Budget 2023: आयुष में होंगे अब बहुत शोध, कोविड के बाद रिसर्च की दुनिया में बजेगा भारत का डंका
Budget 2023: चिकित्सा स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों का मानना है कि कोविड जैसी गंभीर बीमारी ने चिकित्सा स्वास्थ्य के क्षेत्र में न सिर्फ सोचने समझने का सरकारों का नजरिया बदला है, बल्कि उस दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्धता भी दिख रही है...
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कोरोना काल में जिस तरीके से भारत ने वैक्सीन डेवलप कर चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति की उसी का असर है कि 2023 के बजट में स्वास्थ्य के क्षेत्र में रिसर्च पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया है। चिकित्सा स्वास्थ्य क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरीके से सरकार ने अपने बजट में न सिर्फ सरकारी बल्कि प्राइवेट मेडिकल इंस्टिट्यूशन को रिसर्च के लिए आगे आने का रास्ता दिखाया है, उससे आने वाले दिनों में दुनिया की गंभीर से गंभीर बीमारियों और उसका इलाज ढूंढने में मदद होगी। इसके अलावा नर्सिंग कॉलेजेस के शुरू होने से पैरामेडिकल स्टाफ की कमी दूर होगी। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि कोरोना काल के बाद में मेडिकल की फील्ड में शोध की बहुत आवश्यकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक फार्मास्युटिकल रिसर्च और आईसीएमआर की लैब के साथ होने वाले अलग-अलग तरह के शोधों में न सिर्फ एलोपैथी चिकित्सा शामिल होगी, बल्कि आयुर्वेद को भी उस में महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। इस बजट में हेल्थ रिसर्च के लिए पिछले बजट की तुलना में आठ फ़ीसदी ज्यादा बजट बढ़ाया गया है। जबकि आयुष के लिए बजट में पिछले बजट की तुलना में तकरीबन 20 फीसदी बढ़ाया गया है। पिछले साल आयुष के लिए यह बजट 3050 करोड़ था, जो इस साल बढ़कर 3647 करोड़ किया गया है। हालांकि 2021-22 के बजट की तुलना में आयुष के लिए तकरीबन डेढ़ हजार करोड़ रुपये ज्यादा बजट जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि आयुष को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने न सिर्फ बजट बढ़ाया है, बल्कि आयुष की सभी विधाओं में ज्यादा से ज्यादा एविडेंस बेस्ड रिसर्च कर लोगों को गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए आगे आने का रास्ता भी दिया है।
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि बजट को अगर पूरी तरीके से एक शब्द में समाहित किया जाए, तो चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह रिसर्च और डेवलपमेंट का अब तक का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बजट है। वरिष्ठ चिकित्सा वैज्ञानिक और इंडियन सोसायटी फॉर माइक्रोबायोलॉजी के पूर्व प्रेसिडेंट प्रोफेसर ए चक्रवर्ती कहते हैं कि कोविड में तरीके से हमारे वैज्ञानिकों ने शोध करके वैक्सीन को डेवलप किया। जिस वैक्सीन को पूरी दुनिया में सफलता मिली, उसी का यह नतीजा है कि केंद्र सरकार अपने देश के वैज्ञानिकों की क्षमता को आगे एक नए स्तर पर पहुंचाने का प्रयास कर रही है। प्रोफेसर चक्रवर्ती का कहना है कि वे आईसीएमआर की प्रयोगशालाओं के माध्यम से सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि उन प्राइवेट चिकित्सा संस्थानों के सहयोग से भी होगा जो देश के चिकित्सा स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इंडियन फार्मास्युटिकल एसोसिएशन से जुड़े संजीव गोयल कहते हैं कि देश का यह बजट फार्मास्युटिकल रिसर्च को बूस्ट करने वाला है। उनका कहना है कि जो भी नए प्रोग्राम्स फार्मास्युटिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए शुरू होने वाले हैं, उससे सिर्फ गंभीर बीमारियों की दवाओं का विकास करने में ही नहीं, बल्कि उनको एक नए स्तर तक पहुंचाने के लिए मदद मिलेगी। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर) से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर सुरेंद्र कोहली कहते हैं कि अभी भी देश के नाइपर फार्मास्युटिकल रिसर्च तो बहुत होती है। लेकिन नए प्रोग्राम के साथ रिसर्च और उसके पेटेंट से देश में हमारे वैज्ञानिकों की ईजाद की हुई दवाओं और उनके फॉर्मूले से पूरी दुनिया को गंभीर बीमारियों से छुटकारे में मदद मिलेगी। अभी भी देश के सभी नाइपर में हर तरीके की डेवलपमेंट को लेकर रिसर्च हो रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि फार्मास्युटिकल रिसर्च के लिए मिलने वाले बजट की बढ़ोतरी से निश्चित तौर पर ड्रग डेवलपमेंट के क्षेत्र में बहुत बड़ा परिवर्तन और बड़ी क्रांति होने वाली है।
चिकित्सा स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों का मानना है कि कोविड जैसी गंभीर बीमारी ने चिकित्सा स्वास्थ्य के क्षेत्र में न सिर्फ सोचने समझने का सरकारों का नजरिया बदला है, बल्कि उस दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्धता भी दिख रही है। आईसीएमआर से जुड़े एक वरिष्ठ वैज्ञानिक मानते हैं कि आईसीएमआर लैब के माध्यम से सरकारी और निजी संयुक्त चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देने की योजना निश्चित तौर पर देश के चिकित्सा क्षेत्र में बहुत बड़ी उपलब्धियां हासिल करने वाली है। देश के पूर्व महामारी विशेषज्ञ डॉक्टर समीरन पांडा कहते हैं कि गंभीर बीमारियों में एलोपैथी या आयुष के माध्यम से दूर की जाने वाली बीमारियों में शोध और नए ड्रग डेवलपमेंट से ना सिर्फ हमारे वैज्ञानिकों का नाम ऊंचा होगा, बल्कि पूरी दुनिया को गंभीर बीमारियों के खतरों से भी बचाया जा सकेगा। वह कहते हैं कि हमारे वैज्ञानिकों ने कोविड दौर में वैक्सिंग को डिवेलप सर पूरे विश्व को एक नई राह दिखाई है।
अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ के प्रमुख मंगेश त्रिवेदी कहते हैं कि आयुष की सभी विधाओं में अगर बेहतर तरीके से शोध किया जाए, तो पूरी दुनिया में हमारी पुरातन चिकित्सा पद्धति को एक बड़े आयाम के साथ विस्तार भी मिलेगा और गंभीर से गंभीर बीमारियों से निजात भी मिलेगी। उनका कहना है कि इस बजट में शोध के लिए जिस तरीके का प्रोत्साहन दिया गया है, उससे न सिर्फ एलोपैथी बल्कि हमारी पुरातन चिकित्सा पद्धति को विश्व स्तर पर बीमारियों को दूर करने के लिहाज से एक बड़ी पहचान मिलने वाली है।