भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को 2019 में चुनौती मिलने का पूरा अंदेशा
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समय रहते हर बिगड़ी बनाने के लिए जाने जाते हैं। राजनीति में उन्होंने होमवर्क की न केवल नई परिभाषा गढ़ी है बल्कि शाह ने राजनीति में विकल्पों के इस्तेमाल तथा राजनीतिक तैयारी के दायरे को काफी बढ़ा दिया है।
भाजपा के एक केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि शायद यही वजह है कि अमित शाह को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पूरा भरोसा हासिल है। वहीं अमित शाह को 2019 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव में विरोधी दलों से चुनौती मिलने की संभावना है।
शाह लोकसभा या विधानसभा उपचुनावों को भाजपा की केन्द्र में सरकार का लिटमस टेस्ट नहीं मानते। उप चुनावों को भी वह इसी नजरिए से देखते हैं। इसी के साथ वह स्वीकार करते हैं कि लोकसभा चुनाव पर राष्ट्रीय मुद्दे, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय चेहरा असर डालता है।
मोदी सरकार के चार साल के कामकाज की प्रेसवार्ता में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जमकर तारीफ की और खुलकर कहा कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री के चेहरे के सामने विरोधी दलों के पास कोई चेहरा नहीं है।
सरकार विरोधी लहर
निजी बातचीत में भाजपा अध्यक्ष को यह मान लेने में कोई गुरेज नहीं है कि 2019 के आम चुनाव में सरकार विरोधी लहर रहेगी। वह मानते हैं कि सरकार विरोधी लहर का कुछ हद तक सामना करना पड़ेगा। वह सरकार के कामकाज, लोगों की नाराजगी का आकलन कर रहे हैं।
अमित शाह के मिजाज और रणनीति से भी साफ लगता है कि वह जमीनी स्तर पर रिपोर्ट लेने तथा नई रणनीति बनाने में व्यस्त हैं। शाह को राजनीति में नया विकल्प गढ़ने में महारत हासिल है। विपरीत परिस्थिति को वह इसी काबिलियत से पक्ष में मोड़ लेते हैं।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव इसका सीधा उदाहरण है। भाजपा ने बीएस येदियुरप्पा, जनार्दन रेड्डी, भाजपा सांसद श्रीरामुलु को साथ लाने में कोई परहेज नहीं किया। कई और प्रयोग किए और 104 सीटों को पाने में सफल रही।
20 राज्यों में भाजपा के सहयोग की सरकार
शाह बड़े गर्व से कहते हैं कि देश में कांग्रेस एक के बाद एक चुनाव हारती गई। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सत्ता में आए थे तो उससे पहले भाजपा की केवल आठ राज्य में सरकार थी। कांग्रेस 14 राज्य में सत्ता में थी। आज 14 राज्य में भाजपा की सरकार है। 20 राज्य में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकार है। 70 प्रतिशत भूभाग पर एनडीए की सरकार है।
भाजपा अध्यक्ष के मुताबिक यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति जनता के विश्वास को जताता है। वह बड़े फख्र से कहते हैं इसका असर भारतीय राजनीति में भी आया है। अभी सभी राजनीतिक दल मिलकर प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता से हटाने के लिए एकजुट हो रहे हैं।
सब अवसरवादी एक हो तो क्या?
भाजपा अध्यक्ष को इसकी परवाह नहीं है। वह साफ कहते हैं कि 2014 में सब मिलकर खिलाफ लड़े थे। उ.प्र. में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनाव में साथ लड़ी थी। सबको दो लड़कों का साथ पसंद था और भाजपा चुनाव में 325 सीटें जीतने में सफल रही।
शाह का तर्क है कि टीडीपी के चंद्र बाबू नायडू या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी साथ आ भी जाएं तो पश्चिम बंगाल या अंध्र प्रदेश की राजनीति पर इसका क्या असर पड़ जाएगा। लेकिन यह कहने की बाते हैं। अंदरखाने के सूत्रों के हवाले से माना जा रहा है कि शाह को उत्तर प्रदेश में राजनीतिक रिपोर्ट सकारात्मक नहीं नजर आ रही है। समाजवादी पार्टी, बसपा के गठबंधन या फिर समाजवादी, बसपा, कांग्रेस के गठबंधन की संभावना जरूर चिंता बढ़ा रही होगी।
यही स्थिति बिहार में भी खड़ी हो सकती है। इसी तरह के हालात महाराष्ट्र में नजर आ रहे हैं। कांग्रेस-एनसीपी का सहयोग झटका दे सकता है। शिवसेना की रणनीतिक सूझ-बूझ संकट बढ़ा सकती है। इससे पहले राजस्थान, म.प्र., छत्तीसगढ़ के प्रस्तावित विधानसभा चुनाव कदाचित अप्रिय स्थिति बनाते हैं तो तमिलनाडु की राजनीति बड़ा करवट ले सकती है। यानी राजनीतिक सहयोगी घटने, विरोधियों की एकजुटता बढ़ने का संकेत नकारात्मक माहौल बना सकता है।
सब ठीक कर लेंगे
यह मान लेने में कोई संकोच नहीं है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी निरंतर लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने वाले राजनेता हैं। इसलिए जब शाह से बन रहे नकारात्मक वातावरण, विपक्ष के आरोप, जनता की नाराजगी समेत अन्य बिन्दुओं पर सवाल हुए तो चार साल के सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए उन्होंने पूरी साफगोई दिखाई।
शाह ने कहा कि अरे बाबा अभी एक साल है न। हम इस दौरान सबकुछ ठीक कर लेंगे। पेट्रोलियम पदार्थो के बढ़ते दाम पर भी उन्होंने मुंह नहीं मोड़ा। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार इसको लेकर एक ठोस योजना पर काम कर रही है।
सरकार इसका कोई सकारात्मक हल निकालने में लगी हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच, समझ, उनकी नीति तथा प्रयास पर पूरा भरोसा जताया। उम्मीद भी जताई की 2014 के चुनाव से अधिक सीटें लाकर केन्द्र में एनडीए सरकार बनाएगी।