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ब्लैक फंगस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को दिए दिशा-निर्देश, कहा- कम करें दवाओं के दाम

Fri, 21 May 2021 10:55 AM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: प्रियंका तिवारी Updated Fri, 21 May 2021 10:55 AM IST
सार

एक तरफ जहां देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है वहीं ब्लैक फंगस के फैलने से नई समस्या खड़ी हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य सरकारों को पत्र लिखकर कहा है कि वह ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करें। ब्लैक फंगस से महाराष्ट्र में हो रही मौतों पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार को दिशा-निर्देश दिया है।

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Bombay High Court said that there is a need to decrease the drug prices for affordable treatment of black fungus
बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

देशभर में व्याप्त कोरोना महामारी के प्रकोप के बीच अब ब्लैक फंगस (म्यूकोर्मिकोसिस) नामक बीमारी भी पैर पसार रहा है। इस फंगल इंफेक्शन के लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा ने राज्यों को पत्र लिखकर कहा है कि वह ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करें।  महाराष्ट्र में भी ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं। यहां अब तक इस बीमारी के करीब दो हजार से अधिक केस दर्ज किए जा चुके हैं जबिक 90 मरीजों की जान जा चुकी है। इस बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं की कीमतों को कम करने की जरूरत पर ध्यान देने को कहा है। साथ ही संक्रमण के इलाज के लिए जरूरी दवाओं के उत्पादन और वितरण को भी नियमित करने को कहा है।

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने ब्लैक फंगस पर क्या कहा ?
जस्टिस अनिल बी शुक्रे और अविनाश बी घरोटे की नागपुर डिवीजन बेंच ने नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआई) को ब्लैक फंगस की दवाओं को लेकर कुछ निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि दवाओं के उत्पादन के विनियमन, उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और इनके वितरण के संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। पीठ ने यह भी कहा कि विभिन्न राज्यों में रिपोर्ट किए गए म्यूकोर्मिकोसिस केसों की संख्या के अनुसार उन्हें इस बीमारी की दवाओं को वितरित करने के संबंध में भी निर्देश जारी किया जाए। 
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महाराष्ट्र सरकार ने पेश की एसओपी
महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट के सामने 18 मई के अपने प्रस्ताव की एक प्रति पेश की, जिसमें महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना में म्यूकोर्मिकोसिस के मरीजों को भी शामिल किए जाने की बात कही गई है। एसओपी को पढ़ने के बाद पीठ ने कहा, ‘कुछ दवाएं ज्यादा जहरीली होती हैं और गुर्दे जैसे अंगों को प्रभावित करती हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए हम राज्य सरकार को इन दवाओं के नुस्खे और इनके इस्तेमाल को लेकर एक विस्तृत एसओपी जारी करने का निर्देश देते हैं।’
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दवाओं की कीमतों को किफायती स्तर पर लाने को कहा
वहीं, कोर्ट का ध्यान इस ओर भी लाया गया कि म्यूकोर्मिकोसिस के इलाज के लिए जिन दवाओं का उपयोग किया जा रहा है, वे काफी महंगी हैं और इन दवाओं की मात्रा और खुराक बहुत अधिक है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो इस बीमारी का इलाज कई मरीजों की पहुंच से बाहर हो सकता है। पीठ ने कहा, ‘ऐसी स्थिति में यह जरूरी है कि सरकार इन दवाओं की कीमतों को किफायती स्तर पर लाने के लिए कुछ कदम उठाए।’अदालत ने आगे कहा, ‘हम एनपीपीए से इस पहलू पर गौर करने और यदि संभव हो तो इन दवाओं की कीमतों को एक किफायती स्तर तक कम करने के लिए निर्देश जारी करने का अनुरोध करेंगे।’

जागरूकता अभियान चलाए जाने पर जोर
म्यूकोर्मिकोसिस के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली इन सभी दवाओं की कम आपूर्ति की वजह से भी समस्या पैदा हो रही है। कोर्ट को बताया गया कि भारत में विभिन्न स्थानों पर लगभग 26 कंपनियां स्थित हैं जो म्यूकोर्मिकोसिस के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं के निर्माण में शामिल हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह उचित होगा कि केंद्र सरकार पूरे भारत में इन दवाओं के उत्पादन और वितरण को नियंत्रित करे ताकि भविष्य में इन दवाओं की कमी न हो। वहीं, अदालत ने विदर्भ क्षेत्र के संबंध में नागपुर और अमरावती के संभागीय आयुक्तों को ब्लैक फंगस के बारे में लोगों को अवगत कराने के लिए जागरूकता अभियान चलाने को कहा।


15 दिनों में ब्लैक फंगस के कारण हुईं 26 मौतें
बताते चलें कि अधिवक्ता भानुदास कुलकर्णी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा कि पिछले 15 दिनों में ब्लैक फंगस के कारण 26 मौतें हुईं और डॉक्टरों को 43 मरीजों की आंखें निकालनी पड़ी। उन्होंने आगे कहा कि पिछले दो दिनों में इस फंगल इंफेक्शन के 109 मामले सामने आए हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को म्यूकोर्मिकोसिस के कारणों और लक्षणों पर जागरूकता अभियान शुरू करना चाहिए। सावधानियों पर एक सलाह जारी करनी चाहिए जिसे व्यापक रूप से प्रकाशित किया जा सकता है और बीमारी के इलाज के लिए एक संशोधित एसओपी जारी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि सभी अस्पतालों को स्वच्छता के सख्त मानदंडों को बनाए रखने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए।

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