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शक्ति मिल परिसर: टेलीफोन ऑपरेटर से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद बरकरार, दोनों केस में तीन आरोपी समान थे

Thu, 25 Nov 2021 09:02 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 25 Nov 2021 09:02 PM IST
सार

इससे पहले गुरुवार दिन में हाईकोर्ट ने फोटो जर्नलिस्ट के केस के तीन दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। 
 

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BOMBAY: HC upholds life sentence in case of gangrape of telephone operator in Shakti Mills premises
सांकेतिक फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई के शक्ति मिल परिसर में वर्ष 2013 में एक टेलीफोन ऑपरेटर से हुई एक सामूहिक दुष्कर्म की घटना के एक दोषी को सुनाई गई उम्रकैद की सजा गुरुवार को बरकरार रखी। यह घटना इसी परिसर में एक महिला फोटो जर्नलिस्ट के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना के एक माह बाद हुई थी। दोनों मामलों में तीन आरोपी समान थे।

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इससे पहले गुरुवार दिन में हाईकोर्ट ने फोटो जर्नलिस्ट के केस के तीन दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। 19 साल की टेलीफोन ऑपरेटर से दुष्कर्म के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने में देरी हमारे समाज के रवैये को देखते हुए मायने नहीं रखती है। इस टिप्पणी के साथ जस्टिस साधना जाधव और जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने निचली कोर्ट के मार्च 2014 के आदेश के खिलाफ आरोपी मोहम्मद अशफाक दाऊद शेख द्वारा दायर अपील खारिज कर दी। निचली कोर्ट ने उसे उम्र कैद की सजा सुनाई थी, जिसे आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, 31 जुलाई, 2013 को आरोपी शेख और उसके छह अन्य साथियों ने पीड़िता और उसके प्रेमी को जबर्दस्ती मुंबई में बंद पड़ी इस कपड़ा मिल परिसर में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया था। निचली कोर्ट ने शेख को मार्च 2014 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 
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इस केस का खुलासा फोटो जर्नलिस्ट के साथ हुए दुष्कर्म के खुलासे के बाद हुआ था। जांच के दौरान पुलिस को टेलीफोन ऑपरेटर के केस की सूचना मिली थी। इसलिए एफआईआर देरी से दर्ज की गई थी। आरोपी ने इसी देरी को आधार बनाकर सजा को चुनौती दी थी। 

टेलीफोन ऑपरेटर व फोटो जर्नलिस्ट से सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में एक नाबालिग समेत सात आरोपी गिरफ्तार किए गए थे। इनमें से तीन आरोपी दोनों वारदातों में शामिल थे। निचली कोर्ट ने जहां इन तीनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी, वही शेख व अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 


हाईकोर्ट में शेख की वकील अंजलि पाटिल ने तर्क दिया था कि यह एक झूठा मामला था जो कथित घटना के एक महीने बाद दर्ज किया गया था। हाईकोर्ट ने इस दलील को मानने से इनकार करते हुए कहा कि हमारे परंपरागत समाज में यौन उत्पीड़न की घटना को पीड़ित के परिवार की प्रतिष्ठा और सम्मान को दांव पर लगना माना जाता है। ऐसे में तत्काल एफआईआर दर्ज कराने की उम्मीद करना गलत है। 

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