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Boris Pistorius: US के बाद जर्मनी के रक्षा मंत्री भारत पहुंचे, राजनाथ की उपस्थिति में दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर

Tue, 06 Jun 2023 01:35 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता महतो Updated Tue, 06 Jun 2023 01:35 PM IST
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Boris Pistorius: German Defense Minister arrives in India, guard of honor given in presence of Rajnath
Boris Pistorius - फोटो : Social Media

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज दिल्ली में जर्मनी के अपने समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक में रक्षा और औद्योगिक सहयोग के मुद्दों पर चर्चा हुई। चार दिन के भारत दौरे पर आए पिस्टोरियस को सबसे पहले दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। वे राजधानी दिल्ली में वॉर मेमोरियल भी गए। 

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पिस्टोरियस सोमवार को अपने जर्मन प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली पहुंचे। रक्षा मंत्रालय से जारी एक बयान में बताया गया कि पिस्टोरियस दिल्ली में इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कुछ रक्षा स्टार्ट-अप से भी मुलाकात करेंगे। 
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सात जून को जर्मन रक्षा मंत्री मुंबई जाएंगे। वहां वे पश्चिमी नौसेना कमान के हेडक्वार्टर और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड का भी दौरा करेंगे। दरअसल, जर्मनी और भारत के रिश्ते काफी अहम हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी के साथ द्विपक्षीय संबंध स्थापित करने वाला भारत पहला देश है।  

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अपनी भारत यात्रा से पहले जर्मनी मीडिया में खबरें आईं कि रूसी हथियारों के लिए भारत की निर्भरता लगातार बढ़ रही है, यह जर्मनी के हित में नहीं है। पिस्टोरियस के हवाले से कहा गया कि यह जर्मनी के ऊपर नहीं है कि इसे खुद बदल सके। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे संयुक्त रूप से सुलझाना होगा। हमें इसमें दिलचस्पी नहीं है, लेकिन भारत रूस के हथियारों की डिलीवरी और अन्य सामानों पर काफी ज्यादा निर्भर है। हालांकि, पिस्टोरियस ने कहा कि जर्मनी, भारत और इंडोनेशिया जैसे दोस्तों का समर्थन करने के लिए तैयार है।

43,000 करोड़ की छह पनडुब्बी के सौदे में पिस्टोरियस ने दिखाई रुचि
पिस्टोरियस ने लगभग 43,000 करोड़ की लागत से छह स्टील्थ पारंपरिक पनडुब्बियों की खरीद के लिए भारत की योजना में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। इस अनुबंध के दावेदारों में से एक जर्मनी की थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस) है। जून 2021 में रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए छह पारंपरिक पनडुब्बियों को घरेलू स्तर पर बनाने की मेगा परियोजना को मंजूरी दी थी।

भारत में विकसित होंगी पनडुब्बियां
स्टील्थ पनडुब्बियों को बहुचर्चित रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत बनाया जाएगा। यह मॉडल घरेलू रक्षा निर्माताओं की आयात निर्भरता को कम करने और हाई एंड मिलिट्री प्लेटफॉर्मों का उत्पादन करने के लिए प्रमुख विदेशी रक्षा कंपनियों के साथ हाथ मिलाने की अनुमति देता है। इसमें जर्मनी की कंपनी से पनडुब्बी बनाने की तकनीक हस्तांतरित करेगी और घरेलू कंपनियां इसे यहां असेंबल करेंगी।

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