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महाराष्ट्र: बॉम्बे हाईकोर्ट ने उद्धव सरकार को लगाई फटकार, कहा- थानों में सीसीटीवी लगाने के लिए नहीं किया काम

Mon, 21 Feb 2022 06:34 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क अमर उजाला, मुम्बई
न्यूज डेस्क अमर उजाला, मुम्बई Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 21 Feb 2022 06:34 PM IST
सार

महाराष्ट्र सरकार को लताड़ लगाते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कहा कि क्या किसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पढ़ने की जहमत उठाई है? राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना होगा।
 

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bombay high court says maharashtra government did not take concrete steps to install cctv in police stations
सांकेतिक फोटो - फोटो : social media

विस्तार

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने को लेकर महाराष्ट्र सरकार को जमकर लताड़ लगाई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने राज्य भर के पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने के संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाए। जस्टिस एसजे कथावाला और जस्टिस एमएन जाधव की खंडपीठ ने कहा कि अतीत में जब भी अदालत किसी भी मामले में सीसीटीवी फुटेज मांगती थी, तो पुलिस किसी न किसी बहाने से इनकार कर देती थी। न्यायमूर्ति कथावाला ने कहा, हमें स्पष्ट रूप से कहना चाहिए कि यह सब जानबूझकर किया गया है। इस दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2020 में एक आदेश पारित किया था जिसमें सभी राज्यों को पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी लगाने का निर्देश दिया गया था।

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राज्य सरकार को लताड़ लगाते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कहा कि क्या किसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पढ़ने की जहमत उठाई है? राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना होगा।
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हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरा उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना था और इसलिए, केवल कागजी अनुपालन पर्याप्त नहीं होगा। महाराष्ट्र सरकार से हाईकोर्ट ने कहा कि आपको इस पर गौर करने के लिए एक समिति गठित करने की जरूरत है। वरना कोई भी इस आदेश की परवाह नहीं करेगा। 
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इस पर राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने अदालत को बताया कि थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और खराब कैमरों की मरम्मत करने का काम दो ठेकेदारों द्वारा किया जा रहा है। कोर्ट ने पूछा कि थानों में सीसीटीवी लगाने का टेंडर सिर्फ दो ठेकेदारों को ही क्यों दिया गया। 

जिसका जवाब देते हुए महाधिवक्ता कुंभकोनी ने पीठ को बताया कि नवंबर 2020 में दो ठेकेदारों के साथ 22 सप्ताह की अवधि के भीतर सीसीटीवी लगाने और उसके बाद पांच साल के लिए उनके रखरखाव का समझौता किया गया था।

महाधिवक्ता कुंभकोनी ने कहा कि सभी पुलिस स्टेशनों में वायरिंग का काम पूरा हो गया है। हालांकि, COVID-19 महामारी और कुछ हार्डवेयर पार्टस की अनुपलब्धता के कारण आगे काम नहीं किया जा सका, जिसके कारण दोनों ठेकेदारों का भुगतान रोक दिया गया था। इसके बाद जनवरी 2022 में जब फिर से काम शुरू हुआ तक पुराना भुगतान किया गया।

इस पर कोर्ट ने कहा कि आदेश पारित होने के बाद ही कदम उठाए जा रहे हैं। इससे पहले तक कुछ नहीं किया गया है। इस दौरान हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, सीसीटीवी कैमरों को सभी प्रवेश और निकास स्थानों पर, लॉक-अप के अंदर, निरीक्षक, उप-निरीक्षकों के कक्ष में और अन्य जरूरी स्थानों पर लगाना होगा। जिस पर कुभकोनी ने कहा कि संभवत: इसका पालन किया जा रहा है।

सरकार की ओर से सोमवार को अदालत में पेश हलफनामे के मुताबिक, राज्य में 1,089 पुलिस थाने हैं. अब तक 547 थानों में 6,092 सीसीटीवी लगाए जा चुके हैं। इनमें से 5,639 कैमरे काम कर रहे हैं, जबकि बाकी काम नहीं कर रहे हैं। इसमें सरकार ने कहा है कि ठेकेदारों को सभी खराब सीसीटीवी को 15 दिनों में ठीक करने के लिए कहा गया है।


बॉम्बे उच्च न्यायालय ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 2 मार्च का समय दिया है। साथ ही सरकार से निविदा से संबंधित दस्तावेज और दोनों ठेकेदारों के कार्य अनुभव से संबंधित दस्तावेज जमा करने को कहा है।

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