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भाजपा का फरमान, 'नमो एप' से जुड़कर जनता से संवाद करें नेता

Thu, 07 Jun 2018 03:59 PM IST
हरेन्द्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हरेन्द्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 07 Jun 2018 03:59 PM IST
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BJP said, leaders should Join the Namo App for public Communication

भाजपा जल्द ही माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर से दूरी बनाने की योजना पर बड़ी तेजी से काम कर रही है। पार्टी लंबे समय से सरकार के कामकाज का ब्योरा पेश करने और जनता से संवाद के लिए अभी तक ट्विटर का इस्तेमाल करती रही है, लेकिन अब पार्टी नमो एप को जनता तक पहुंचने का मुख्य जरिया बनाना चाहती है। 

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करें नमो एप पर अपडेट

भाजपा ने आगे कदम बढ़ाते हुए सभी नेताओं से कहा है कि चाहे छोटी सी मोर्चा की भी बैठक हो, उसका अपडेट नमो एप पर जरूर जाना चाहिए। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने मोर्चा के सभी पदाधिकारियों को संदेश जारी किया है कि अगर कभी भी भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उप-मुख्यमंत्रियों से मिलते हैं, तो अपडेट के लिए नमो एप का इस्तेमाल किया जाए। 
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पीएम हैं कई ग्रुप्स के एडमिन

पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस एप में भाजपा के लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों के लिए कई डेडिकेटेड ग्रुप्स हैं, जिनमें कई ग्रुप्स के एडमिन तो खुद प्रधानमंत्री मोदी ही हैं। यहां तक कि संसदीय बैठकों में भी प्रधानमंत्री कई सांसदों को नमो एप के इस्तेमाल और उनके मैसेजेज का जबाव देने के लिए जोर देते हैं। सूत्रों के मुताबिक पीएमओ भी क्षेत्रवार भाजपा नेताओं को मिलने वाले फीडबैक पर पैनी नजर रख रहा है। 
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फीडबैक पर पीएम की नजर

इसके पीछे एक मुख्य वजह मानी जा रही है कि मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर सभी सांसदों और विधायकों को सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने पेश करने का टास्क दिया गया है। सभी से कहा गया है कि आर्टिकल, वीडियोज और फोटोग्राफ्स के जरिए लोगों तक पहुंचा जाए। नमो एप को 50 लाख से ज्यादा लोगों ने अपने फोन में इंस्टाल कर रखा है और सरकार चाहती है कि उपलब्धियां एप के जरिए भी जनता का सामने पेश हों। टास्क देने का उद्देश्य यह है कि प्रधानमंत्री जानना चाहते हैं कि कौन क्या कर रहा है और किसे कौन सा कार्य सौंपा गया है।

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री जानना चाहते हैं कि अपने क्षेत्रों में सबसे लोकप्रिय नेताओं के साथ-साथ विधायकों के प्रदर्शन पर लोग क्या प्रतिक्रिया देते हैं। ताकि आगामी चुनावों में कामकाज और लोगों की प्रतिक्रिया आधार पर टिकट बांटें जाएं। सूत्रों का कहना है कि यह चुनावी साल है और जनता को बताना है कि चार साल में सरकार ने क्या उपलब्धियां हासिल की हैं। और अगर एक पोर्टल पर ही आपको सारे आंकड़े मिल जाएं तो नेताओं को इससे अपने समर्थकों के साथ भी शेयर करने में आसानी होगी। 
 

पीएम जमकर कर रहे हैं इस्तेमाल

BJP said, leaders should Join the Namo App for public Communication

चाहे कर्नाटक चुनावों में पार्टी कार्यकर्ताओं का संबोधन हो या अटल इनोवेशन में चयनित छात्रों के साथ संवाद, प्रधानमंत्री मोदी नमो एप के जरिए ही संवाद को प्राथमिकता दे रहे हैं। जून 2015 को लॉन्च हुए नमो एप को पार्टी सार्वजनिक जुड़ाव के लिए एक मंच के तौर इस्तेमाल करती रही है। नमो एप के जरिए आम आदमी और एनडीए सरकार के साथ सीधे संवाद तो कर ही सकते हैं, साथ ही मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के कामकाज के प्रदर्शन की समीक्षा भी ग्रुप्स में कर सकते हैं।

वहीं कुछ नेता इससे खुश भी हैं। उनका कहना है कि इस एप के जरिए उन्हें पता लग पा रहा है कि लोग उनके कामकाज पर क्या सही और गलत प्रतिक्रिया दे रहे हैं। साथ ही वे दूसरे साथी नेताओं के कामकाज पर भी नजर रख पा रहे हैं। उनका कहना है कि यह एप ट्विटर से ज्यादा सेफ है, क्योंकि ट्विटर पर ऐसे लोगों की तादाद बहुत ज्यादा है, केवल ट्रोल करने में विश्वास रखते हैं और कामकाज को लेकर प्रतिक्रिया देने की बजाय बेवजह की चर्चाओं में लगे रहते हैं। वहीं इस एप में गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी पर भी निगरानी की जा रही है। 

नमो एप का क्रैश कोर्स

वहीं पार्टी में कुछ ऐसे भी नेता हैं, जिन्हें एप के इस्तेमाल में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा रहा है। उसके पीछे वजह है उनका टेक्नोलॉजी फ्रेंडली न होना। ऐसे लोगों से पार्टी ने कहा कि इस काम में वे आईटी टीम की मदद लें। इसे लेकर हर दूसरे और आखिरी मंगलवार को पार्टी हेडक्वॉर्टर में ओरिएंटेशन प्रोग्राम के तहत एप पर क्रैश कोर्स आयोजित किया जाता है। जिसके बाद से एप पर ऐसे नेताओं की संख्या बढ़ी है जिनका टेक्नोलॉजी में हाथ तंग था। वहीं कुछ मंत्रियों ने भी अपने विभागों के कामकाज का ब्यौरा एप पर भेजना शुरू कर दिया है, ताकि दूसरे नेता भी उनकी उपलब्धियों को देख सकें। 

पिछले महीने 14 मई को पार्टी कार्यालय में हुई भाजपा के राष्ट्रीय पदाधकारियों, समस्त प्रदेश अध्यक्षों और संगठन महामंत्रियों की बैठक के बाहर नमो एप के इस्तेमाल की विशेष ट्रेनिंग भी दी गई और यह सिलसिला अभी भी जारी है। 

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