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Hindi News ›   India News ›   Border infiltration How 71 Pakistani terrorists enter Jammu and Kashmir 38 locals among active terrorists

सीमा में घुसपैठ: जम्मू-कश्मीर में कहां से घुस आए 71 पाकिस्तानी आतंकी, सक्रिय दहशतगर्दों में 38 स्थानीय

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 12 Aug 2023 01:50 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर पुलिस एवं सुरक्षा बल, लोकल आतंकियों का सरेंडर कराने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। हालांकि, इसमें ज्यादा सफलता नहीं मिल सकी है। आतंकियों द्वारा सरेंडर करने के मामले देखें तो पता चलता है कि 2018 में एक, 2019 में कोई नहीं, 2020 में 8, 2021 में 2 और 2022 में केवल दो आतंकियों ने सरेंडर किया है।

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Border infiltration How 71 Pakistani terrorists enter Jammu and Kashmir 38 locals among active terrorists
मारे गए आतंकियों की संख्या। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकियों पर सुरक्षा बलों का शिकंजा कसता जा रहा है। लगातार हो रहे 'एनकाउंटर' में विदेशी (पाकिस्तानी) और लोकल आतंकी ढेर हो रहे हैं। पिछले साल 187 आतंकी, सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। इस वर्ष 20 जुलाई तक 35 आतंकी सुरक्षा बलों की गोली का निशाना बने हैं। खास बात है कि इनमें 27 विदेशी और 8 लोकल आतंकी शामिल हैं। इन सबके बीच एक सवाल यह भी उठ रहा है कि बॉर्डर के किसी हिस्से में कहीं पर बड़ी 'सेंध' तो नहीं लगी है। जम्मू-कश्मीर में 71 'पाकिस्तानी' आतंकी मौजूद हैं। सेना एवं दूसरे सुरक्षा बलों का दावा है कि हाल-फिलहाल कोई बड़ी घुसपैठ नहीं हुई है। बॉर्डर पर पुख्ता चौकसी है। ऐसे में वे आतंकी कहां से और कैसे घुसे हैं। घाटी में सक्रिय पाकिस्तानी आतंकियों के अलावा 38 लोकल दहशतगर्द भी मौजूद हैं। 

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तब उसे सक्रिय आतंकी मान लिया जाता है
जम्मू-कश्मीर पुलिस एवं सुरक्षा बल, लोकल आतंकियों का सरेंडर कराने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। हालांकि, इसमें ज्यादा सफलता नहीं मिल सकी है। आतंकियों द्वारा सरेंडर करने के मामले देखें तो पता चलता है कि 2018 में एक, 2019 में कोई नहीं, 2020 में 8, 2021 में 2 और 2022 में केवल दो आतंकियों ने सरेंडर किया है। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों से जुड़े एक अधिकारी बताते हैं कि वहां पर जब कोई युवा गायब हो जाता है तो गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की जाती है। जम्मू कश्मीर पुलिस, लापता हुए युवक का पता लगाने का प्रयास करती है। दो तीन सप्ताह बाद असल खेल शुरु होता है। एक तरफ गुमशुदा युवक के परिजन और पुलिस उसे खोज रही होती है और दूसरी ओर तभी उस युवक की तस्वीर सोशल मीडिया पर आ जाती है। तस्वीर में वह युवक किसी आतंकी संगठन के सदस्य के तौर पर हथियार लहराता हुआ नजर आता है। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उसे सक्रिय आतंकी मान लिया जाता है।
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आतंकियों के जाल में यूं फंसते चले जाते हैं युवा
अधिकारी के मुताबिक, आतंकी संगठनों को यह बात अच्छे से मालूम होती है कि पुलिस और परिजन, लापता युवक की खोजबीन में लगे हैं। घाटी में कई ऐसे उदाहरण मौजूद हैं, जिनमें कई युवा कुछ समय बाद ही हथियार छोड़कर दोबारा से मुख्यधारा में शामिल हो गए। आतंकी संगठन, गुमराह युवक का ब्रेनवॉश कर देते हैं। इसके बाद जब उन्हें लगता है कि वह युवक अभी भी पूरी तरह से आतंक की राह पर चलने को तैयार नहीं है और वह मुख्यधारा में लौटना चाहता है तो वे उस युवक का आतंकी संगठन के साथ फोटो वायरल कर देते हैं। इसके बाद वह युवक अधर में फंस जाता है। हथियार के साथ जैसे ही उसका फोटो सार्वजनिक होता है तो पुलिस उसका नाम, सक्रिय आतंकियों की सूची में डाल देती है। ऐसे में वह युवक, चाह कर भी मुख्यधारा में वापसी नहीं कर पाता। पिछले चार साल में महज दर्जनभर आतंकियों का सरेंडर, आतंकी संगठनों की इस कहानी पर मुहर लगाता है। 
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जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की भर्ती
साल आतंकी
2018 187
2019 121
2020 181
2021 142
2022 91

2022: किस तंजीम के कितने आतंकी मरे (20 जुलाई तक)
तंजीम लोकल विदेशी कुल आतंकी
एचएम 18 0 18
एलईटी/टीआरएफ 60 14 74
जेईएम 12 16 28
टीयूएम 0 0 0
पहचान नहीं 1 1 1
अल-बदर 1 0 1
एजीयूएच 0 0 0
आईएस/जेके 1 0 1
एलईएम 0 0 0
कुल 93 36 129

2023: मुठभेड़ में मारे गए आतंकी (20 जुलाई तक)
तंजीम लोकल विदेशी कुल आतंकी
एचएम 1 00 01
एलईटी/टीआरएफ 5 0 5
जेईएम 1 0 1
टीयूएम 0 0 0
पहचान नहीं 0 27 27
अल-बदर 1 0 1
एजीयूएच 0 0 0
आईएस/जेके 0 0 0
एलईएम 0 0 0
कुल 8 27 35

अब हाइब्रिड आतंकी बन रहे बड़ा खतरा
सुरक्षा बलों के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, घाटी में अभी हाल-फिलहाल में कोई बड़ी घुसपैठ नहीं हुई है। संभव है कि ये सभी विदेशी आतंकी कई वर्षों से घाटी में कहीं पर छिपे हों। सुरक्षा बलों की वहां तक पहुंच न हो सकी हो। मौजूदा समय में 109 आतंकी सक्रिय हैं। इनमें 38 लोकल और 71 विदेशी हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस, आईबी, आर्मी एवं अन्य एजेंसियां आतंकियों के ठिकाने तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। इन आतंकियों को घाटी में किसी न किसी तरह की मदद तो मिल ही रही है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। सीमा पार के आतंकी संगठन, पाकिस्तानी आतंकियों को बचाना चाहते हैं। वे ज्यादा से ज्यादा हाइब्रिड आतंकी तैयार कर रहे हैं। हाइब्रिड आतंकियों की मदद से ही टारगेट किलिंग की वारदात को अंजाम दिया जाता है। ये आतंकी, पब्लिक के बीच ही अंडर ग्राउंड वर्कर बनकर काम करते हैं। इन पर पुलिस या आम जनता को शक नहीं होता, क्योंकि ये उनके बीच में ही रहते हैं।

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