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निचली अदालत के फैसले पर मुहर: हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा केस में पति को तीन करोड़ मुआवजा देने को कहा, जानें मामला

Wed, 27 Mar 2024 01:14 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 27 Mar 2024 01:14 AM IST
सार

महिला ने आरोप लगाते हुए कहा था कि अमेरिका में उसके साथ हिंसा की गई। उसके चरित्र पर शंका की गई। अन्य पुरुषों के साथ अवैध संबंधों के झूठे आरोप लगाकर उसकी पिटाई की गई। कोर्ट ने आरोपों की पुष्टि उसकी मां, भाई और चाचा से की। मामले में कोर्ट ने जनवरी 2023 में आदेश सुनाया।

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Bombay High Court upholds Rs 3 crore compensation and Rs 1.5 lakh maintenance to woman in domestic violence
bombay high court

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें निचली अदालत ने पति को आदेश दिया था कि वह अलग रह रही अपनी पत्नी को  तीन करोड़ रुपये मुआवजा, 1.5 लाख रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने पति की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं मिला।

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पहले जानें, क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, जोड़े ने जनवरी 1994 में मुंबई में शादी की। बाद में दोनों अमेरिका चले गए। अमेरिका में भी उन्होंने विवाह समारोह भी आयोजित किया। 2005 में दोनों मुंबई लौट आए और संयुक्त स्वामित्व वाले घर में रहने लगे। 2008 में पत्नी अपनी मां के घर चली गई और 2014 में पति वापस अमेरिका चला गया। जुलाई 2017 में महिला ने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में घरेलू हिंसा अधिनियम (डीवीए) के तहत अपने पति के खिलाफ मामला दायर किया। महिला का आरोप था कि हनीमून के दौरान पति ने उसे पिछली टूटी सगाई के कारण उसे 'सेकंड हैंड' कहा था।

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निचली अदालत ने सुनाई यह सजा
महिला ने आरोप लगाते हुए कहा था कि अमेरिका में उसके साथ हिंसा की गई। उसके चरित्र पर शंका की गई। अन्य पुरुषों के साथ अवैध संबंधों के झूठे आरोप लगाकर उसकी पिटाई की गई। कोर्ट ने आरोपों की पुष्टि उसकी मां, भाई और चाचा से की। मामले में कोर्ट ने जनवरी 2023 में आदेश सुनाया। ट्रायल कोर्ट ने माना कि महिला को घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ा इसलिए मुआवजे के रूप में पति को तीन करोड़ रुपये का भुगतान करने के लिए कहा। कोर्ट ने पति को आदेश दिया कि वह दादर में पत्नी के लिए उपयुक्त आवास, जो कम से कम 1000 वर्ग फीट का हो, वह खोजने का आदेश दिया और वैकल्पिक तौर पर घर के लिए 75000 रुपये का भुगतान करने के लिए कहा। इसके अलावा, कोर्ट ने आदेश किया कि पति अपनी पत्नी के सभी आभूषण सहित अन्य समान वापस करे। इन सब के अलावा, कोर्ट ने कहा कि पति अपनी पत्नी को हर माह गुजारा भत्ते के रूप में 1,50,000 रुपये देगा। ट्रायल कोर्ट के आदेश से परेशान होकर पति ने हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की।

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उच्च न्यायालय ने दिया यह तर्क
उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख ने 22 मार्च को सुनाए गए आदेश में कहा कि यह राशि महिला के शारिरिक चोटों के लिए नहीं है, बल्कि, मानसिक और भावनात्मक यातना के रूप में भी है। हर मामले में कोई सीधा-सीधा फॉर्मूला नहीं होता। हर मामलों में तथ्य के आधार पर अलग-अलग कार्रवाई होती है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोनों पति-पत्नी शिक्षित हैं और एक उच्च स्थान पर काम कर रहे हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा के बाद भी महिला ने घरेलू हिंसा को बर्दाश्त किया। यह उसके आत्मसम्मान की बात है। पति बिना किसी प्रावधान के अमेरिका चला गया। पति को नौ साल अपनी मां के रूप में रहना पड़ा। अंत में हाईकोर्ट ने कहा कि हम घरेलू हिंसा की इस घटना को गलत नहीं ठहरा सकते। कोर्ट ने पति की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं मिला।

 

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