Politics: भाजपा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र, TMC के कल्याण बनर्जी को निलंबित करने की मांग की
Politics: भाजपा सांसदों ने कहा, कल्याण बनर्जी का यह कृत्य न केवल अध्यक्ष जगदंबिका पाल पर एक जानलेवा हमला है, बल्कि यह हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए भी खतरनाक है। उन्होंने लोकसभा की आचार समिति से भी जांच की मांग की।
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और उन्हें तत्काल निलंबित करने की मांग की है। इन सांसदों ने बनर्जी पर वक्फ विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक के दौरान अभूतपूर्व हिंसा का आरोप लगाया है।
जिन भाजपा सांसदों ने पत्र लिखा है, उनमें निशिकांत दुबे, अपराजिता सारंगी और अभिजीत गंगोपाध्याय शामिल हैं। पत्र में भाजपा सांसदों ने कहा कि उन्होंने और अन्य ने बनर्जी को समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल पर कांच की बोतल फेंकते हुए देखा है। उन्होंने इसे गुंडागर्दी और अमानवीय हिसा का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह घटना किसी सांसद से अपेक्षित सभ्य व्यवहार की सीमाओं को पार कर गई है।
भाजपा सांसदों ने कहा, कल्याण बनर्जी का यह कृत्य न केवल अध्यक्ष जगदंबिका पाल पर एक जानलेवा हमला है, बल्कि यह हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए भी खतरनाक है। उन्होंने लोकसभा की आचार समिति से भी जांच की मांग की, ताकि बनर्जी की सदस्यों रद्द करने पर विचार किया जा सके।
पत्र में आगे कहा गया है कि बनर्जी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए और उन्हें पुलिस हिरासत में लिया जाना चाहिए, ताकि इस मामले की गहन जांच की जा सके। सांसदों ने यह भी कहा कि जब तक जांच परी नहीं होती, तब तक उन्हें संसद की कार्यवाही से निलंबित किया जाना चाहिए।
इस बीच, कल्याण बनर्जी को वक्फ (संशोधन) विधेयक पर कार्यवाही के दौरान एक दिन के लिए निलंबित किया गया। भाजपा सांसदों ने आरोप लगाया कि एक दिन का निलंबन पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्यों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई आवश्यक है।
विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर विरोध जताया है। द्रमुक सांसद ए. राजा और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने पाल पर आरोप लगाया कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया है और घटना को सार्वजनिक किया है। पाल ने इन आरोपों को खारिज करते कहा कि उन्होंने केवल एक हिंसक घटना के बारे में बात की थी।
राजा ने कहा कि पाल की अध्यक्षता में समिति की बैठकें जल्दबाजी में हो रही हैं, जिससे न्याय की संभावना पर संदेह उठता है। वहीं, संजय सिंह ने इस बात पर सहमति जताई कि विपक्षी सदस्यों ने इस घटना पर कोई टिप्पणी न करने का फैसला किया है।
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