नीति आयोग ने कहा कि ऐसे कदम से सिर्फ कुछ किसानों की सहायता होती है और यह कृषि संकट को कम करने का कोई समाधान नहीं है। नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि यह कदम समाधान नहीं बल्कि  एक अस्थायी निदान है। वहीं आयोग के सदस्य रमेश चंद्र ने कुमार का समर्थन करते हुए कहा कि गरीब राज्यों में महज 10-15 फीसदी किसानों को ही कर्ज माफी से फायदा हुआ है, ऐसे राज्यों में कुछ किसानों को संस्थागत कर्ज मिलता है। वहीं कई राज्यों में 25 फीसदी से भी कम किसान संस्थागत कर्ज का लाभ उठा पाते हैं।

श्रम क्षेत्र में चौतरफा सुधार से बनेगी बात

दस्तावेज में श्रम सुधारों को पूरा करने, महिला कार्यबल की भागीदारी बढ़ाने, न्यूनतम मजदूरी लागू करने, रोजगार आंकड़ों के संग्रह में सुधार तथा सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने का सुझाव दिया है। आयोग ने प्रोत्साहन, संगठित रूप देने के लिए औद्योगिक संबंधों को आसान बनाने पर बल दिया और कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी बेहतर गतिविधियों के अनुरूप नौकरी से हटाने पर मुआवजा (सेवरेंस पे) बढ़ाया जाना चाहिए। इसके साथ ही आयोग ने विवादों को निष्पक्ष और कम लागत पर निपटाने के लिए श्रम विवाद समाधान प्रणाली में भी सुधार लाने पर जोर दिया।

स्कूलों में आए वित्तीय साक्षरता पाठ

नीति आयोग ने वित्तीय समावेश को प्रोत्साहन देने के लिए बैंकिंग कोरेस्पॉन्डेंट को बेहतर भुगतान, पेपरलेस बैंकिंग को बढ़ावा देने के साथ स्कूल पाठ्यक्रम में वित्तीय साक्षरता से जुड़े अध्यायों को जोड़ने के लिए कहा। साथ ही निम्न आय वर्ग व छोटे अनौपचारिक कारोबारों के बीच वित्तीय साक्षरता की कमी, बैंकिंग सेवाओं की ऊंची लागत के साथ बाजार में प्रवेश के लिए व उत्पादों पर अत्यधिक नियामक आवश्यकताएं भारत के वित्तीय समावेश के लिए बड़ी बाधाएं हैं। सरकार ने वित्तीय समावेश को बढ़ाने व गरीबों को वित्तीय सुरक्षा मुहैया कराने के लिए तमाम स्कीम लांच की हैं। 

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