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बजट 2017: यात्री किराया न बढ़ाकर राहत दे सकता है रेलवे

Tue, 31 Jan 2017 02:55 AM IST
नवनीत शरण/ अमर उजाला, नई दिल्ली
नवनीत शरण/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 31 Jan 2017 02:55 AM IST
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Budget 2017 : railway can Give relief to passengers

कल बुधवार को आम बजट पेश कर दिया जाएगा। हर साल की तरह इस साल रेलवे का अपना अलग से कोई बजट नहीं होगा। ना ही संसद में रेल बजट पर केंद्रीय रेल मंत्री का भाषण होगा। आम बजट के साथ ही अन्य मंत्रालयों की तरह रेलवे बजट भी पेश किया जाएगा। लिहाजा आम लोगों को रेलवे की योजनाओं से अवगत होने का मौका इस साल कम ही मिलेगा। 

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ना तो इस बात की ही जानकारी लोगों को मिलने की उम्मीद है कि रेलवे उन्हें क्या सुविधा देने जा रहा है। वर्ल्ड क्लास व आदर्श स्टेशन बनाने के लिए किस नये स्टेशन को शुमार किया गया, किस रूट पर कौन से नई ट्रेन चलेगी। किस रूट की ट्रेन को विस्तार दिया गया है और कहा ठहराव मिला है। यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं में क्या नया मिला इसकी भी जानकारी नहीं मिल पाएगी। 
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अलग से रेल बजट नहीं आने से भले ही रेलवे की योजना से आम लोग पहले की तरह अवगत नहीं हो पाएंगे लेकिन अगामी बजट में इतना तय माना जा रहा है कि यात्रा किराये का बोझ फिलहाल नहीं बढ़ेगा। क्योंकि इस बार रेलवे मंत्रालय ने यात्रा किराए में बढ़ोतरी का प्रपोजल वित्त मंत्रालय को नहीं दिया है। हालांकि यह वित्त मंत्रालय के ऊपर निर्भर है कि आम बजट में रेलवे संबंधित बजट में क्या घोषणाएं करती है। पहली बार आम बजट में रेल बजट शामिल होने से जाहिर है कि रेल बजट को ज्यादा अहमियत तो नहीं मिलेगी लेकिन दो दिन के भीतर पिंक बुक में रेल बजट का वर्गीकरण देखा जा सकेगा। 

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आगामी बजट में रेलवे सेफ्टी फंड की घोषणा की जा सकती है

Budget 2017 : railway can Give relief to passengers

हालांकि उम्मीद है कि रेल दुर्घटना रोकने के लिए सरकार रेल सुरक्षा पर आम बजट में अलग से कोई प्रावधान करे। राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष में अगले पांच साल के लिए एक लाख करोड़ रुपये फंड की घोषणा की जाए। यानी हर साल 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया जा सकता है। आगामी बजट में रेलवे सेफ्टी फंड की घोषणा की जा सकती है। दावा किया जा सकता है कि भारतीय रेल को जीरो एक्सीडेंट रेल बनाया जाएगा। 

आगामी बजट में रेलवे को मजबूत करने के लिए सरकार कोशिश करेगी कि देश में यात्री गाडिय़ों की तर्ज पर ही मालगाडिय़ों को भी टाइम टेबल चले। इसके लिए डेडिकेटेड रेल फ्रेट कॉरिडोर के काम को जल्द पूरा करने के लिए अधिक फंड जारी किया जा सकता है। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स को मजबूत करने के कई कदम उठाने के लिए भी बजट में अलग से प्रावधान होने की उम्मीद है। हाई स्पीड ट्रेन चलाने को लेकर 22 हजार करोड़ रुपया बजट में प्रावधान हो सकता है। 

ट्रैक टूटने की लगातार हो रही घटना को देखते हुए रेल मंत्रालय ने वर्ष 2017-18 के लिए दो हजार करोड़ रुपये का बजट तैयार किया है। इस बजट से ट्रैक मेन्टेन्स से जुड़ी 205 मशीनें खरीदी जाएंगी। साथ ही 6 अल्ट्रासोनिक फ्लो डिटेक्शन मशीनें भी खरीदी जाएंगी। जिससे ट्रैक की पूरी स्कैनिंग हो जाएगी कि कहीं दरार तो नहीं है। इस तरह की मशीनें अभी तक जापान, स्पेन, इंग्लैंड जैसे देशों में ही हैं। 

इंटिग्रेटेड ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर सरकार का फोकस

Budget 2017 : railway can Give relief to passengers
क्या कहते है एक्सपर्ट
रेलवे बोर्ड के पूर्व मेंबर ट्रैफिक वीनू माथुर ने कहा कि रेलवे का अलग से बजट नहीं होने से भले ही इस बार का रेल बजट लोकलुभावन नहीं होगा, लेकिन आम बजट के साथ रेल बजट के पेश होने से निश्चित ही रेलवे को फायदा मिलेगा। पिछले साल देखा गया कि रेलवे का ट्रैफिक नहीं बढ़ा। इस साल सरकार इसकी जिम्मेदारी ले रही है। रेलवे को अब सरकार रास्ता दिखाएगी।

यात्रा किराया नहीं बढने से रेलवे को हर साल करीब 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। अब फंड की जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर होगी। लोकलुभावन बजट पेश होने का नतीजा यह हुआ है कि फ्रेट पर इसका भार बढ़ता चला गया। 

बजट भाषण में कम पिंक बुक से मिलेगी ज्यादा जानकारी
उत्तर रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक एके पूठिया ने कहा, रेल बजट को आम बजट में मर्ज कर दिए जाने से आम लोगों को फायदा होगा। ऐसा नहीं है कि उन्हें रेलवे की योजनाओं से अवगत होने का मौका नहीं मिलेगा। रेलवे के लिए जारी होने वाले पिंक बुक में योजनाओं की जानकारी मिलेगी। सभी जोन की तरफ से रेलवे बोर्ड को योजना सौंपी गई है। रेलवे के लए जो भी वर्क सेंक्शन होगा उसकी जानकारी वेब साइट पर मिलेगी। आम जनता के लिए इस बार का बजट बेहतर होने की उम्मीद है। रेल सेफ्टी पर भी बजट में विशेष प्रावधान रहने की उम्मीद है।

इंटिग्रेटेड ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर सरकार का फोकस
आम बजट के साथ रेलवे बजट को पेश किए जाने के पीछे यह माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट सिस्टम की कवायद में है। आमतौर पर होता यह है कि रोड परिवहन व रेल परिवहन की व्यवस्था एक ही जगह पर होती है। जबकि होना यह चाहिए कि जहां रोड परिवहन विकसित किया जा रहा है वहां रेल परिवहन पर ज्यादा जोर नहीं दिया जाना चाहिए। आम बजट में रेल बजट समाहित होने से केंद्र सरकार इंटिग्रटेड ट्रांस्रपोर्ट सिस्टम को विकसित कर सकती है। यह भी संभव है कि जहां रेलवे का पुल बन रहा हो वहां रोड परिवहन का पुल भी साथ में विकसित कर दिया जाए।
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