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कर्नाटक में लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने की मांग पर नहीं झुकेगी भाजपा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 10 Apr 2018 10:42 PM IST
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अमित शाह
- फोटो : PTI
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सीएम सिद्घारमैया के लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने के सियासी दांव में उलझी भाजपा इस मुद्दे पर अपने रुख में नरमी लाने के मूड में नहीं है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि सिद्घारमैया के लिंगायत दांव से चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश की तरह कर्नाटक में भी समानांतर ध्रुवीकरण हो सकता है। यही कारण है कि पार्टी ने इस फैसले को हिंदुओं को बांटने की साजिश बता कर स्पष्ट कर दिया है कि वह लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने का समर्थन नहीं करेगी।
दरअसल सिद्घारमैया अपने इस दांव से लिंगायत समुदाय को भाजपा से दूर करना चाहत हैं। भाजपा की मुश्किल यह है कि इस समुदाय से जुड़े कई अहम मठों ने भी अलग धर्म का दर्जा दिए जाने का न सिर्फ समर्थन किया है, बल्कि पीएम मोदी से 18 अप्रैल तक इस पर फैसला करने की अपील भी की है।
अगर भाजपा राज्य सरकार के अलग धर्म का दर्जा देने के फैसले का समर्थन करती है तो उसके हिंदुत्व के एजेंडे को नुकसान पहुंचेगा। विरोध करने पर परंपरागत मतदाताओं के पार्टी से नाराज होने का खतरा है।
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कर्नाटक की चुनावी रणनीति से जुड़े पार्टी के एक महासचिव के मुताबिक कर्नाटक में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तरह समानांतर ध्रुवीकरण हो सकता है। उक्त महासचिव का कहना था कि कुछ ऐसी ही सियासी परिस्थितियों के कारण पिछड़ी जातियां का वहां यादव बिरादरी के खिलाफ ध्रुवीकरणु हुआ। जबकि दलित बिरादरी में जाटवों के खिलाफ गैर-जाटव एकजुट हो गए।
इसके अलावा कर्नाटक चुनाव के बाद पार्टी इसे कांग्रेस की हिंदुओं को बांटने की साजिश रचाने का आरोप लगाएगी। कर्नाटक में अल्पसंख्यक 13 फीसदी, पिछड़ी जातियां- दलितों की उपस्थिति 32 फीसदी है।
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दरअसल सिद्घारमैया अपने इस दांव से लिंगायत समुदाय को भाजपा से दूर करना चाहत हैं। भाजपा की मुश्किल यह है कि इस समुदाय से जुड़े कई अहम मठों ने भी अलग धर्म का दर्जा दिए जाने का न सिर्फ समर्थन किया है, बल्कि पीएम मोदी से 18 अप्रैल तक इस पर फैसला करने की अपील भी की है।
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अगर भाजपा राज्य सरकार के अलग धर्म का दर्जा देने के फैसले का समर्थन करती है तो उसके हिंदुत्व के एजेंडे को नुकसान पहुंचेगा। विरोध करने पर परंपरागत मतदाताओं के पार्टी से नाराज होने का खतरा है।
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कर्नाटक की चुनावी रणनीति से जुड़े पार्टी के एक महासचिव के मुताबिक कर्नाटक में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तरह समानांतर ध्रुवीकरण हो सकता है। उक्त महासचिव का कहना था कि कुछ ऐसी ही सियासी परिस्थितियों के कारण पिछड़ी जातियां का वहां यादव बिरादरी के खिलाफ ध्रुवीकरणु हुआ। जबकि दलित बिरादरी में जाटवों के खिलाफ गैर-जाटव एकजुट हो गए।
इसके अलावा कर्नाटक चुनाव के बाद पार्टी इसे कांग्रेस की हिंदुओं को बांटने की साजिश रचाने का आरोप लगाएगी। कर्नाटक में अल्पसंख्यक 13 फीसदी, पिछड़ी जातियां- दलितों की उपस्थिति 32 फीसदी है।