ब्रिटेन ने पीएम मोदी को दिया G7 सम्मेलन का न्योता, शिखर सम्मेलन से पहले बोरिस जॉनसन आएंगे भारत
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जी-7 शिखर सम्मेलन में अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया है। जी-7 शिखर सम्मेलन इस बार कॉर्नवॉल में जून में आयोजित होगा। शिखर सम्मेलन में राष्ट्राध्यक्ष कोरोना वायरस महामारी, जलवायु परिवर्तन और मुक्त व्यापार जैसे वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन जी-7 से पहले भारत की यात्रा पर आ सकते हैं।
UK Prime Minister Boris Johnson has said he will visit India ahead of the G7 summit. He also said that as ‘pharmacy of the world’, India already supplies more than 50% of the world’s vaccines, and the UK and India have worked closely together throughout the pandemic. https://t.co/yyQWbVukf5
— ANI (@ANI) January 17, 2021विज्ञापन
कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई में भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग बढ़ने पर जोर देते हुए बयान में कहा गया कि दुनिया की फार्मेसी के रूप में भारत पहले से ही दुनिया को 50 प्रतिशत से ज्यादा वैक्सीन की आपूर्ति करता है। यूनाइटेड किंगडम और भारत ने कोरोना जैसी महामारी के दौरान एक साथ मिलकर काम किया है। हमारे प्रधानमंत्री लगातार बातचीत करते रहते हैं। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि जी-7 सम्मेलन से पहले वो भारत का दौरा करेंगे।
जी-7 शिखर सम्मेलन में दुनिया के सात प्रमुख देशों के नेता कोरोना वायरस संकट और जलवायु परिवर्तन से उबरने की चुनौतियों के लेकर चर्चा करेंगे। इस बार जी-7 के शिखर सम्मेलन में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को भी मेहमान के तौर पर बुलाया गया है। साथ ही ये भी सुनिश्चित करेंगे कि हर जगह लोग खुले व्यापार, तकनीकी परिवर्तन और वैज्ञानिक खोज से फायदा उठा सके।
बता दें कि इस साल गणतंत्र दिवस समारोह में बोरिस जॉनसन को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था, लेकिन ब्रिटेन में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार वृद्धि को देखते हुए उनका भारत दौरा रद हो गया।
क्या है जी-7?
जी-7 दुनिया की सात सबसे बड़ी विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है, जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। इसे ग्रुप ऑफ सेवन भी कहते हैं। शुरुआत में ये छह देशों का समूह था, जिसकी पहली बैठक 1975 में हुई थी, लेकिन एक साल बाद ही यानी 1976 में इस ग्रुप में कनाडा शामिल हो गया। हर एक सदस्य देश बारी-बारी से इस ग्रुप की अध्यक्षता करता है और सालाना शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है।