बंगाल: लाउडस्पीकर पर एलान कर तृणमूल में वापस आ रहे कार्यकर्ता, भाजपा ने 'डर' को बताया वजह
पश्चिम बंगाल में चुनाव का परिणाम आने के बाद सत्ता में बदलाव तो नहीं हुआ लेकिन उन नेताओं के सुर जरूर बदलने लगे हैं जो तब तृणमूल कांग्रेस का साथ छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे। बीरभूम और बर्धमान जिलों के ऐसे कई लोग टीएमसी में शामिल हो चुके हैं। वहीं, बीरभूम में तो सोमवार को कई भाजपा कार्यकर्ता लाउडस्पीकर पर एलान करते हुए टीएमसी में शामिल हुए।
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जानकारी के अनुसार बीरभूम के लाभपुर के बिप्रतिकुरी गांव में करीब 40 भाजपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ दी। इन्होंने पूरे गांव में लाउडस्पीकर पर कहा कि तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ जाना गलती थी और इसके लिए हम माफी मांगते हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने भी इन कार्यकर्ताओं की माफी पर संज्ञान लिया है और इनकी पार्टी में वापसी शुरू कर दी है।
इसके बाद पूर्वी बर्धमान जिले से भाजपा के करीब 150 कार्यकर्ताओं के तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की जानकारी सामने आई। जानकारी के अनुसार जिले के केतुग्राम इलाके में तृणमूल कांग्रेस के पार्टी कार्यालय में 150 लोगों ने पार्टी का झंडा पकड़ कर भाजपा छोड़ दी। केतुग्राम से तृणमूल के विधायक शेख शाहनवाज ने इनकी पार्टी में वापसी कराई।
जिनकी रीढ़ नहीं है वही लौटेंगे: सौमित्र
वहीं, भाजपा आरोप लगा रही है कि चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य में हिंसा की जो घटनाएं हुई हैं, उनसे डर की वजह से लोग तृणमूल में वापस जा रहे हैं। पार्टी ने कहा कि जो 30-40 लोग लाउडस्पीकर पर एलान कर तृणमूल में शामिल हुए हैं, उन्होंने ऐसा डर के चलते किया है। वहीं, बिष्णुपुर से भाजपा सांसद सौमित्र खान ने कहा है कि ‘जिनकी रीढ़ नहीं है’ वे ही सत्तारूढ़ दल में फिर शामिल होने का प्रयास करेंगे।
क्या कह रहे हैं तृणमूल में वापस लौटने वाले
तृणमूल कांग्रेस में दोबारा शामिल होने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव परिणाम सामने आने के बाद हुई हिंसा में जब भाजपा कार्यकर्ता मारे जा रहे थे तब पार्टी का कोई बड़ा नेता बचाने नहीं आया था। इसलिए हमने तृणमूल कांग्रेस में वापस लौटने का फैसला किया है। इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब पार्टी हमारी सुरक्षा ही नहीं कर सकती तो पार्टी में रहने का क्या मतलब बनता है।
बड़े नेता भी कर सकते हैं तृणमूल में वापसी
छोटे-छोटे कार्यकर्ताओं की तृणमूल में वापसी के साथ ऐसे कुछ बड़े नाम भी चर्चा हैं जिनके बारे में कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भाजपा का साथ छोड़ फिर ममता बनर्जी की शरण में आ सकते हैं। एक समय में ममता बनर्जी की करीबी रहीं सोनाली गुहा भी चुनाव से पहले टीएमसी छोड़ भाजपा में चली गई थीं। लेकिन बीते दिनों उन्होंने भी फिर तृणमूल के खेमे में लौटने की इच्छा जताई थी।
राजीव बनर्जी के बारे में भी कहा जा रहा है कि वह तृणमूल में आ सकते हैं। हाल ही में किया गया उनका एक ट्वीट भी ऐसा ही संकेत देता है। इसमें उन्होंने भाजपा का विरोध और तृणमूल का समर्थन किया था। वहीं, तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी दावा कर चुके हैं कि तृणमूल से भाजपा में गए कई लोग तो वापसी के इच्छुक हैं ही भाजपा के कई विधायक भी उनके संपर्क में हैं।
हावड़ा में लगाए गए 'धमकी' भरे पोस्टर
हावड़ा के दोमजुर में बुधवार को जगह-जगह पोस्टर लगाए गए जिनमें कहा गया है कि ‘जिन्होंने ममता बनर्जी को धोखा दिया, उनके लिए बंगाल में कोई स्थान नहीं है।’ फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ कि ये पोस्टर किसने लगाए। एक पोस्टर में लिखा गया है , ‘(गद्दार) मीर जाफर को दोमजुर में वापस नहीं आने दिया जाएगा।’ इसमें यह भी दावा किया है कि तृणमूल कार्यकर्ताओं की ओर यह पोस्टर लगाया गया है।