BRICS: ड्रग तस्करी के नए तौर-तरीकों पर ब्रिक्स देश सख्त, समुद्री-डिजिटल नेटवर्क के गलत इस्तेमाल पर जताई चिंता
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ब्रिक्स देशों ने गैर-कानूनी ड्रग तस्करी के बदलते स्वरूप, सिंथेटिक ड्रग्स, नए साइकोएक्टिव पदार्थों के बढ़ते प्रसार, प्रीकर्सर केमिकल्स के गलत इस्तेमाल, उभरती तकनीकों, वर्चुअल एसेट्स के दुरुपयोग, और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क द्वारा समुद्री रास्तों एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के गलत इस्तेमाल पर चिंता जताई है। मंगलवार को गुवाहाटी में संपन्न हुई ब्रिक्स देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक में भारत ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट से निपटने के लिए तेजी, भरोसे और बिना रुकावट रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग पर आधारित साझेदारी का आह्वान किया। ब्रिक्स देशों ने अवैध ड्रग तस्करी और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
बच्चों और युवाओं की सुरक्षा पर जोर
असम के गुवाहाटी में ब्रिक्स देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक के समापन पर, इन देशों ने एक संयुक्त घोषणा को अपनाया। इसमें राष्ट्रीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप जानकारी, खुफिया सूचनाओं और बेहतरीन तौर-तरीकों के समय पर आदान-प्रदान को बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया। घोषणा में गैर-कानूनी ड्रग तस्करी के खिलाफ कानून लागू करने और रेगुलेटरी प्रयासों को मज़बूत करने के लिए नई तकनीकों, डिजिटल टूल्स और डेटा-आधारित तरीकों को बढ़ावा देने पर भी फोकस रहा। सदस्य देशों ने ड्रग की मांग कम करने के लिए खास पहलों को मज़बूत करने, स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने और सबूतों पर आधारित, व्यापक और लोगों पर केंद्रित तरीकों के ज़रिए कमज़ोर स्थिति वाले लोगों, खासकर बच्चों और युवाओं की सुरक्षा करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
ड्रग्स के खिलाफ 'जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी'
एक हाई-लेवल मीटिंग के दौरान, भारत ने ब्रिक्स ड्रग लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों से ऐसी पार्टनरशिप बनाने का आह्वान किया जो तेज़ी, आपसी भरोसे और बिना रुकावट रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग पर आधारित हो। यह पार्टनरशिप सीमाओं से परे हो और अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम हो। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल अनुराग गर्ग ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत ने ड्रग्स के खिलाफ 'ज़ीरो-टॉलरेंस पॉलिसी' और नेटवर्क-सेंट्रिक अप्रोच पर आधारित तीन साल का रोडमैप (2026–2029) अपनाया है। इस रणनीति का फोकस पूरे क्रिमिनल नेटवर्क को खत्म करने, बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियानों के ज़रिए ड्रग्स के दुरुपयोग को रोकने और इलाज, नशा-मुक्ति और पुनर्वास के उपायों को मजबूत करने पर है।
सीमा-पार ट्रेनिंग को बढ़ाने का प्रस्ताव
21वीं सदी में ड्रग तस्करी के अत्यधिक जुड़े हुए और अधिकार-क्षेत्र की सीमाओं से परे होने वाले स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए, डीजी एनसीबी ने कहा कि इन अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्कों को तोड़ने के लिए राष्ट्रीय एंटी-ड्रग एजेंसियों को आपस में नेटवर्क बनाना होगा। उन्होंने ब्रिक्स देशों से गुवाहाटी घोषणा की भावना को आगे बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए ड्रग-मुक्त दुनिया और एक सुरक्षित, स्वस्थ वैश्विक समुदाय के साझा लक्ष्य की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने ने ब्रिक्स वर्चुअल वर्किंग ग्रुप बनाने और सीमा-पार ट्रेनिंग पहलों को बढ़ाने के भारत के प्रस्ताव पर भी ज़ोर दिया।
ये देश हुए शामिल
दो दिन की इस बैठक में, सदस्य देशों ने अपने-अपने देशों में ड्रग्स से जुड़ी मौजूदा स्थिति पर चर्चा की और दुनिया के सामने आ रही अहम चुनौतियों पर केंद्रित खास सत्रों में हिस्सा लिया। चर्चा में कई अहम मुद्दों पर बात हुई, जैसे कि ड्रग्स को रोकने के लिए रियल-टाइम डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, डार्कनेट के ज़रिए होने वाली ड्रग तस्करी को रोकना, नए साइकोएक्टिव पदार्थों के बढ़ते खतरे से निपटना, और प्रीकर्सर पदार्थों के गलत इस्तेमाल और केमिकल के रिसाव को रोकने के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत करना। 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का मुख्य विषय "मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण" है। इसी के तहत गुवाहाटी में ब्रिक्स देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक हुई, जिसमें ब्राज़ील, चीन, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हुए।