अब रथ पर सवार हो यूपी जीतने निकलेगी भाजपा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रथयात्रा के जरिए देश के राजनीतिक क्षितिज पर छाने वाली भाजपा अब यूपी में भी अपना पुराना दांव आजमाएगी। सूबे का सियासी माहौल भाजपा के पक्ष में करने के लिए पार्टी रथयात्रा निकालने पर विचार कर रही है। पार्टी की रणनीति सूबे को चार हिस्से में बांट कर रथयात्रा आयोजित करने की है।
बताया जा रहा है कि हर रथयात्रा का रथी अलग होगा। 15-16 जुलाई को मुरादाबाद में होने वाली प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक में इस योजना पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यूपी चुनाव की रणनीति से जुड़े एक कद्दावर नेता के अनुसार प्रदेश को चार क्षेत्र में बांट कर अलग-अलग इलाकों से रथयात्रा शुरू करने और उनके अगल नेतृत्व को लेकर विचार चल रहा है। इसपर अंतिम निर्णय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में होगा। मगर सूत्र बताते हैं कि सूबे के सियासी फिंजा पर कब्जा जमाने की कवायद में भाजपा ने अलग-अलग क्षेत्रों से रथयात्रा शुरू करने की रणनीति बना ली है।
राजनीतिक लिहाज से सूबे को पूर्वांचल, पश्चिम, रूहेलखंड और बुंदेलखंड के रूप में चार हिस्सों में बांटा गया है। रथयात्रा के नेतृत्व के लिए चारों क्षेत्र में अलग-अलग नेता होंगे। शुरूआती चर्चा में पार्टी ने पूर्वांचल के रथ पर गोरखपुर के सांसद योगी आदित्य नाथ, पश्चिम में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री डा. संजीव बालियान और रूहेलखंड में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के नेतृत्व में रथयात्रा निकालने की योजना बनाई है। बुंदेलखंड के रथ पर उमा भारती या साध्वी निरंजन ज्योति में से एक को आगे किया जा सकता है। भाजपा रणनीतिकारों के अनुसार रथयात्रा के जरिए पार्टी सोशल इंजिनियरिंग के गणित को भी साधेगी।
अगड़ी जाति के नेता को भाजपा बनाएगी चुनावी चेहरा
चुनावी चेहरे के रूप में पार्टी ने अगड़ी जाति के नेता को आगे करने का मन बना लिया है। अब नैया पार करने के लिए वोट का गणित साधना उसके लिए अहम है। पार्टी की नजर गैर यादव ओबीसी बिरादरियों और दलितों में गैर जाटव मतों पर है।
आदित्यनाथ के जरिए भाजपा की रणनीति पूर्वांचल में ध्रुवीकरण कराने की है। तो बालियान के जरिए वह पश्चिम में जाट मतों को साधे रखना चाहती है। संतोष गंगवार के जरिए रूहेलखंड के कुर्मी मतों के साथ भाजपा पिछड़ी बिरादरी को भी संदेश देना चाहती है। वैसे भाजपा की राजनीतिक यात्रा में रथयात्रा का अहम महत्व है।
नब्बे के दशक में जब पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अपना जमीन तैयार कर रही थी। तब लाल कृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में सोमनाथ से अयोध्या तक निकली राम रथ यात्रा बेहद कारगर रही थी। उसके बाद पार्टी की ओर से देशभर में कई राजनीतिक यात्राएं निकाली गईं।
अब देश के सबसे बड़े प्रदेश पर राजनीतिक कब्जा जमाने की जद्दोजेहद कर रही पार्टी को पुराने दांव पर फिर से भरोसा जग रहा है। इसलिए पार्टी रणनीतिकार सहूलियत के लिहाज से सूबे को चार अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर क्षेत्रीय चेहरों को आगे कर रथयात्रा की योजना बना रहे हैं।