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सिंचाई घोटाले में हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब, 15 जनवरी तक दिया समय
Tue, 17 Dec 2019 01:57 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Tue, 17 Dec 2019 01:57 AM IST
सार
- मामले में एनसीपी नेता अजित पवार थे आरोपी, एसीबी ने दी है क्लीन चिट
- एक एनजीओ ने याचिका दायर कर सीबीआई से की है जांच कराने की मांग
- मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने राज्य सरकार से 15 जनवरी तक मांगा जवाब
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बॉम्बे हाईकोर्ट
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विस्तार
विदर्भ सिंचाई घोटाला मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) से जांच कराने की याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र की राज्य सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस जेडए हक और एमजी गिरातकर की पीठ ने सोमवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 15 जनवरी तक इस संदर्भ में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
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पिछले सप्ताह गैर सरकारी संगठन जनमंच और अतुल जगताप ने हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में याचिका दायर कर सिंचाई घोटाले की जांच राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से सीबीआई को हस्तांतरित करने की मांग की थी। राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पिछले माह हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल करके मामले में आरोपी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता अजित पवार को क्लीन चिट दे दी थी।
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अजीत पवार जब विदर्भ सिंचाई विकास निगम के चेयरमैन थे, तब यह घोटाला सामने आया था। इस मामले में पवार को आरोपी बनाया गया था। पिछले माह एसीबी ने अदालत में शपथ पत्र दाखिल करके कहा था कि विदर्भ सिंचाई घोटाले में एनसीपी नेता अजित पवार की कोई भूमिका नहीं है।
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अजित पवार महाराष्ट्र के पुणे जिले की बारामती विधानसभा सीट से एनसीपी के विधायक हैं। विदर्भ क्षेत्र की सिंचाई परियोजना को जब अनुमति दी गई थी तब एनसीपी और कांग्रेस की सरकार थी। अजित पवार उस समय विदर्भ सिंचाई विकास निगम के चेयरमैन थे।
परियोजना में करीब 70,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया था। पिछले माह अजित पवार ने अपनी पार्टी से बगावत करके भाजपा से हाथ मिला लिया था और डिप्टी सीएम पद की शपथ भी ली थी। बाद में बदले राजनीतिक घटनाक्रम में अजित पवार को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद वह दोबारा एनसीपी में आ गए।