51 साल के इतिहास में बीएसएफ को मिली पहली महिला कॉम्बेट अधिकारी
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इतिहास रचते हुए राजस्थान की तनुश्री पारीक (25) कॉम्बेट (युद्ध) अधिकारी के तौर पर शनिवार को बीएसएफ का हिस्सा बन गईं। भारत की सरहद की निगहबानी करने वाले देश के सबसे बड़े अर्ध सैनिक बल के 51 साल के इतिहास में लड़ाकू भूमिका के लिए कमीशन पाने वाली वह पहली महिला हैं। उन्हें पंजाब में भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनाती मिली है। उनका पद असिसटेंट कमांडेंट का होगा।
बीकानेर की तनुश्री ने टेकनपुर में 67 प्रशिक्षु अधिकारियों की पासिंग आउट परेड का भी नेतृत्व किया। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने परेड की सलामी ली। तनुश्री यूपीएससी द्वारा 2014 में कराई गई अखिल भारतीय परीक्षा में अधिकारी के पद के लिए चयनित हुईं थीं। गृहमंत्री ने खुद तनुश्री के कंधे पर रैंक स्टार लगाए। बीएसएफ ने 2013 में पहली बार महिलाओं को बल में शामिल करना शुरू किया था।
‘बीएसएफ पहली रक्षा पंक्ति ही नहीं, पहली रक्षा दीवार भी है’
2.5 लाख जवानों वाले बल की पहली महिला ‘फील्ड अधिकारी’ की प्रशंसा करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि सरकार ने भारत की सीमाओं को मजबूत बनाने के लिए नया रोडमैप तैयार किया है। भारत की बांग्लादेश और पाकिस्तान सीमा को सील करने की योजना है। उन्होंने कहा कि बीएसएफ ने 73 आउट पोस्ट बनाई हैं, इनमें से अधिकतर का निर्माण हाल के समय में किया गया है।
कर्तव्य निभाते समय शहादत देने वाले बल के जवानों को याद करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि सरकार की योजना शहीद होने वाले जवानों के लिए एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र बनाने की है। उन्होंने कहा कि सेना के बाद बीएसएफ एकमात्र ऐसा बल है जो जल, नभ और थल में काम करता है। उन्होंने कहा, ‘बीएसएफ पहली रक्षा पंक्ति ही नहीं, पहली रक्षा दीवार भी है।’ 52 हफ्ते के कड़े प्रशिक्षण के बाद बल का हिस्सा बनने वाले 67 युवाओं में से 51 सीधे असिसटेंट कमांडेंट बनेंगे जबकि शेष अन्य को प्रमोशन के बाद अधिकारी रैंक मिलेगा।