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Hindi News ›   India News ›   Book on Atal Bihari Vajpayee, PM talked to Nawaz Sharif five times during Kargil war

वाजपेयी पर किताब: कारगिल युद्ध के दौरान नवाज शरीफ से 5 बार की थी बात

Mon, 21 Dec 2020 06:29 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 21 Dec 2020 06:29 AM IST
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Book on Atal Bihari Vajpayee, PM talked to Nawaz Sharif five times during Kargil war
अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : पीटीआई

कारगिल युद्ध के बारे में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का मानना था कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने इसे लेकर नवाज शरीफ को धोखे में रखा था। भारत-पाकिस्तान के बीच 1999 में उपजे इस तनाव को खत्म करने के मकसद से युद्ध के दौरान ही वाजपेयी ने शरीफ से फोन पर चार-पांच बार बात की थी। इस बात का खुलासा वाजपेयी के करीब साढ़े तीन साल तक निजी सचिव रहे शक्ति सिन्हा की नई पुस्तक ‘वाजपेयी: द ईयर्स दैट चेंज्ड इंडिया’ में किया गया है।  

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जी सचिव रहे शक्ति सिन्हा ने अपनी पुस्तक में किया खुलासा 
सिन्हा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी के साथ कई वर्षों तक पीएमओ सहित निजी सचिव के तौर पर काम किया था। उनकी यह पुस्तक वाजपेयी की 96वीं वर्षगांठ के मौके पर 25 दिसंबर को रिलीज होगी। सिन्हा अभी एमएस विश्वविद्यालय, वडोदरा में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिसी रिसर्च एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मानद निदेशक हैं।
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उन्होंने बताया कि आज वाजपेयी को शिद्दत से याद किया जाता है लेकिन लोगों को पता नहीं कि 1998 में सरकार बनाने के लिए उन्हें कितनी मशक्कत करनी पड़ी थी। इसके बावजूद उन्होंने परमाणु परीक्षण करने और पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ बढ़ाने के मुश्किल फैसले किए। इन मुद्दों पर उन्होंने भारत का डटकर बचाव किया लेकिन तभी कारगिल युद्ध छिड़ गया। अपनी सरकार में ही उन्हें जबर्दस्त विरोध का सामना करना पड़ा।  
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बुलंद इरादों के साथ महत्वाकांक्षी परियोजनाएं भी 
दो बार अल्पकालिक और एक बार पूर्णकालिक प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी एक संवेदनशील कवि थे। उन्होंने बुलंद इरादों के साथ पोकरण परमाणु परीक्षण भी कराया और स्वर्णिम चतुर्भुज योजना जैसी महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना की भी परिकल्पना रखी। उनके ठोस फैसलों के कारण ही हमें सामरिक और आर्थिक नीतियों में कई उपलब्धियां मिलीं। शीतयुद्ध के बाद गलतफहमी के कारण अमेरिका से बिगड़े रिश्तों को उन्होंने दुरुस्त किया और उसे अपना करीबी मित्र बनाया। उनके 300 पन्नों की इस पुस्तक में कुल 10 अध्याय हैं। 

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