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पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश नहीं करेगी भाजपा, बातचीत से ढूंढेगी हल

Mon, 10 Jun 2019 08:13 PM IST
Gaurav Pandey डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Mon, 10 Jun 2019 08:13 PM IST
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BJP will not recommend the implementation of President's rule in West Bengal
पश्चिम बंगाल में हिंसा (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

पश्चिम बंगाल भाजपा का दावा है कि राज्य में अब तक उसके सौ से अधिक कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार दिया गया है। इन राजनीतिक हत्याओं के कारण पश्चिम बंगाल का माहौल बेहद तनावपूर्ण बताया जा रहा है। इस तनाव के बीच प्रदेश के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर उन्हें राज्य की परिस्थितियों से अवगत कराया है। 

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इस मुलाकात के बाद से सियासी गलियारों में पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। लेकिन भाजपा सूत्रों की मानें तो पार्टी पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति लगाने के पक्ष में नहीं है और वह वर्तमान परिस्थितियों को बातचीत से सुलझाने की कोशिश करेगी। प. बंगाल में राष्ट्रपति शासन न लगाने का सुझाव राज्य प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय की तरफ से आया है जिसे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने स्वीकार कर लिया है। 

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कैसे घटा घटनाक्रम

दरअसल, पश्चिम बंगाल के भाजपा कार्यकर्ताओं ने चुनाव परिणाम आने के पहले ही इस बात की आशंका जाहिर कर दी थी कि अगर चुनाव परिणाम तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में नहीं आते हैं तो राज्य में हिंसा का जबरदस्त दौर शुरू हो सकता है। भाजपा कार्यकर्ताओं की इस आशंका को ममता बनर्जी ने चुनाव बाद उन्हें 'देख लेने' की बात कहकर और हवा दे दी थी। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद बंगाल में हिंसा शुरू होते देख प्रदेश भाजपा इकाई ने केंद्रीय इकाई के सामने प्रदेश सरकार को भंग कराने की मांग कर दी थी। 

यह मांग करने वालों में प्रदेश के लगभग सभी शीर्ष नेता शामिल थे। जानकारी के मुताबिक, इसके बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय से इस मसले पर उनकी राय मांगी थी क्योंकि बंगाल में भाजपा का मिशन आगे बढ़ाने में सबसे प्रमुख भूमिका उन्होंने ही निभाया था। कैलाश विजयवर्गीय ने इस मुद्दे पर केंद्र को भेजी अपनी राय में ममता बनर्जी सरकार को 'भंग न करने' का सुझाव दिया था। 

उनका मत था कि चुनाव के बाद से जिस तरह तृणमूल कांग्रेस पार्टी के पार्षदों, विधायकों और सांसदों का भाजपा में आना जारी है, उससे टीएमसी स्वयं ही कमजोर हो रही है और आने वाले समय में विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत सुनिश्चित है। ऐसे समय में पार्टी को कोई गलती नहीं करनी चाहिए जो ममता बनर्जी को सहानुभूति का लाभ उठाने का मार्ग दे। बताया जाता है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उनका यह सुझाव स्वीकार कर लिया है। उनकी सुझाव का ही असर है कि गृह मंत्रालय बंगाल को निर्देश देकर हालात सुधारने की सलाह दे रहा है।

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