फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Bombay High Court rejects Zakir Naik relief in charge of spreading communal disturbance

सांप्रदायिक अशांति फैलाने के आरोप में अदालत ने जाकिर नाईक को राहत देने से किया इनकार

Wed, 20 Jun 2018 04:54 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Updated Wed, 20 Jun 2018 04:54 PM IST
विज्ञापन
Bombay High Court rejects Zakir Naik relief in charge of spreading communal disturbance

बंबई उच्च न्यायालय ने सांप्रदायिक अशांति फैलाने और अवैध गतिविधियां चलाने के आरोपों का सामना कर रहे विवादास्पद इस्लामी उपदेशक जाकिर नाईक को राहत देने से आज इनकार कर दिया और कहा कि उसने जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने में कोई दिलचस्पी या इच्छा नहीं दिखाई है। 

विज्ञापन


न्यायमूर्ति आर एम सावंत और न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे की खंडपीठ नाईक की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी कि जिसमे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को उसके खिलाफ की गयी जांच की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। नाईक ने यह भी अनुरोध किया था कि उसके पासपोर्ट के निरसन का आदेश रद्द करने का विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया जाये। 
विज्ञापन


अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘याचिका में मांगी गयी अन्य राहतों के संदर्भ में हमें यह नजर नहीं आता कि यह अदालत कैसे इन बिन्दुओं पर विचार कर सकती है जबकि याचिकाकर्ता जांच एजेंसियों के सामने पेश ही नहीं हुआ। याचिकाकर्ता मलेशिया में बैठा है और वह जांच एजेंसियों को जांच रिपोर्ट जमा करने का निर्देश देने की मांग कर रहा है।’’ 
विज्ञापन
विज्ञापन


नाईक के खिलाफ भादसं की धारा 153 (ए) (विभिन्न धर्मों के बीच वैमनस्य फैलाना) और अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम की धाराएं 10,13 और 18 (जिनका संबंध अवैध संघ से संबंधित होने, गैर कनूनी गतिविधियों को बढ़ावा और आपराधिक साजिश से है) के तहत मामला दर्ज है। 

अदालत ने कहा कि आदर्श स्थिति तो यह है कि नाईक को भारत आना चाहिए था और जांच एजेंसियों के सामने पेश होना चाहिए, ‘इतनी दूर से बात आगे नहीं बढ़ती। याचिकाकर्ता की गैरहाजिरी में हम कैसे ऐसी याचिकाओं पर विचार कर सकते हैं।’ 


नाईक एनआईए और ईडी की जांच का सामना कर रहा है क्योंकि बांग्लादेश ने कहा था कि पीस टीवी पर उसका भाषण ढाका में 2016 के हमले की एक वजह था। इस हमले में 22 लोगों की जान चली गयी थी। नाईक के गैर सरकारी संगठन इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को 2016 में ही अवैध घोषित किया जा चुका है और इस मामले में 18 करोड़ रूपए से अधिक की रकम के धन शोधन के आरोपों की प्रवर्तन निदेशालय जांच कर रहा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed