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सुरक्षा बलों की बढ़ेगी ताकत: BSF ने विकसित किया टियर स्मोक लॉन्चर, उपद्रवियों को रोकने में हो सकता है इस्तेमाल
Fri, 02 Sep 2022 09:02 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 02 Sep 2022 09:02 PM IST
सार
बीएसएफ प्रवक्ता ने बताया कि इस नए सिस्टम का हाल ही में मध्य प्रदेश के टेकनपुर में प्रसिद्ध टियर स्मोक यूनिट में परीक्षण किया गया था और इसकी जानकारी बीएसएफ के डीजी की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित विशेष इकाई की वार्षिक शासी निकाय की बैठक में दी गई।
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टियर स्मोक लॉन्चर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सीमा सुरक्षा बल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि बीएसएफ द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़ने वाला ड्रोन सिस्टम विकसित किया गया है जिसका इस्तेमाल पुलिस प्रदर्शनकारियों और दंगाइयों को नियंत्रित करने के लिए कर सकती है।
उन्होंने कहा कि ड्रोन टियर स्मोक लॉन्चर का इस्तेमाल मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) या ड्रोन से इन गोले को लॉन्च करने के लिए किया जा सकता है और यह कानून व्यवस्था प्रबंधन डोमेन में काम कर रहे सुरक्षा बलों की ताकत को बढ़ाएगा।
बीएसएफ के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस नए सिस्टम का हाल ही में मध्य प्रदेश के टेकनपुर में प्रसिद्ध टियर स्मोक यूनिट (टीएसयू) में परीक्षण किया गया था और इसकी जानकारी बीएसएफ के महानिदेशक (डीजी) पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित विशेष इकाई की वार्षिक शासी निकाय की बैठक में दी गई।
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टीएसयू को 1976 में बीएसएफ के द्वारा स्थापित किया गया था। यह केंद्रीय व राज्य पुलिस बलों दोनों को आपूर्ति के लिए दंगा विरोधी आंसू गैस के हथियारों का विकास और निर्माण करता है। बीएसएफ को मुख्य रूप से पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ भारतीय सीमाओं की रक्षा के लिए तैनात किया जाता है। इसके अलावा यह देश की आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में कई तरह की भूमिका निभाती है।
बीएसएफ द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में हेक्साकॉप्टर ड्रोन के नीचे लगे धातु के पिंजरे में कसकर रखे गए आंसू गैस के कम से कम छह गोले दिखाई दे रहे हैं। ड्रोन सिस्टम निर्धारित स्थानों पर हवा से आंसू गैस के गोले गिराता है।
वहीं बीएसएफ के महानिदेशक ने बैठक के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलोंके लिए विभिन्न प्रकार के गैर-घातक हथियारों को लाने के लिए टीएसयू की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन वस्तुओं के स्वदेशी उत्पादन ने विदेशी हथियारों पर देश की निर्भरता को कम कर दिया है।
बीएसएफ के प्रवक्ता ने कहा कि टीएसयू विभिन्न प्रकार के लैक्रिमेटरी मूनिशन, फ्रैल-बैंग शेल, इम्पैक्ट मूनिशन और विशेष ऑपरेशन के लिए अनुकूलित उत्पाद भी तैयार करता है।
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उन्होंने कहा कि ड्रोन टियर स्मोक लॉन्चर का इस्तेमाल मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) या ड्रोन से इन गोले को लॉन्च करने के लिए किया जा सकता है और यह कानून व्यवस्था प्रबंधन डोमेन में काम कर रहे सुरक्षा बलों की ताकत को बढ़ाएगा।
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बीएसएफ के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस नए सिस्टम का हाल ही में मध्य प्रदेश के टेकनपुर में प्रसिद्ध टियर स्मोक यूनिट (टीएसयू) में परीक्षण किया गया था और इसकी जानकारी बीएसएफ के महानिदेशक (डीजी) पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित विशेष इकाई की वार्षिक शासी निकाय की बैठक में दी गई।
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टीएसयू को 1976 में बीएसएफ के द्वारा स्थापित किया गया था। यह केंद्रीय व राज्य पुलिस बलों दोनों को आपूर्ति के लिए दंगा विरोधी आंसू गैस के हथियारों का विकास और निर्माण करता है। बीएसएफ को मुख्य रूप से पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ भारतीय सीमाओं की रक्षा के लिए तैनात किया जाता है। इसके अलावा यह देश की आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में कई तरह की भूमिका निभाती है।
बीएसएफ द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में हेक्साकॉप्टर ड्रोन के नीचे लगे धातु के पिंजरे में कसकर रखे गए आंसू गैस के कम से कम छह गोले दिखाई दे रहे हैं। ड्रोन सिस्टम निर्धारित स्थानों पर हवा से आंसू गैस के गोले गिराता है।
वहीं बीएसएफ के महानिदेशक ने बैठक के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलोंके लिए विभिन्न प्रकार के गैर-घातक हथियारों को लाने के लिए टीएसयू की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन वस्तुओं के स्वदेशी उत्पादन ने विदेशी हथियारों पर देश की निर्भरता को कम कर दिया है।
बीएसएफ के प्रवक्ता ने कहा कि टीएसयू विभिन्न प्रकार के लैक्रिमेटरी मूनिशन, फ्रैल-बैंग शेल, इम्पैक्ट मूनिशन और विशेष ऑपरेशन के लिए अनुकूलित उत्पाद भी तैयार करता है।