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बॉम्बे हाईकोर्ट: देशमुख के खिलाफ जांच में सहयोग नहीं कर रही महाराष्ट्र सरकार, सीबीआई का आरोप

Tue, 22 Jun 2021 02:37 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 22 Jun 2021 02:37 AM IST
सार

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख मामले में सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें सीबीआई की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार जांच में सहयोग नहीं कर रही है। 
 

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Bombay High Court: Maharashtra government not cooperating in the investigation against Anil Deshmukh, alleges CBI
बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सीबीआई ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार की शिकायत की। केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ जांच में सहयोग नहीं कर रही है। देशमुख भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं।

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सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के पिछले आदेश के बाद शुरू की गई जांच, 'पूरे राज्य प्रशासन की सफाई करने' का मौका थी, लेकिन महाराष्ट्र सरकार केंद्रीय एजेंसी के साथ सहयोग करने से इनकार कर रही है। मेहता ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा लगाए गए इन आरोपों से इनकार किया कि सीबीआई जांच में पूर्व सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाजे की बहाली और मुंबई पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती में देशमुख के अनुचित हस्तक्षेप के मुद्दों को शामिल करके हाईकोर्ट के आदेश से बाहर जा रही है।
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रफीक दादा के आरोपों का किया खंडन
मेहता ने राज्य के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता रफीक दादा द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया कि सीबीआई अवैध फोन टैपिंग और पुलिस तैनाती से संबंधित संवेदनशील दस्तावेजों को कथित तौर पर लीक करने के मामले में आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला के खिलाफ जांच में पिछले दरवाजे से प्रवेश पाने के लिए देशमुख के खिलाफ चल रही तहकीकात का इस्तेमाल कर रही है। सॉलिसिटर जनरल ने न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और न्यायमूर्ति एनजे जामदार की पीठ के समक्ष अभिवेदन दिया, जो इस साल की शुरुआत में देशमुख के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी से दो पैराग्राफ को हटाने का आग्रह करने वाली महाराष्ट्र सरकार की एक याचिका पर सुनवाई कर रही है।
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परमबीर सिंह ने लगाए है देशमुख पर आरोप
सीबीआई देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोपों की जांच कर रही है। यह आरोप मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने लगाए हैं। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली पीठ ने अप्रैल में सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह मुंबई के एक थाने में वकील जयश्री पाटिल की ओर से दर्ज कराई गई एक आपराधिक शिकायत के आधार पर देशमुख के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू करे। बता दें कि अदालत के आदेश के बाद देशमुख ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। पाटिल ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर उनकी ओर से दर्ज कराई गई शिकायत पर कार्रवाई की गुजारिश की थी।

उन्होंने अपनी याचिका में देशमुख के खिलाफ सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों का उल्लेख किया है और सिंह द्वारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे गए एक पत्र की एक प्रति भी संलग्न की है, जिसमें मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त ने देशमुख के खिलाफ आरोप लगाए हैं। मेहता ने कहा, 'वाजे की बहाली और तबादलों व तैनाती के मुद्दे, अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े हुए हैं। अगर अवैध तैनाती और तबादलों का गिरोह मौजूद है, तो सीबीआई को इसकी जांच करनी चाहिए। फिर राज्य सरकार कैसे कह सकती है कि इन हिस्सों को प्राथमिकी से हटा दिया जाए?'

मेहता ने कहा कि वाजे सिर्फ एक एपीआई (सहायक पुलिस निरीक्षक) था, लेकिन गृह मंत्री के आवास तक उसकी सीधी पहुंच थी। उसका अतीत संदेहपूर्ण था, फिर भी उसे 15 साल बाद (2020 में) बहाल कर दिया गया था जब राज्य में एक खास शख्स गृह मंत्री था। वाजे को अब बर्खास्त किया जा चुका है। इस पर अदालत ने पूछा कि क्या सीबीआई तीन सदस्यीय समिति के खिलाफ भी जांच कर रही है जिसने वाजे की बहाली को मंजूरी दी थी? तो मेहता ने कहा कि वह तफ्तीश करना तो चाहती है कि लेकिन महाराष्ट्र सरकार सीबीआई को वाजे की बहाली से संबंधित दस्तावेज नहीं दे रही है।


राज्य सरकार के वकील दादा ने कहा कि हाईकोर्ट यह अनुमान नहीं लगा सकता कि प्रारंभिक जांच का निर्देश देने वाले अदालत के आदेश के तहत राज्य सरकार के लिए जरूरी है कि वह सीबीआई को वे दस्तावेज दे जो उसने मांगे हैं। हाईकोर्ट बुधवार को मामले की आगे सुनवाई करेगी। 

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